08/01/2026
एक सुबह, एक साक्षात्कार और इतिहास से साक्षात्कार
समय—2024 की गर्मियाँ।
माहौल—दुद्धी विधानसभा का उपचुनाव।
हवा में राजनीति थी, लेकिन ज़मीन पर जनता की बेचैनी, उम्मीदें और सवाल।
मैं और मेरा अज़ीज़ कैमरा पर्सन नितेश मौर्य तय कर चुके थे कि इस बार किसी भीड़ वाले चौराहे या मंच की चमक में नहीं, बल्कि किसी गाँव की मिट्टी में जाकर चुनावी धड़कन को महसूस करेंगे।
नितेश ने सहज ही कहा—
“भईया, क्यों न उसी गाँव चला जाए जहाँ से दुद्धी के सबसे लंबे समय तक विधायक रहे विजय सिंह गोंड जी आते हैं?”
मेरे मन ने बात आगे बढ़ाई—
“फिर क्यों न सीधे उन्हीं के घर चला जाए, जहाँ से दुद्धी की राजनीति का एक लंबा इतिहास निकला है।”
सहमति बनी।
सुबह लगभग 8 बजे हम कटोली (Katuali) पहुँचे—पूर्व मंत्री, सात बार विधायक रहे विजय सिंह गोंड जी के आवास पर।
वहाँ कोई शोर नहीं था, लेकिन हर चेहरा चुनावी जिम्मेदारी से भरा हुआ था।
पार्टी कार्यकर्ता, प्रचारक—कोई अनुमति ले रहा था, कोई रणनीति समझ रहा था, कोई क्षेत्र की ओर रवाना हो रहा था। यह किसी नेता का घर नहीं, एक चलता-फिरता राजनीतिक केंद्र लग रहा था।
हमने परिचय दिया—
“हम मीडिया से हैं। इस चुनाव को लेकर जनता के सवाल हैं, कुछ हमारे भी। एक साक्षात्कार करना चाहते हैं।”
उन्होंने बिना औपचारिकता के हामी भरी—
“बताइए, क्या करना है?”
उनके आवास परिसर में ही एक गार्डन का शांत कोना चुना गया।
दो कुर्सियाँ लगीं।
कैमरा ऑन हुआ।
और फिर शुरू हुई वह बातचीत, जो केवल साक्षात्कार नहीं थी—वह अनुभव था, स्वीकारोक्ति थी, और ज़मीन से जुड़ी राजनीति की पाठशाला थी।
करीब 58 मिनट तक चली उस बातचीत में जो बातें सामने आईं, वे सिर्फ खबर नहीं थीं—वे जनता की आँखें खोलने वाली थीं।
चुनावी माहौल में वह साक्षात्कार एक हल्की-सी हलचल नहीं, बल्कि गहरी तरंग बनकर निकला।
साक्षात्कार खत्म हुआ।
उन्हें बातचीत बहुत पसंद आई।
जब उन्होंने मुझसे मेरे गाँव के बारे में पूछा और मैंने कहा—
“मैं धनखोर गाँव से हूँ, और वही आपकी विधानसभा में आता है।”
उनके चेहरे पर जो आश्चर्य और अपनापन उभरा, वह शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता।
अपने क्षेत्र के व्यक्ति को सामने पाकर उनकी आँखों में जो खुशी थी, वह उनके व्यक्तित्व के बड़ेपन की सबसे सच्ची तस्वीर थी।
चुनाव परिणाम आए।
और फिर—चुनाव जीतने के बाद—लखनऊ से उन्होंने खुद मेरा नंबर ढूंढवाया।
फोन आया।
सिर्फ औपचारिक धन्यवाद नहीं, बल्कि आत्मीय साधुवाद।
एक और साक्षात्कार हुआ, एक साफ सुथरा स्वभाव और सबको समझने वाला व्यवहार एक अलग जोश था अब भी अगले कार्यकाल को लेकर।
आज जब पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो साफ़ लगता है—
आदिवासी समाज के लिए, दुद्धी की मिट्टी के लिए, इतने लंबे समय तक इतने निःस्वार्थ भाव से काम करने वाला नेता विरला होता है।
यही कारण है कि दुद्धी ने उन्हें 8 बार अपना विधायक चुना।
और यही कारण है कि उनका जाना सिर्फ एक व्यक्ति का जाना नहीं था—
वह एक युग का अवसान था।
अपने अंतिम कार्यकाल के दौरान ही उन्होंने हमें अलविदा कहा।
लेकिन उनके विचार, उनका संघर्ष, और उनकी सादगी आज भी दुद्धी की हवाओं में ज़िंदा है। शब्द कम हैं, बस कुछ भावनाएं जो शब्दों में बयान की जा सकती थी यहां हैं। नमन "आदिवासी गांधी" 🙏
विजय सिंह गोंड जी—
आप सिर्फ नेता नहीं थे,
आप विश्वास थे।
आपको शत-शत नमन।
Vijay Singh Gond