05/06/2026
प्राकृतिक खेती सतत विकास एवं समृद्धि का मार्ग- डा. कृष्ण कुमार
दैनिक साथी रेवाड़ी, 05 जून।
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र, बावल द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर खेत बचाओ अभियान का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों में पर्यावरण संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार, जल संरक्षण तथा प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम में बावल के विधायक डॉ. कृष्ण कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में किसानों से नियमित रूप से मिट्टी की जांच करवाने तथा मृदा परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का उपयोग न केवल उत्पादन लागत को कम करता है बल्कि भूमि की उर्वरता को भी बनाए रखता है।
डॉ. कृष्ण कुमार ने नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश (एनपीके) के संतुलित उपयोग पर बल देते हुए कहा कि अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से भूमि की गुणवत्ता प्रभावित होती है। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती सतत विकास एवं समृद्धि का मार्ग है। स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर तथा बाहरी महंगे कृषि आदानों पर निर्भरता कम करके किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए किसानों को जल संरक्षण तकनीकों को अपनाने, सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों का उपयोग बढ़ाने, वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहित करने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए खाद्य तेलों की खपत में लगभग 10 प्रतिशत कमी लाने का भी सुझाव दिया।
इस अवसर पर प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. नरेश कौशिक ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए मृदा, जल एवं पर्यावरण का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि किसान प्राकृतिक खेती, जैविक कार्बन संवर्धन, फसल विविधीकरण एवं संसाधन संरक्षण आधारित कृषि प्रणालियों को अपनाएं। उन्होंने किसानों से मृदा को बचाने, जल की प्रत्येक बूंद का सदुपयोग करने तथा उर्वरकों एवं कीटनाशकों का विवेकपूर्ण उपयोग करने का आह्वान किया। डॉ. कौशिक ने कहा कि स्वस्थ मिट्टी ही स्वस्थ फसल, स्वस्थ पर्यावरण और स्वस्थ समाज की आधारशिला है। उन्होंने किसानों को हरी खाद, गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट तथा फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन को अपनाने की सलाह दी, जिससे मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ाई जा सके और भूमि की उत्पादकता लंबे समय तक बनी रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, बावल के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. धर्मबीर यादव ने मुख्य अतिथि एवं उपस्थित किसानों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र एवं क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र किसानों तक नवीनतम कृषि तकनीकों को पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने किसानों को पर्यावरण संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. बलबीर सिंह ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों एवं उपस्थित किसानों का धन्यवाद ज्ञापित किया तथा सभी से खेत बचाओ अभियान को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर बावल क्षेत्र के लगभग 150 किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में अनिल कुमार, जिला परिषद सदस्य रेखा, राम सिंह, निहाल चौकान सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।