Rajkumar ke kavita gazal

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28/07/2026

26/07/2026

महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय भारती जय भारतम।
ज्ञान के चक्षु कोरिडोर में सबका करें स्वागतम।
अम्बेडकर - सी शिक्षा पावे विवेकानंद विवेक मिले।
ऋषि सुश्रुत वैध बनकर, दयानंद पथ अनेक मिले।
ए प्लस की गौरवगाथा रैंकिंग उच्च अभिमान रहे।
NEP का पाठ्यक्रम रहे, नव शिक्षा अनुमान रहे।
सावित्रीबाई फुले कक्ष में सबका करें स्वागतम।
ज्ञान के चक्षु पुस्तकालय में सबका करें स्वागतम।
लाखों लाख विद्यार्थी पढ़ते, नवाचार का मेल यहां।
रोहतक की धरती पै मैडल नित्य जीते खेल यहां।
दयानंद के सपनों का भारत खुले रहते द्वार यहां।
खुला परिसर बड़ी पार्किंग, अनुशासन का सार यहां।
राजकुमार विभिन्न विषयों में सबका करें स्वागतम।
ज्ञान के चक्षु पुस्तकालय में सबका करें स्वागतम।
शब्दपुत्र राजकुमार वत्स

23/07/2026
18/07/2026

शुभारंभ शुभारंभ हाईड्रोजन जंक्शन।
जींद से सोनीपत की यात्रा न कोई प्रदूषण।

फ्यूल सेल पै आधारित है जींद आली या गाड़ी।
दस कोचों के साथ चलेंगे, चौधर हो गई ठाडी।
बिन प्रदूषण रेल चली है हाईड्रोजन जंक्शन।

पूर्णतः स्वदेशी रेल सै बिना बिजली के चलती।
2600 यात्री बैठेंगे, हवा से बातें करती।
3200 हार्सपावर इसमें केवल जल का मिश्रण। to
शब्दपुत्र राजकुमार वत्स

07/07/2026

सत जिन्दा की पावन धरती, रोशन है प्रकाश से।
ज्ञान के दीप जलाते है हम, विद्या, विवेक, विकास से।
विज्ञान, कला और संस्कृति से, सुंदर सुगम बनाते हैं
उच्च आदर्शों के बल पर हम, ऊँचाइयां छू जाते हैं।
सारे सपने सच हो जाते, गुरूजन जमनादास से।

शिक्षा से प्रकाशित होकर, जग में नाम कमाएँगे।
अपने गुरुओं के आदर्शों को, जीवन में अपनाएँगे।
पग - पग आगे बढ़ते जाते, अपने ही विश्वास से।

गुरूजन हमारे पथ-प्रदर्शक ज्ञान सुधा बरसाते हैं।
संस्कारों की अमृत धारा जीवन में पहुंचाते हैं।
कविवर रोशन आंगन कर दो, शिक्षा के प्रकाश से।
#शब्दपुत्र #राजकुमारवत्स

07/07/2026

कोये रूसै तै रूसे जा, राधा का आणा ठीक नहीं।
वा रूकमण न्यूए कह थी इतणा भी श्याणा ठीक नहीं।

याणा बालक हो तो वो हठ धमकाना ठीक नहीं।
बिन बुलाए किसे के घर पे जाणा ठीक नहीं।

गली घेर नै कब्जा ले ऐसा करणा ठीक नहीं।
दादा लाई हेली में ताला लाणा ठीक नहीं।

थारे जीरी गैर लगावै यूं बैठे खाणा ठीक नहीं।
तू कैसा है किसानी, ये दिल समझाणा ठीक नहीं।

घोड़े के पाछै जाणा राजा संग जाणा ठीक नहीं।
पंचायती कुई पे खुले में नहाणा ठीक नहीं।

चोरी का, चंदा खाणा, वो झूठा गाणा ठीक नहीं।
मैं मेहर करूं था तेरी पर साथ निभाणा ठीक नहीं।

म्हारे गाम की चियाणी में राजू जाणा ठीक नहीं।
गैर गाम की जोहड़ी रै वहां पे नहाणा ठीक नहीं।

रोटी की भूख सभी ने, ज्यादा खाना ठीक नहीं।
जरूरत से ज्यादा मिल जा तो मुंह फुलाना ठीक नहीं।
शब्दपुत्र राजकुमार वत्स

19/06/2026

दुनिया में इस मरज़ के लाखों मरीज है।
वो जो करते थे दवा दिल की, आज खुद ही मरीज़ हैं।
यहां - कहां हैं रूकमण मन्दिर सब राधे राधे है।
कोई रूकमण को बतला दो, उसे राधा अजीज है।
कुछ दूर तक चले थे अमेरिका जा पहुंचे।
वो नाज़ुक सी लेवेंसकी, बिल क्लिंटन मरीज़ हैं।
चलो जन्नत में चलते हैं जले रम्भा, उर्वशी भी।
कहां मेनका तेरी जन्नत विश्वामित्र अजीज है।
शब्दपुत्र राजकुमार वत्स

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