01/08/2026
lलोक संस्कृति विशेष
*देवीथात का गोठी मेला: जहां सदियों पुरानी आस्था, देव परंपरा और प्रकृति का होता है अद्भुत संगम*
विकासखंड जौनपुर के अंतर्गत तहसील नैनबाग की पट्टी ईडवालस्यूँ स्थित प्राचीन देवस्थल देवीथात में श्रावण मास की 15 गते आयोजित होने वाला गोठी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की लोकआस्था, सांस्कृतिक विरासत और सदियों पुरानी देव परंपरा का जीवंत प्रतीक है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को इस वर्ष भी स्थानीय लोगों ने पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाया। क्षेत्र में इस मेले के साथ ही पर्व-त्योहारों के शुभारंभ की मान्यता भी जुड़ी हुई है।
लोकमान्यताओं के अनुसार प्राचीन देवस्थल देवीथात में माँ गौरजा का दिव्य निवास है, जबकि भगवान नागराज अपनी बहन माँ गौरजा से मिलने वर्ष में दो बार—बैसाख मास की द्वितीया तथा भाद्रपद में जन्माष्टमी के उपरांत—अपने सिद्धधाम नागटिब्बा से दिव्य घोड़ी पर सवार होकर यहां पहुंचते हैं। बुजुर्गों का कहना है कि पूर्वकाल में कई लोगों को इस दिव्य मिलन के दर्शन हुए थे। आज भी यह दिव्य परंपरा निरंतर जारी है, लेकिन इसके दर्शन किसी को नहीं हो पाते। यही आस्था इस देवस्थल को क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में विशिष्ट स्थान प्रदान करती है।
गोठी मेले की सबसे अनूठी परंपरा यह है कि क्षेत्र के ग्वाल-बाल बुग्याल में मिट्टी से भगवान नागदेवता का स्वरूप निर्मित कर उन्हें भगवान श्रीकृष्ण के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजते हैं। इसके उपरांत केदार पाती, दही, मक्खन, धूप, दीप, पुष्प एवं प्रसाद अर्पित कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, उत्तम कृषि, पशुधन की उन्नति और समस्त जनमानस के मंगल की कामना की जाती है। सदियों से चली आ रही यह लोक परंपरा आज भी उसी श्रद्धा, विश्वास और आत्मीयता के साथ निभाई जा रही है, जो इस मेले को उत्तराखंड की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक विरासत का अद्वितीय प्रतीक बनाती है।