12/06/2026
Rewari Hulchul
महाभारत कालीन रेवाड़ी राजमहल (रानीजी की ड्योढ़ी) की प्राचीन जल आपूर्ति प्रणाली ने चौंकाया, ईरान के प्राचीन महल से मिलती है तकनीक
रेवाड़ी नगर के ऐतिहासिक राजमहल "रानीजी की ड्योढ़ी" को शहर की सबसे महत्वपूर्ण जीवित विरासत संरचनाओं में से एक माना जाता है। यह महल नगर की परिधि पर बने जगन्नाथ द्वार, कानोड़ द्वार, गोकुल द्वार, दिल्ली द्वार और जयपुर द्वार के भीतर, नगर के मध्य स्थित है।
राजा राव बिजेन्द्र सिंह के अनुसार, कुछ वर्ष पूर्व राजमहल के जीर्णोद्धार के दौरान दीवारों के भीतर एक अत्यंत प्राचीन और विकसित जल आपूर्ति प्रणाली सामने आई थी। इसमें लगभग एक से डेढ़ फुट लंबे तथा चार इंच चौड़े मिट्टी के पक्के पाइप पाए गए, जिन्हें मिट्टी के घड़ों के साथ जोड़कर पूरे महल के विभिन्न हिस्सों तक पेयजल पहुंचाने के लिए प्रयोग किया गया था।
विशेष बात यह है कि वर्ष 2015 में ईरान के बोरुजर्ड क्षेत्र में एक निर्माण परियोजना के दौरान मिले प्राचीन महल के खंडहरों में भी दीवारों के भीतर करीब एक फुट लंबे मिट्टी के पाइपों से बनी जल आपूर्ति प्रणाली मिली थी। शोधकर्ताओं ने उस ईरानी संरचना का काल पहले 224 से 651 ईस्वी के बीच माना था, लेकिन निर्माण सामग्री और तकनीक के आधार पर उसके और अधिक प्राचीन होने की संभावना भी व्यक्त की गई है।
रेवाड़ी राजमहल से प्राप्त मिट्टी के पाइपों और घड़ों की संरचना तथा ईरान के महल में मिली जल आपूर्ति तकनीक में आश्चर्यजनक समानता दिखाई देती है। यह समानता न केवल उस दौर के कारीगरों की परिष्कृत तकनीकी दक्षता को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि प्राचीन सभ्यताओं में जल प्रबंधन और निर्माण कला अत्यंत विकसित स्तर पर पहुंच चुकी थी।
हालांकि, इस आधार पर रानीजी की ड्योढ़ी के निर्माण काल का अंतिम निर्धारण केवल वैज्ञानिक एवं पुरातात्विक अध्ययन के बाद ही संभव है। फिर भी यह खोज निश्चित रूप से पुरातत्वविदों, इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के लिए अध्ययन का एक महत्वपूर्ण विषय बन सकती है।
राजा राव बिजेन्द्र सिंह ने कहा कि रेवाड़ी की इस ऐतिहासिक धरोहर पर व्यापक शोध होना चाहिए, ताकि इसकी वास्तविक प्राचीनता और गौरवशाली विरासत विश्व के सामने आ सके।
✍️ रियासत-ए-रेवाड़ी
राजा राव बिजेन्द्र सिंह
Rao Bijender Singh