07/08/2026
साथियों नमस्कार! आप सभी तो जानते ही हैं कि दो साल पहले 2024 की 1, सितंबर को मेरे साथ मेरे जीवन की सबसे दर्दनाक घटना घटित हुई थी, जिसमें मैं बुरी तरह घायल हो गया था. उसके अगले दिन 2 सितंबर 2024 को कोतवाली ऋषिकेश से व0उ0नि0 विनोद कुमार एक नोटिस / सूचना लेकर आते हैं कि सोशल मीडिया के माध्यम से संज्ञान में आया है कि कल दिनांक 1.09.2024 को इंद्रानगर ऋषिकेश में आपके साथ मारपीट हुई है. जबकि उस समय चीता पुलिस घटनास्थल पर आई थी जो वीडियो में भी साफ दिखाई दे रहे थे, जबकि 1 सितंबर को ही आंदोलनकारी समेत कई लोगों ने इस मारपीट की घटना के विरोध में कोतवाली ऋषिकेश का भी घेराव किया था. चीता पुलिस की मौजूदगी, कोतवाली पुलिस का घेराव, कोतवाली के बगल में सरकारी अस्पताल से लेकर एम्स ऋषिकेश में हमारे शुभचिंतकों द्वारा भारी संख्या में उपस्थिति के बावजूद ये अगले दिन 2 सितंबर को पता चलने की बात कह रहे हैं.
यही नहीं जैसे ही हमारे साथी द्वारा पुलिस के नोटिस पर कार्यवाही करते हुए 2 सितंबर को शिकायत दर्ज की जाती है तो ताज्जुब देखिए कि उसके एक घंटे के अंदर हमारे खिलाफ भी क्रॉस FIR दर्ज हो जाती है. आप सबूत के तौर पर देख सकते हैं कि मेरी मारपीट की शिकायत घटना के अगले दिन 2 सितंबर की सुबह 10 बजकर 34 मिनट पर हुई वहीं मेरे खिलाफ भी शिकायत एक घंटे के अंदर 11 बजकर 31 मिनट पर हो गई.
मतलब पहले तो पुलिस कहती है कि अपनी शिकायत दर्ज करो फिर एक घंटे के अंदर मेरे खिलाफ भी शिकायत दर्ज करवा देती है, तो इसका क्या मतलब समझा जाए?
माननीय न्यायाधीश महोदय, इसी एक बिंदु पर यदि मंथन किया जाए तो बहुत ही गंभीर सवाल है और मैं माननीय न्यायालय का ध्यान भी इस तरफ जरुर आकर्षित करवाना चाहूंगा कि यदि हम प्रथम आरोपी थे तो हमारे खिलाफ हमारी शिकायत से पहले ही उसी कोतवाली में शिकायत दर्ज क्यों नहीं हुई और यदि मैं पीड़ित था तो मेरी पुलिस के ही सूचना देने के बाद दर्ज की गई शिकायत के एक घंटे के अंदर हमारे खिलाफ शिकायत कैसे दर्ज हो गई?
इस घटना के बाद 16 नवंबर 2024 को मैंने इस संबंध में महामहिम राष्ट्रपति महोदय, माननीय प्रधानमंत्री, माननीय नेता प्रतिपक्ष, महामहिम राज्यपाल उत्तराखण्ड और माननीय सूचना प्रसारण सचिव को अपनी व्यथा पर जाँच हेतु पत्र भी दिया था, जिसपर मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस मुख्य बिंदु पर मेरे साथ न्याय जरुर होगा.
इसके साथ ही मैं बाईस साल से पत्रकारिता क्षेत्र में हूँ वहीं जन समस्या पर हमें सत्ता और व्यवस्था की आलोचना करनी पड़ती है पर इसका ये मतलब तो नहीं निकाला जाना चाहिए कि हम पर हमला भी हो और हमारे खिलाफ शिकायत दर्ज कर षड़यंत्र भी रचा जाए और वर्तमान में जन समस्याओं पर पत्रकारिता करते हुए मेरे खिलाफ तीन शिकायतें दर्ज हैं जिसमें पिछले साल दिसम्बर 2025 में पत्थरबाजी और फिर इसी साल जनवरी में एक पत्रकार महिला द्वारा पत्थर से हमला करवाने की तीसरी झूठी शिकायत भी दर्ज हो गई है.