07/12/2025
ग्राम पंचायत बुढ़ऊँ में विकास का 'कागजी' खेल!
*भगत वर्मा के घर से आशुतोष वर्मा के चक तक पेवर्स ब्लॉक निर्माण कार्य का सच।*
सभी सम्मानित ग्रामवासी ध्यान दें,
हमारे गाँव में विकास के नाम पर क्या चल रहा है, इसका एक जीता-जागता सबूत आज आपके सामने है।
जिस पेवर्स ब्लॉक सड़क की हम बात कर रहे हैं, आप सभी जानते हैं कि जमीन पर वहाँ मात्र कुछ मीटर ही कार्य हुआ है।
लेकिन, सरकारी कागजों में इस अधूरे काम के लिए ₹ 4,88,047 का भुगतान किया जा चुका है!
ये हम नहीं कह रहे, ये सरकारी रिकॉर्ड बोल रहा है। नीचे दिए गए पेमेंट वाउचरों को ध्यान से देखें।
पाई-पाई का सरकारी हिसाब सबूतों के साथ
हैरानी की बात यह है कि सारा का सारा भुगतान एक ही तारीख, 26 जून 2024 को किया गया है।
सामग्री के नाम पर निकला पैसा कुल ₹ 4,27,547
जमीन पर सामग्री दिखी नहीं, लेकिन फर्मों को लाखों का भुगतान हो गया:
HIND ENTERPRISES: इनको दो बार में कुल ₹ 3,82,547 का भुगतान किया गया पहला बिल ₹ 2,41,131 और दूसरा ₹ 1,41,416
MAHADEV KRISHNA CONSTRUCTION: इनको ₹ 45,000 का भुगतान किया गया।
मजदूरी के नाम पर निकला पैसा कुल ₹ 60,500
जब काम ही नहीं हुआ, तो यह मजदूरी किसने और कब की? इन लोगों के खातों में 26 जून को पैसे भेजे गए:
हृदय राम: ₹ 12,000
मिथिलेश कुमार: ₹ 12,000
मनोज कुमार: ₹ 12,000
शनि कुमार भारती: ₹ 8,400
नंद जी: ₹ 8,400
संजीव भारती: ₹ 7,700
ग्रामवासियों, अब सवाल पूछने का समय है:
जब मौके पर 5 लाख रुपये का काम रत्ती भर भी नहीं दिख रहा, तो यह सरकारी पैसा किसकी जेब में गया?
ऐसी क्या जल्दी थी कि 26 जून 2024 को ही सामग्री और मजदूरी के सारे बिल एक साथ पास कर दिए गए?
क्या इन मजदूर भाइयों ने सच में उस दिन वहाँ काम किया था, या सिर्फ इनके खातों का इस्तेमाल हुआ है?
यह जनता का पैसा है, हमारा और आपका पैसा है। इस खुली लूट पर चुप न रहें।
जिम्मेदार लोगों को जवाब देना ही होगा।
जागिए और हिसाब मांगिए!