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21/08/2026

चमोली, 20 अगस्त 2026 (सू.वि.)

*खुशबू ऐसी कि कारोबार महक उठा, नंदी देवी की अगरबत्ती से ₹1 लाख की उड़ान*

*पहाड़ की खुशबू को ‘तपौवन’ की पहचान दे रही नंदी देवी*

विकासखंड थराली की ग्राम पंचायत भटियाणा निवासी नंदी देवी ने नवंबर 2020 में सीमित संसाधनों के बीच अगरबत्ती एवं धूपबत्ती निर्माण का छोटा-सा काम शुरू किया। मेहनत, निरंतर प्रयास और सही मार्गदर्शन के बल पर उनका यह छोटा प्रयास आज ‘तपौवन’ (Tapowan) ब्रांड के रूप में कई बाजारों तक पहुंच चुका है और लगभग ₹1 लाख प्रतिमाह के कारोबार में बदल गया है।

नंदी देवी की यह सफलता मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के आत्मनिर्भर उत्तराखंड के संकल्प और ग्रामोत्थान परियोजना (रीप) के प्रयासों की प्रेरक तस्वीर है। ग्रामोत्थान परियोजना, जय माँ भवानी स्वयं सहायता समूह तथा आस्था महिला आजीविका स्वायत्त सहकारिता, कुलसारी से जुड़ने के बाद नंदी देवी को स्वरोजगार के लिए मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और वित्तीय सहयोग मिला। इसी सहयोग ने उन्हें अपने हुनर को व्यवस्थित व्यवसाय में बदलने का हौसला दिया।

शुरुआत आसान नहीं थी। कच्चे माल की व्यवस्था, उत्पाद तैयार करना, गुणवत्ता बनाए रखना और बाजार तलाशना उनके सामने बड़ी चुनौतियां थीं। लेकिन नंदी देवी ने चुनौतियों को अवसर में बदला। ग्राहकों की पसंद और बाजार की मांग को समझते हुए उन्होंने अपने उत्पादों की गुणवत्ता और सुगंध पर लगातार काम किया। धीरे-धीरे स्थानीय बाजार में उनके उत्पादों को पहचान मिलने लगी और ग्राहकों का भरोसा बढ़ता गया।

मांग बढ़ने के साथ नंदी देवी ने उत्पादन और बाजार का दायरा भी बढ़ाया। भटियाणा गांव से शुरू हुआ उनका ‘तपौवन’ प्राकृतिक धूप ब्रांड अब कुलसारी, थराली, देवाल, ग्वालदम, नारायणबगड़, कर्णप्रयाग, पौड़ी, देहरादून और ऋषिकेश सहित विभिन्न बाजारों तक पहुंच चुका है।

उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चा माल स्थानीय स्तर के साथ-साथ विभिन्न शहरों और राज्यों से मंगाया जाता है। प्रिंटिंग सामग्री गाजियाबाद, तेल दिल्ली तथा परफ्यूम अहमदाबाद से प्राप्त किया जाता है। अगरबत्ती एवं धूपबत्ती निर्माण में कूपम, ग्वारगम, जिगत, काऊ डंग पाउडर, वुडन धूल, चारकोल धूल, डीईपी ऑयल तथा विभिन्न प्रकार के सुगंधित तेलों का उपयोग किया जाता है।

नंदी देवी के उद्यम को विस्तार देने में ग्रामोत्थान परियोजना (रीप) का सहयोग महत्वपूर्ण रहा। परियोजना के अंतर्गत वर्ष 2024 में उन्हें ₹75 हजार की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। इसके अलावा व्यवसाय के विस्तार के लिए उन्होंने ₹1.50 लाख का ऋण भी लिया। इस वित्तीय सहयोग का उपयोग कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाने, उत्पादन क्षमता विकसित करने और कारोबार के विस्तार में किया गया।

मेहनत और सहयोग का परिणाम यह रहा कि आज नंदी देवी का उद्यम लगभग ₹1 लाख प्रतिमाह के कारोबार तक पहुंच चुका है। पहाड़ के एक छोटे से गांव से शुरू हुआ यह प्रयास अब एक व्यवस्थित ग्रामीण उद्यम का रूप ले चुका है।

नंदी देवी की सफलता की खास बात यह भी है कि उनका उद्यम केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने गांव की अन्य महिलाओं कोए भी अपने साथ जोड़ा। वर्तमान में रोशनी जोशी, रेखा देवी, नंदी देवी एवं बुदली देवी सहित अन्य महिलाएं अगरबत्ती एवं धूपबत्ती निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनके उद्यम से 4–5 ग्रामीण महिलाओं को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है।

इन महिलाओं को गांव में ही काम और आय का अवसर मिल रहा है। इससे जहां महिला उद्यमिता को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं। नंदी देवी का यह प्रयास ग्रामीण महिलाओं के लिए अपने हुनर को स्वरोजगार में बदलने की प्रेरणा बन रहा है।

नंदी देवी कहती हैं, “यदि किसी महिला को सही अवसर, उचित मार्गदर्शन और थोड़ा सा सहयोग मिले, तो वह अपने जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।” वह बताती हैं कि स्वयं सहायता समूह और ग्रामोत्थान परियोजना से मिले सहयोग ने उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ अपने उद्यम को आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास भी दिया।

उनकी सफलता में उनके पुत्र पंकज का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने बाजार से संपर्क बढ़ाने, उत्पादों की बिक्री को व्यापक बनाने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने में अपनी मां का साथ दिया। मां का हुनर और बेटे की मेहनत साथ आई तो घर से शुरू हुआ छोटा-सा कारोबार धीरे-धीरे सफल व्यवसाय में बदल गया।

नंदी देवी का लक्ष्य अब ‘Tapowan’ ब्रांड को उत्तराखंड के बाजारों से आगे देश के अन्य राज्यों तक पहुंचाना है। वह चाहती हैं कि अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाएं उनके साथ जुड़ें और अपने हुनर को व्यवसाय में बदलकर आत्मनिर्भर बनें।

भटियाणा गांव से नवंबर 2020 में शुरू हुआ नंदी देवी का सफर आज ‘Tapowan’ के रूप में कई बाजारों तक पहुंच चुका है। अगरबत्ती और धूपबत्ती की खुशबू के साथ यह उद्यम केवल एक उत्पाद की पहचान नहीं बना रहा, बल्कि पहाड़ की महिला शक्ति, आत्मविश्वास, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की खुशबू भी दूर-दूर तक पहुंचा रहा है।

*नंदी देवी के उद्यम की खास बातें—*
- उद्यम: अगरबत्ती एवं धूपबत्ती निर्माण
- ब्रांड: ‘Tapowan’
- कारोबार: लगभग ₹1 लाख प्रतिमाह
- रोजगार: 4–5 ग्रामीण महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार
- बाजार: चमोली सहित उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्र
- वित्तीय सहयोग: REAP से ₹75 हजार तथा व्यवसाय विस्तार के लिए ₹1.50 लाख ऋण
- सहयोग: ग्रामोत्थान परियोजना (REAP), स्वयं सहायता समूह एवं आजीविका स्वायत्त सहकारिता

21/08/2026

प्रेस विज्ञप्ति
*मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए)*
देहरादून | 20 अगस्त 2026

*सीएम धामी के विजन को धरातल पर उतार रहा एमडीडीए, सिटी फॉरेस्ट के बाद मियांवाला में एक और पर्यावरणीय तोहफा*

*मियांवाला स्थित जौहड़ की भूमि का 8.63 करोड़ की लागत से सौंदर्यीकरण, पुराने जलस्रोत को मिला नया जीवन*

*जल-सृष्टि पार्क में जल संरक्षण के साथ आमजन के लिए आधुनिक सुविधाएं*

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण के विजन को धरातल पर उतारते हुए मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने मियांवाला स्थित जौहड़ की भूमि का व्यापक सौंदर्यीकरण कर इसे आधुनिक एवं आकर्षक जल-सृष्टि पार्क के रूप में विकसित किया है। करीब 8.63 करोड़ रुपये की लागत से किए गए इस सौंदर्यीकरण कार्य के बाद वर्षों से उपेक्षित पड़े पुराने जलस्रोत और उसके आसपास का क्षेत्र अब आमजन के लिए प्रकृति, स्वास्थ्य, मनोरंजन और सुकून का नया ठिकाना बनकर तैयार है। सिटी फॉरेस्ट के बाद एमडीडीए की यह पहल देहरादून में हरित क्षेत्रों और प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार शहरी विकास को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने पर जोर देते रहे हैं। इसी सोच के अनुरूप मियांवाला के पंचायत घर गन्ना सेंटर के समीप स्थित जौहड़ की भूमि और पुराने तालाब क्षेत्र का कायाकल्प कर इसे आधुनिक पार्क का स्वरूप दिया गया है। परियोजना में जलस्रोत के संरक्षण के साथ आसपास के क्षेत्र का व्यवस्थित सौंदर्यीकरण किया गया है। जल संरक्षण और जलीय जीवों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के साथ नौकायन जैसी गतिविधियों के लिए भी व्यवस्थाएं की गई हैं।

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने जल-सृष्टि पार्क का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने पार्क परिसर में रुद्राक्ष का पौधा भी रोपा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में एमडीडीए ऐसी परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिनसे विकास के साथ प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित हो। मियांवाला में जौहड़ की भूमि का सौंदर्यीकरण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। पार्क में उत्तराखंड की पारंपरिक पहाड़ी शैली में मुख्य प्रवेश द्वार, योग डेक, योग से संबंधित मूर्तिकला, गजीबो, वॉकिंग ट्रैक, गार्डन बेंच, कैंटीन, स्वच्छ शौचालय और सुरक्षा रेलिंग जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। जलीय फूल, मछलियां, पक्षी और हरियाली पार्क की खूबसूरती बढ़ाते हैं। यह पार्क परिवारों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए आकर्षण का केंद्र बनने के साथ शहर में एक बेहतर सार्वजनिक स्थल के रूप में भी विकसित हुआ है। एमडीडीए की यह परियोजना मुख्यमंत्री धामी के उस विजन को मजबूती देती है, जिसमें शहरों का विकास आधुनिक सुविधाओं के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को ध्यान में रखकर करने पर जोर दिया जा रहा है। मियांवाला का जल-सृष्टि पार्क इसी सोच का उदाहरण है, जहां जौहड़ की भूमि और पुराने जलस्रोत को संरक्षित करते हुए उसे जनसुविधा, हरियाली और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा गया है।

*जीर्ण तालाब से खूबसूरत जल-सृष्टि पार्क तक*
पंचायत घर गन्ना सेंटर के समीप लंबे समय से उपेक्षित पड़े जौहड़ और तालाब क्षेत्र का कायाकल्प कर एमडीडीए ने इसे आकर्षक पार्क का स्वरूप दिया है। 8.63 करोड़ रुपये की लागत से जौहड़ की भूमि पर किए गए सौंदर्यीकरण कार्य के तहत तालाब के संरक्षण के साथ आसपास हरित क्षेत्र और जनसुविधाएं विकसित की गई हैं। नौकायन जैसी गतिविधियों के लिए व्यवस्थाएं की गई हैं, जबकि जलीय जीवों के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच प्राकृतिक जलस्रोतों का संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण है। मियांवाला की यह परियोजना इस बात का उदाहरण है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चला जा सकता है।

*पारंपरिक पहाड़ी शैली में प्रवेश द्वार, योग डेक और वॉकिंग ट्रैक*
जल-सृष्टि पार्क को आधुनिक सुविधाओं के साथ उत्तराखंड की स्थानीय संस्कृति से भी जोड़ा गया है। पार्क का मुख्य प्रवेश द्वार पारंपरिक पहाड़ी शैली में तैयार किया गया है। यहां योग डेक, योग से संबंधित मूर्तिकला, आकर्षक गजीबो, वॉकिंग ट्रैक, गार्डन बेंच, कैंटीन और स्वच्छ शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। तालाब के आसपास सुरक्षा रेलिंग लगाई गई है। हरियाली से भरपूर खुले क्षेत्र पार्क की खूबसूरती बढ़ाते हैं। ऐसे में यह पार्क बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों और परिवारों के लिए उपयोगी सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित हुआ है।

*सिटी फॉरेस्ट के बाद पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और कदम*
एमडीडीए की ओर से विकसित जल-सृष्टि पार्क को सिटी फॉरेस्ट के बाद आमजन के लिए एक और पर्यावरणीय तोहफा माना जा रहा है। सिटी फॉरेस्ट की तर्ज पर यह परियोजना भी देहरादून में हरित क्षेत्रों और प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने की सोच को आगे बढ़ाती है। जौहड़ और पुराने जलस्रोत के पुनर्जीवन से जहां क्षेत्र की सुंदरता बढ़ी है, वहीं जल संरक्षण और स्थानीय पारिस्थितिकी को भी मजबूती मिलेगी। नौकायन जैसी गतिविधियों के जरिए लोगों को जलस्रोतों से जोड़ने और प्रकृति के प्रति जागरूक करने का प्रयास भी किया गया है।

*विकास में हरियाली और जल संरक्षण को प्राथमिकता*
एमडीडीए का जोर अब ऐसी परियोजनाओं पर है, जिनमें विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन भी कायम रहे। पुराने तालाब, जौहड़, जलस्रोत और हरित क्षेत्रों को संरक्षित कर उन्हें जनोपयोगी स्वरूप देने से शहर को बेहतर सार्वजनिक स्थल मिलने के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी संभव होगा। मियांवाला का जल-सृष्टि पार्क इसी सोच का परिणाम है। यह सिर्फ एक पार्क नहीं, बल्कि 8.63 करोड़ रुपये की लागत से जौहड़ की भूमि के सौंदर्यीकरण, पुराने जलस्रोत को बचाने, प्रकृति को संवारने और आमजन को बेहतर सुविधाएं देने की एकीकृत पहल है।

*बंशीधर तिवारी : पुराने जलस्रोतों को बचाना हमारी प्राथमिकता*
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून के विकास में पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मियांवाला का पुराना तालाब और जौहड़ क्षेत्र लंबे समय से उपेक्षित था, जिसे 8.63 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं के साथ जल-सृष्टि पार्क के रूप में विकसित किया गया है। हमारा उद्देश्य केवल सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि जलस्रोत का संरक्षण, जलीय जीवों के लिए अनुकूल वातावरण और आमजन को बेहतर सार्वजनिक स्थान उपलब्ध कराना है। सिटी फॉरेस्ट के बाद यह एमडीडीए की एक और महत्वपूर्ण पर्यावरणीय पहल है। आने वाले समय में भी ऐसे प्राकृतिक जलस्रोतों और हरित क्षेत्रों को संरक्षित करने का प्रयास जारी रहेगा।

*मोहन सिंह बर्निया : विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण जरूरी*
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि मियांवाला जल-सृष्टि पार्क विकास और पर्यावरण संरक्षण का बेहतर उदाहरण है। जौहड़ की भूमि और पुराने तालाब क्षेत्र को संरक्षित कर उसका 8.63 करोड़ रुपये की लागत से सौंदर्यीकरण किया गया है और इसे जनसुविधाओं से जोड़ा गया है। पार्क में हरियाली, योग, वॉकिंग और नौकायन जैसी सुविधाएं लोगों को प्रकृति से जोड़ेंगी। एमडीडीए भविष्य में भी शहर के प्राकृतिक संसाधनों और हरित क्षेत्रों के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए जनहित से जुड़ी ऐसी परियोजनाओं को आगे बढ़ाएगा।

प्रेस विज्ञप्ति*मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए)*देहरादून | 20 अगस्त 2026*सीएम धामी के विजन को धरातल पर उतार रहा...
21/08/2026

प्रेस विज्ञप्ति
*मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए)*
देहरादून | 20 अगस्त 2026

*सीएम धामी के विजन को धरातल पर उतार रहा एमडीडीए, सिटी फॉरेस्ट के बाद मियांवाला में एक और पर्यावरणीय तोहफा*

*मियांवाला स्थित जौहड़ की भूमि का 8.63 करोड़ की लागत से सौंदर्यीकरण, पुराने जलस्रोत को मिला नया जीवन*

*जल-सृष्टि पार्क में जल संरक्षण के साथ आमजन के लिए आधुनिक सुविधाएं*

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण के विजन को धरातल पर उतारते हुए मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने मियांवाला स्थित जौहड़ की भूमि का व्यापक सौंदर्यीकरण कर इसे आधुनिक एवं आकर्षक जल-सृष्टि पार्क के रूप में विकसित किया है। करीब 8.63 करोड़ रुपये की लागत से किए गए इस सौंदर्यीकरण कार्य के बाद वर्षों से उपेक्षित पड़े पुराने जलस्रोत और उसके आसपास का क्षेत्र अब आमजन के लिए प्रकृति, स्वास्थ्य, मनोरंजन और सुकून का नया ठिकाना बनकर तैयार है। सिटी फॉरेस्ट के बाद एमडीडीए की यह पहल देहरादून में हरित क्षेत्रों और प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार शहरी विकास को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने पर जोर देते रहे हैं। इसी सोच के अनुरूप मियांवाला के पंचायत घर गन्ना सेंटर के समीप स्थित जौहड़ की भूमि और पुराने तालाब क्षेत्र का कायाकल्प कर इसे आधुनिक पार्क का स्वरूप दिया गया है। परियोजना में जलस्रोत के संरक्षण के साथ आसपास के क्षेत्र का व्यवस्थित सौंदर्यीकरण किया गया है। जल संरक्षण और जलीय जीवों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के साथ नौकायन जैसी गतिविधियों के लिए भी व्यवस्थाएं की गई हैं।

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने जल-सृष्टि पार्क का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने पार्क परिसर में रुद्राक्ष का पौधा भी रोपा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में एमडीडीए ऐसी परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिनसे विकास के साथ प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित हो। मियांवाला में जौहड़ की भूमि का सौंदर्यीकरण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। पार्क में उत्तराखंड की पारंपरिक पहाड़ी शैली में मुख्य प्रवेश द्वार, योग डेक, योग से संबंधित मूर्तिकला, गजीबो, वॉकिंग ट्रैक, गार्डन बेंच, कैंटीन, स्वच्छ शौचालय और सुरक्षा रेलिंग जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। जलीय फूल, मछलियां, पक्षी और हरियाली पार्क की खूबसूरती बढ़ाते हैं। यह पार्क परिवारों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए आकर्षण का केंद्र बनने के साथ शहर में एक बेहतर सार्वजनिक स्थल के रूप में भी विकसित हुआ है। एमडीडीए की यह परियोजना मुख्यमंत्री धामी के उस विजन को मजबूती देती है, जिसमें शहरों का विकास आधुनिक सुविधाओं के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को ध्यान में रखकर करने पर जोर दिया जा रहा है। मियांवाला का जल-सृष्टि पार्क इसी सोच का उदाहरण है, जहां जौहड़ की भूमि और पुराने जलस्रोत को संरक्षित करते हुए उसे जनसुविधा, हरियाली और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा गया है।

*जीर्ण तालाब से खूबसूरत जल-सृष्टि पार्क तक*
पंचायत घर गन्ना सेंटर के समीप लंबे समय से उपेक्षित पड़े जौहड़ और तालाब क्षेत्र का कायाकल्प कर एमडीडीए ने इसे आकर्षक पार्क का स्वरूप दिया है। 8.63 करोड़ रुपये की लागत से जौहड़ की भूमि पर किए गए सौंदर्यीकरण कार्य के तहत तालाब के संरक्षण के साथ आसपास हरित क्षेत्र और जनसुविधाएं विकसित की गई हैं। नौकायन जैसी गतिविधियों के लिए व्यवस्थाएं की गई हैं, जबकि जलीय जीवों के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच प्राकृतिक जलस्रोतों का संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण है। मियांवाला की यह परियोजना इस बात का उदाहरण है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चला जा सकता है।

*पारंपरिक पहाड़ी शैली में प्रवेश द्वार, योग डेक और वॉकिंग ट्रैक*
जल-सृष्टि पार्क को आधुनिक सुविधाओं के साथ उत्तराखंड की स्थानीय संस्कृति से भी जोड़ा गया है। पार्क का मुख्य प्रवेश द्वार पारंपरिक पहाड़ी शैली में तैयार किया गया है। यहां योग डेक, योग से संबंधित मूर्तिकला, आकर्षक गजीबो, वॉकिंग ट्रैक, गार्डन बेंच, कैंटीन और स्वच्छ शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। तालाब के आसपास सुरक्षा रेलिंग लगाई गई है। हरियाली से भरपूर खुले क्षेत्र पार्क की खूबसूरती बढ़ाते हैं। ऐसे में यह पार्क बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों और परिवारों के लिए उपयोगी सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित हुआ है।

*सिटी फॉरेस्ट के बाद पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और कदम*
एमडीडीए की ओर से विकसित जल-सृष्टि पार्क को सिटी फॉरेस्ट के बाद आमजन के लिए एक और पर्यावरणीय तोहफा माना जा रहा है। सिटी फॉरेस्ट की तर्ज पर यह परियोजना भी देहरादून में हरित क्षेत्रों और प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने की सोच को आगे बढ़ाती है। जौहड़ और पुराने जलस्रोत के पुनर्जीवन से जहां क्षेत्र की सुंदरता बढ़ी है, वहीं जल संरक्षण और स्थानीय पारिस्थितिकी को भी मजबूती मिलेगी। नौकायन जैसी गतिविधियों के जरिए लोगों को जलस्रोतों से जोड़ने और प्रकृति के प्रति जागरूक करने का प्रयास भी किया गया है।

*विकास में हरियाली और जल संरक्षण को प्राथमिकता*
एमडीडीए का जोर अब ऐसी परियोजनाओं पर है, जिनमें विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन भी कायम रहे। पुराने तालाब, जौहड़, जलस्रोत और हरित क्षेत्रों को संरक्षित कर उन्हें जनोपयोगी स्वरूप देने से शहर को बेहतर सार्वजनिक स्थल मिलने के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी संभव होगा। मियांवाला का जल-सृष्टि पार्क इसी सोच का परिणाम है। यह सिर्फ एक पार्क नहीं, बल्कि 8.63 करोड़ रुपये की लागत से जौहड़ की भूमि के सौंदर्यीकरण, पुराने जलस्रोत को बचाने, प्रकृति को संवारने और आमजन को बेहतर सुविधाएं देने की एकीकृत पहल है।

*बंशीधर तिवारी : पुराने जलस्रोतों को बचाना हमारी प्राथमिकता*
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून के विकास में पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मियांवाला का पुराना तालाब और जौहड़ क्षेत्र लंबे समय से उपेक्षित था, जिसे 8.63 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं के साथ जल-सृष्टि पार्क के रूप में विकसित किया गया है। हमारा उद्देश्य केवल सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि जलस्रोत का संरक्षण, जलीय जीवों के लिए अनुकूल वातावरण और आमजन को बेहतर सार्वजनिक स्थान उपलब्ध कराना है। सिटी फॉरेस्ट के बाद यह एमडीडीए की एक और महत्वपूर्ण पर्यावरणीय पहल है। आने वाले समय में भी ऐसे प्राकृतिक जलस्रोतों और हरित क्षेत्रों को संरक्षित करने का प्रयास जारी रहेगा।

*मोहन सिंह बर्निया : विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण जरूरी*
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि मियांवाला जल-सृष्टि पार्क विकास और पर्यावरण संरक्षण का बेहतर उदाहरण है। जौहड़ की भूमि और पुराने तालाब क्षेत्र को संरक्षित कर उसका 8.63 करोड़ रुपये की लागत से सौंदर्यीकरण किया गया है और इसे जनसुविधाओं से जोड़ा गया है। पार्क में हरियाली, योग, वॉकिंग और नौकायन जैसी सुविधाएं लोगों को प्रकृति से जोड़ेंगी। एमडीडीए भविष्य में भी शहर के प्राकृतिक संसाधनों और हरित क्षेत्रों के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए जनहित से जुड़ी ऐसी परियोजनाओं को आगे बढ़ाएगा।

21/08/2026

प्रेस नोट
टिहरी गढ़वाल, 19 अगस्त 2026 (सू.वि.)

*टिहरी झील, जिला टिहरी में उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद द्वारा 15 दिवसीय जल क्रीड़ा प्रशिक्षण सम्पन्न*

*राष्ट्रीय जल क्रीड़ा संस्थान गोवा के सहयोग से 20 प्रशिक्षुओं को मिला प्रमाणित प्रशिक्षण*

उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद द्वारा साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने एवं युवाओं को रोजगार व स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य में 15 दिवसीय जल क्रीड़ा प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण *राष्ट्रीय जल क्रीड़ा संस्थान, गोवा* के सहयोग से 05 अगस्त 2026 से 19 अगस्त 2026 तक टिहरी झील, जिला टिहरी गढ़वाल में आयोजित किया गया।

प्रशिक्षण के समापन समारोह का आयोजन 19 अगस्त 2026 को टिहरी झील परिसर में किया गया। समारोह में राष्ट्रीय जल क्रीड़ा संस्थान, गोवा से प्रतिनियुक्त प्रशिक्षक प्रवीण सिंह रावत व विराज शिंदे उपस्थित रहे। इसके साथ ही परिषद के जल क्रीड़ा विशेषज्ञ भूपेन्द्र सिंह तथा ऑफिसर कमांडिंग विपिन मिश्रा, डिप्टी कमांडेंट आशुतोष बिष्ट, पर्यटन विभाग से प्रतिनिधि मनोज बिजल्वाण एवं दरमियान नेगी द्वारा प्रतिभाग कर प्रशिक्षुत्तियों का मनोबल बढाया ।

*प्रशिक्षण का विवरण:*
इस 15 दिवसीय पाठ्यक्रम में उत्तराखण्ड के समस्त जनपदों से चयनित कुल *20 प्रशिक्षुओं* ने प्रतिभाग किया। प्रशिक्षण को तीन चरणों में संचालित किया गया:
1. *प्रथम 05 दिवस* - जीवन रक्षक तकनीक / लाइफ सेविंग तकनीक
2. *द्वितीय 05 दिवस* - पावर बोट हैंडलिंग एवं टिलर
3. *तृतीय 05 दिवस* - वाटर स्कीइंग

परिषद की यह पहल राज्य में जल क्रीड़ा पर्यटन को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले प्रशिक्षुओं को राष्ट्रीय जल क्रीड़ा संस्थान, गोवा द्वारा प्रमाणित लाइसेंस प्रदान किया जाएगा। यह लाइसेंस भारत के साथ-साथ सम्पूर्ण मध्य-पूर्व क्षेत्र में मान्य है।

उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद का उद्देश्य इस प्रकार के प्रशिक्षणों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाकर राज्य में साहसिक पर्यटन को विश्व स्तरीय पहचान दिलाना है।

जिला सूचना अधिकारी
टिहरी गढ़वाल

Address

Roorkee
247667

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