07/09/2026
#पूर्व_जन्म_कृत_फल
"अक्षिरोगी नासिकायां व्रणी कृमिसमाकुलः।
तैलहारी भवेत्तैली गुडहारी ज्वरी सदा॥"
तैलहारी (तेल की चोरी करने वाला): जो व्यक्ति तेल का हरण करता है, वह अगले जन्म में 'तेली' बनता है। इसके साथ ही वह नेत्र रोगों से ग्रस्त होता है तथा उसकी नाक में ऐसे घाव (व्रण) होते हैं जो कृमियों (कीड़ों) से व्याप्त रहते हैं।
गुडहारी (गुड़ की चोरी करने वाला): जो व्यक्ति गुड़ की चोरी करता है, वह सदैव ज्वर (बुखार/ताप) से पीड़ित रहता है।