06/06/2026
विश्व पर्यावरण दिवस पर पलाश सभागार में भव्य कार्यक्रम का आयोजन
“आओ वन बंधु बनें” अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प
रांची, 05 जून 2026:
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, झारखंड सरकार के जनसंपर्क एवं विस्तार प्रभाग, रांची द्वारा आज पलाश सभागार, डोरंडा में एक भव्य, प्रेरणादायक एवं जन-जागरूकता आधारित कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, सतत जीवनशैली, वन एवं वन्यजीव संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति समाज, विशेषकर युवाओं और विद्यार्थियों को जागरूक एवं प्रेरित करना था।
कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों जैसे साईं नाथ यूनिवर्सिटी, बिरसा एग्रीकल्चर कॉलेज, मारवाड़ी कॉलेज, राईन उर्दू गर्ल्स हाई स्कूल, विद्या विकास पब्लिक स्कूल, संत जोसेफ गर्ल्स हाई स्कूल एवं अन्य तकनीकी संस्थानों के विद्यार्थियों, शिक्षकों, वन अधिकारियों, पर्यावरण विशेषज्ञों, गणमान्य नागरिकों तथा मीडिया प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात श्री एस आर नाटेश, आईएफएस सीसीएफ वाइल्डलाइफ ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए विभाग द्वारा संचालित “आओ वन बंधु बनें” अभियान की रूपरेखा एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पिछले कई सप्ताहों से यह अभियान विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों एवं सार्वजनिक स्थलों पर संचालित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों और नागरिकों को पर्यावरणीय दायित्वों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इस मौके पर मौजूद श्री अबूबकर सिद्दीकी पी आईएएस, सेक्रेट्री वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, झारखंड ने सभागार में सभी को संबोधित करते हुए कहा कि “हम प्रकृति की रक्षा करेंगे, वृक्ष लगाएंगे और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित भविष्य का निर्माण करेंगे।”
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए यह भी कहा कि “आज का विद्यार्थी यदि प्रकृति के प्रति जागरूक हो जाए, तो कल का भारत हरित और सुरक्षित बन सकता है। इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (PCCF & HoFF), झारखंड, श्री संजीव कुमार ने अपने संबोधन में कहा— “वन हमारी जीवन रेखा हैं और उनका संरक्षण हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं; पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।” कार्यक्रम में दो वक्ताओं ने अपने शब्दों से सभी को बहुत प्रेरित कर दिया । पहले वक्ता रूप में उपस्थित डॉ अशोक आर पाटिल, वाइस चांसलर, एनयूएसआरएल ने पर्यावरण संरक्षण के विभिन्न आयामों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा— “यदि हम आज प्रकृति की रक्षा नहीं करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करना कठिन हो जाएगा। ”उन्होंने वनों की कटाई, बढ़ते प्रदूषण एवं जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। दूसरे प्रमुख वक्ता डॉ. एम. के. रमेश ने अपने विचार रखते हुए कहा— “पर्यावरण केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व का आधार है। प्रकृति के बिना मानव जीवन की कल्पना संभव नहीं है। ”उन्होंने युवाओं से अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण-अनुकूल आदतें अपनाने तथा दूसरों को भी प्रेरित करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में श्री श्रीकांत वर्मा, डीएफओ, रांची ने सभी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा—“वन और वन्यजीव हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के आधार स्तंभ हैं। इनके संरक्षण में प्रत्येक नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। आज लगाया गया प्रत्येक पौधा आने वाले कल की सुरक्षित सांसों का आधार बनता है।” उन्होंने विद्यार्थियों को “आओ वन बंधु बनें” अभियान से जुड़कर पर्यावरण संरक्षण के दूत बनने का आह्वान किया।
कार्यक्रम को रोचक, सहभागितापूर्ण एवं शिक्षाप्रद बनाने के उद्देश्य से विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं गतिविधियों का भी आयोजन किया गया। इनमें स्किट (लघु नाटिका), क्विज प्रतियोगिता, एक्सटेम्पोर प्रतियोगिता, कविता पाठ, चित्रांकन एवं क्राफ्ट गतिविधियाँ प्रमुख रहीं। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों पर अपनी रचनात्मकता, ज्ञान एवं अभिव्यक्ति का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया। साथ ही सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, सतत जीवनशैली तथा हरित झारखंड के निर्माण हेतु सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिवस का विषय नहीं, बल्कि जीवनभर निभाई जाने वाली सामूहिक जिम्मेदारी है। विभाग द्वारा संचालित “आओ वन बंधु बनें” अभियान इसी जन-भागीदारी को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। आओ वन बंधु बनें — हरित झारखंड, स्वच्छ झारखंड।