29/05/2026
उर्दू अदब और आधुनिक गजल के सबसे चमकदार सितारे डॉ बशीर बद्र साहब ने 91 वर्ष की उम्र में इस फानी दुनिया को अलविदा कह दिया। बशीर बद्र को गज़ल विधा में ठेठ, सरल और बेहद रूमानी शब्दों को पिरोने के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने उर्दू शायरी को किताबी संजीदगी और भारी-भरकम शब्दों के दायरे से बाहर निकाला और उसे आम आदमी की बोलचाल का हिस्सा बनाया। साहित्य के क्षेत्र में उनके इसी ऐतिहासिक और बेमिसाल योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्मश्री’ जैसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान से नवाजा था। उनके जाने की खबर से देश-विदेश में मौजूद उनके लाखों प्रशंसकों और चाहने वालों में मायूसी छा गई है। जीवन के अंतिम दौर में वे डिमेंशिया के कारण अपनी याददाश्त खो चुके थे, लेकिन उनकी यादों को ज़िंदा रखते हुए उनकी पत्नी आज भी उन्हें बेहद धैर्यपूर्वक उनकी ही लिखी कविताएँ और शेर सुनाया करती थीं।