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01/09/2026

बिजली विभाग की खुली लूट को लेकर किसानों में आक्रोश: गुलशन रोड
Uttrakhand Kisan Morcha

01/09/2026

हर्ष एनकाउंटर के बाद हुए आंदोलन में अखिल भारतीय रोड महासभा के प्रधान बलकार सिंह ने रोड समाज को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पूरे आंदोलन को शांतिपूर्ण, संयमित और जिम्मेदारीपूर्ण ढंग से आगे बढ़ाने के उनके प्रयासों की हर ओर सराहना हो रही है। आंदोलन के दौरान समाज की एकजुटता बनाए रखने और न्याय की मांग को मजबूती से उठाने में बलकार सिंह के नेतृत्व को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Ror Ki Chaupal - रोड़ों की चौपाल Soni Ror Rohit Choudhary Ror

घाटों के नाम पर शहर मे खूब राजनीति चमकी लेकिन क्या रखरखाव और सुरक्षा भूल गए जिम्मेदार? घाट पर अंधेरे में खूब होती है असा...
01/09/2026

घाटों के नाम पर शहर मे खूब राजनीति चमकी लेकिन क्या रखरखाव और सुरक्षा भूल गए जिम्मेदार? घाट पर अंधेरे में खूब होती है असामाजिक गतिविधिया......
https://godwinlive.in/anti-social-elements/
Arvind Kashyap Akshay Pratap Singh Haridwar Police

हर्ष एनकाउंटर आंदोलन ने गढ़ी बलकार सिंह के नेतृत्व की नई पहचानकरनाल(सोनी रोड़)हर्ष एनकाउंटर मामले ने केवल न्याय की मांग क...
01/09/2026

हर्ष एनकाउंटर आंदोलन ने गढ़ी बलकार सिंह के नेतृत्व की नई पहचान
करनाल(सोनी रोड़)हर्ष एनकाउंटर मामले ने केवल न्याय की मांग को जन्म नहीं दिया, बल्कि रोड़ समाज की एकजुटता और उसके नेतृत्व की ताकत को भी पूरे उत्तर भारत के सामने रखा। इस पूरे आंदोलन में अखिल भारतीय रोड़ महासभा के प्रधान बलकार सिंह जिस तरह समाज के साथ एक ढाल बनकर खड़े दिखाई दिए, वह उनके व्यक्तित्व, धैर्य, संगठन क्षमता और समाज के प्रति प्रतिबद्धता की एक अलग कहानी कहता है।

हर्ष एनकाउंटर के बाद रोड़ समाज के सामने भावनात्मक माहौल था। ऐसे समय में किसी भी बड़े आंदोलन को संभालना आसान नहीं होता। भीड़ को जुटाना एक बात है, लेकिन हजारों लोगों की भावनाओं को अनुशासन में रखते हुए आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखना उससे कहीं बड़ी चुनौती है। करनाल में रोड़ समाज का प्रदर्शन इसी मायने में खास बन गया। विभिन्न समाचार रिपोर्टों के अनुसार, अखिल भारतीय रोड़ महासभा के नेतृत्व में समाज ने महापंचायत और विरोध प्रदर्शन के जरिए स्वतंत्र जांच की मांग उठाई और आंदोलन को लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाया।

बलकार सिंह के नेतृत्व की सबसे बड़ी परीक्षा आंदोलन के दौरान हुई। हजारों लोगों की भीड़, करनाल जैसे बड़े शहर में भारी दबाव और समाज के भीतर न्याय की तीखी मांग—इन परिस्थितियों में एक छोटी सी चूक भी हालात बिगाड़ सकती थी। लेकिन आंदोलन के दौरान शांति और अनुशासन बनाए रखने पर जोर दिया गया।

यहां बलकार सिंह के नेतृत्व की असली पहचान दिखाई देती है। समाज को केवल भावनात्मक नारों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उसे संगठित किया गया, दिशा दी गई और एक स्पष्ट एजेंडे के साथ प्रशासन और सरकार के सामने खड़ा किया गया।

रोड़ समाज की ओर से तीन प्रमुख मांगें सामने रखी गईं—हर्ष एनकाउंटर मामले की स्वतंत्र जांच, संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तथा करनाल विधायक जगमोहन आनंद के बयान को लेकर समाज से माफी। बाद की तस्वीरों के अनुसार, विधायक जगमोहन आनंद ने रोड़ समाज के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद भरी मीडिया के सामने खेद व्यक्त किया और माफी मांगी, जिसे महासभा ने अपनी एक मांग पूरी होने के रूप में स्वीकार किया।
इस पूरे घटनाक्रम में एक बात विशेष रूप से चर्चा में रही कि आंदोलन का केंद्र केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि न्याय की मांग था। बलकार सिंह और रोड़ समाज के नेतृत्व ने बार-बार जांच और जवाबदेही के मुद्दे को प्रमुखता दी। यह संदेश आंदोलन की दिशा तय करने वाला साबित हुआ—कि समाज अपने सदस्य के लिए केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि तथ्यों की निष्पक्ष जांच और न्याय चाहता है।

सरकार ने मामले की जांच राज्य अपराध शाखा को सौंप दी थी, लेकिन रोड़ समाज स्वतंत्र जांच की मांग पर कायम रहा। प्रमुख समाचार रिपोर्टों के अनुसार, महासभा ने सीबीआई जांच अथवा किसी स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा भी बनाए रखा।

राजनीति में शब्दों की कीमत होती है और जनभावनाओं से जुड़े मामलों में नेताओं को अपने बयानों की जवाबदेही भी लेनी पड़ती है। करनाल विधायक जगमोहन आनंद और रोड़ समाज के बीच चले गतिरोध का समाधान उस समय आगे बढ़ा जब विधायक ने समाज के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में खेद जताया और माफी मांगी।

इस बैठक में विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण सहित कई प्रमुख नेता मौजूद थे। बैठक के बाद बलकार सिंह ने माफी को स्वीकार करते हुए विधायक के साथ मतभेद समाप्त होने की बात कही, हालांकि हर्ष एनकाउंटर मामले से जुड़ी जांच और कार्रवाई की अन्य मांगों को लंबित बताया गया।

बलकार सिंह की सबसे बड़ी ताकत—भाषा, धैर्य और संगठन

किसी समाज का प्रधान केवल पद से बड़ा नहीं बनता। उसकी पहचान उसके संकट के समय के व्यवहार से होती है।

बलकार सिंह के इस पूरे आंदोलन में तीन बातें प्रमुख रूप से सामने आईं

पहली—अपनी बात मजबूती से रखने की क्षमता।
दूसरी—हजारों लोगों को एक मंच पर अनुशासित रखना।
तीसरी—विरोध के बावजूद संवाद के दरवाजे खुले रखना।

यही कारण है कि आंदोलन और सरकार के बीच बातचीत का रास्ता बना। एक तरफ समाज अपनी मांगों पर कायम रहा, दूसरी तरफ बातचीत के जरिए विधायक की माफी का रास्ता निकला।

आज हरियाणा के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी रोड़ समाज के बीच इस आंदोलन की चर्चा है। समाज के लोगों को यह एहसास हुआ कि जब संगठन मजबूत हो, नेतृत्व स्पष्ट हो और मुद्दा न्याय का हो, तो बड़ी से बड़ी आवाज भी शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता तक पहुंचाई जा सकती है।

हर्ष का मामला केवल एक परिवार का नहीं रहा, हर्ष एनकाउंटर मामले ने रोड़ समाज को एक मंच पर लाने का काम किया। समाज की भावना यही रही कि हर्ष के मामले में न्याय की लड़ाई अधूरी नहीं छोड़ी जानी चाहिए। विधायक की माफी के बाद एक मांग पूरी हुई है, लेकिन स्वतंत्र जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग अभी भी चर्चा और संघर्ष के केंद्र में है।

यही इस आंदोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि भी है—कि मुद्दा भटकने नहीं दिया गया।
बलकार सिंह ने इस आंदोलन में यह साबित किया कि नेतृत्व का मतलब केवल मंच से भाषण देना नहीं होता। नेतृत्व का अर्थ है संकट के समय समाज के साथ खड़ा होना, हजारों लोगों की भावनाओं को संभालना, अनुशासन बनाए रखना, सरकार के सामने मजबूती से मांग रखना और जरूरत पड़ने पर संवाद के जरिए समाधान का रास्ता निकालना।

करनाल का हर्ष एनकाउंटर आंदोलन रोड़ समाज के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद किया जा सकता है। विधायक की माफी इस आंदोलन की एक राजनीतिक उपलब्धि है, लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी मांगों पर होगी।

हर्ष के नाम पर उठी न्याय की आवाज को रोड़ समाज ने एकजुटता की ताकत में बदल दिया है—और इस पूरे घटनाक्रम ने बलकार सिंह को केवल एक संगठन के प्रधान के रूप में नहीं, बल्कि समाज को संगठित करने वाले प्रभावशाली नेतृत्व के रूप में स्थापित किया है।
सोनी रोड़
Godwin Live Akshay Pratap Singh Ror Ki Chaupal - रोड़ों की चौपाल Ror Aakash Soni Ror Rohit Choudhary Ror

31/08/2026

उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में ‘संस्कृत सप्ताह महोत्सव' के समापन पर प्रतियोगिता में अव्वल आने वाले छात्रों को सम्मानित करते हुए सुनिए कुलपति प्रोफेसर रमाकांत पांडे ने जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन पर Gen Z को लेकर क्या बड़ी बात बोल दी......
Radha Rupesh Sarma Sourabh Bhushan Sharma Arjun Pandit Junaid Malik Raja

31/08/2026

हल्द्वानी शुद्धिकरण को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में नया उबाल, उत्तराखंड के अलग-अलग थानों में रिपोर्ट दर्ज करने के लिए कांग्रेस पार्टी का आज का प्रदर्शन.......
Gaurav Goel Rajendra Chaudhary Sudhir Shandilya Subhash Saini

31/08/2026

चलती स्लीपर बस में 16 वर्षीय छात्रा से गैंगरेप...
दिल्ली - चलती स्लीपर बस में 16 वर्षीय छात्रा से गैंगरेप। मैनपुरी की रहने वाली छात्रा नोएडा आने के लिए परी चौक से स्लीपर बस में बैठी थी।
चलती बस में ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप ने छात्रा से गैंगरेप किया। बस में पर्दे लगे होने के कारण अंदर की घटना बाहर से दिखाई नहीं दी। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। परी चौक से कश्मीरी गेट तक करीब 47 KM के सफर में छात्रा के साथ वारदात हुई।
Haridwar Police Pushkar Singh Dhami

हल्द्वानी शुद्धिकरण प्रकरण को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन, एफआईआर की मांगरुड़की में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गंगनहर कोतवाल...
31/08/2026

हल्द्वानी शुद्धिकरण प्रकरण को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन, एफआईआर की मांग
रुड़की में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गंगनहर कोतवाली पहुंचकर सौंपा प्रार्थना पत्र
रुड़की।सोनी रोड़।हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद कथित शुद्धिकरण और हवन के मामले ने सियासी रंग ले लिया है। इस प्रकरण को लेकर कांग्रेस ने प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन किया और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई। रुड़की में भी महानगर और ग्रामीण कांग्रेस के कार्यकर्ता गंगनहर कोतवाली पहुंचे और घटना के विरोध में प्रदर्शन कर एफआईआर दर्ज करने की मांग की।

जिला कांग्रेस कमेटी रुड़की महानगर एवं ग्रामीण कांग्रेस की ओर से कोतवाली प्रभारी को अलग-अलग प्रार्थना पत्र दिए गए। अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष राजकुमार प्रधान तथा प्रदेश कांग्रेस महामंत्री अरविंद प्रधान की ओर से जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।

जिला कांग्रेस कमेटी रुड़की महानगर अध्यक्ष राजेंद्र चौधरी एडवोकेट ने कहा कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर ने देश के प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार दिए हैं और किसी भी व्यक्ति को बड़ा या छोटा नहीं माना जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद शुद्धिकरण के नाम पर किए गए हवन-पूजन से दलित एवं अनुसूचित जाति समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने मामले में मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की।

राजेंद्र चौधरी ने कहा कि कांग्रेस भेदभाव की राजनीति में विश्वास नहीं करती और दलित समाज का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के बयान और भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को सदन और संविधान की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए।

वहीं कलियर विधायक फुरकान अहमद ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे केवल दलित समाज के नेता नहीं, बल्कि देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को गंभीरता से उठा रही है और दलित समाज के सम्मान तथा संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा। प्रदर्शन के दौरान प्रदेश कांग्रेस महामंत्री अरविंद प्रधान, राव शेर मोहम्मद, हाजी नौशाद अहमद सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
Gaurav Goel Rajendra Chaudhary

Gen Z को अपनी जड़ों और संस्कारों से जुड़े रहना जरूरी,विरोध का अधिकार सबको, लेकिन भाषा और व्यवहार में संयम भी जरूरी: प्रो...
31/08/2026

Gen Z को अपनी जड़ों और संस्कारों से जुड़े रहना जरूरी,विरोध का अधिकार सबको, लेकिन भाषा और व्यवहार में संयम भी जरूरी: प्रो. रमाकांत पांडे, कुलपति उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय
हरिद्वार।सोनी रोड़) उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में संस्कृत सप्ताह महोत्सव के दौरान कुलपति प्रो. रमाकांत पांडे ने Gen Z की बदलती सोच और हाल के युवा प्रदर्शनों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार सभी को है, लेकिन विरोध करते समय भारतीय संस्कारों के अनुरूप भाषा और व्यवहार में संयम बनाए रखना भी जरूरी है।

दिल्ली में हालिया Gen Z प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कुलपति ने कहा कि युवा अपनी आवाज जरूर उठाएं, लेकिन आधुनिकता की दौड़ में अपनी संस्कृति, परिवार और संस्कारों से दूर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को आधुनिक विचारों के साथ-साथ अपनी जड़ों और भारतीय ज्ञान परंपरा की जानकारी भी होनी चाहिए।

प्रो. पांडे ने कहा कि संस्कृत में विचार-विमर्श, संवाद और अपनी बात रखने की परंपरा बहुत पुरानी रही है। स्वतंत्रता संग्राम के दौर में भी संस्कृत की महत्वपूर्ण भूमिका रही और आज भी समाज में इसकी प्रासंगिकता बनी हुई है।

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा से जोड़ने का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी विरासत और सांस्कृतिक जड़ों से परिचित कराना है। युवा यह समझें कि भारत की ज्ञान परंपरा कितनी समृद्ध रही है और उनकी जड़ें कहां हैं।

कुलपति ने कहा कि आधुनिक बनने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन आधुनिकता अपनाने के दौरान परिवार, संस्कार और सांस्कृतिक मूल्यों से दूरी नहीं बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्कृत को केवल धार्मिक कर्मकांड से जोड़कर देखना उचित नहीं है। संस्कृत एक भाषा है, जिसमें भारत की विशाल ज्ञान परंपरा और अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना हुई है।

उन्होंने कहा कि संस्कृत को किसी एक धर्म तक सीमित करना भी सही नहीं है। जिस प्रकार हिंदी और अंग्रेजी संवाद की भाषाएं हैं, उसी प्रकार प्राचीन भारत में संस्कृत ज्ञान और संवाद की एक महत्वपूर्ण भाषा रही है।
Sourabh Bhushan Sharma

बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता कार्यालय का घेराव करेगा उत्तराखंड किसान मोर्चास्मार्ट मीटर जबरन लगाने पर बड़े आंदोलन की च...
31/08/2026

बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता कार्यालय का घेराव करेगा उत्तराखंड किसान मोर्चा
स्मार्ट मीटर जबरन लगाने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी, किसानों की छह मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना जारी

रुड़की।सोनी रोड। देहात क्षेत्र में बिजली से जुड़ी समस्याओं और स्मार्ट मीटर लगाए जाने के विरोध सहित विभिन्न मांगों को लेकर उत्तराखंड किसान मोर्चा मंगलवार को बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता कार्यालय का घेराव करेगा। किसान मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों के घरों में जबरन स्मार्ट मीटर लगाने का प्रयास किया गया तो संगठन बड़ा आंदोलन शुरू करेगा।

उत्तराखंड किसान मोर्चा पिछले 19 अगस्त से ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कार्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठा हुआ है। संगठन का कहना है कि किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर लगातार आंदोलन चलाया जा रहा है। इससे पहले इकबालपुर शुगर मिल पर किसानों के बकाया भुगतान को लेकर मंगलौर कोतवाली का घेराव किया गया था। इस दौरान मिल प्रबंधन के खिलाफ तहरीर भी दी गई थी।

उत्तराखंड किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुलशन रोड ने कहा कि संगठन लगातार किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहा है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर सहित संगठन की छह प्रमुख मांगों को लेकर तहसील परिसर में धरना जारी है। मांगों में इकबालपुर शुगर मिल के किसानों का बकाया भुगतान, गन्ने का मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में मूल निवास प्रमाण पत्र से संबंधित मांगें तथा बिजली से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।

संगठन ने आरोप लगाया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की समस्याएं लगातार बनी हुई हैं और किसानों की शिकायतों का उचित समाधान नहीं किया जा रहा है। किसान मोर्चा ने उत्तर प्रदेश की तर्ज पर किसानों को निशुल्क बिजली उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई है।

जिला अध्यक्ष महकार सिंह ने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों का उत्पीड़न किया जा रहा है और इकबालपुर चीनी मिल का बकाया भुगतान लंबे समय से किसानों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि मंगलवार को नए महीने की पहली तारीख पर किसान बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता कार्यालय का घेराव करेंगे। संगठन ने बिजली विभाग को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में जबरन स्मार्ट मीटर लगाने के लिए दबाव बनाया गया तो किसान सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन करेंगे।
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