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कभी-कभी एक डॉक्टर सिर्फ इलाज नहीं करता, बल्कि इंसानियत, संवेदनशीलता और सेवा भाव की वो मिसाल पेश करता है, जिसे शब्दों में...
11/03/2026

कभी-कभी एक डॉक्टर सिर्फ इलाज नहीं करता, बल्कि इंसानियत, संवेदनशीलता और सेवा भाव की वो मिसाल पेश करता है, जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल हो जाता है। ऐसा ही एक प्रेरणादायक और भावनात्मक किस्सा सामने आया है, जिसमें एक डॉक्टर ने गर्भवती महिला को खाट पर उठाकर 10 किलोमीटर तक पैदल चलकर अस्पताल पहुँचाया, ताकि जच्चा और बच्चा दोनों की जान बचाई जा सके।

असल में इस गांव तक पहुंचने के लिए कच्चा रास्ता, जंगल, नदी, पहाड़ रास्ते में पड़ते हैं. डॉक्टर ने इन सबकी परवाह किए बिना रात में इस गांव में पहुंचकर गर्भवती महिला की डिलीवरी में मदद की. लेकिन डिलीवरी के बाद महिला की हालत खराब होने लगी, जिसके बाद उन्होंने महिला को तुरंत अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया।

डॉक्टर ओमकार ने हार ना मानते हुए अपने मरीज के दर्द को समझा और परिजन के साथ उस खाट को उठाकर 10 किलोमीटर पैदल चले, जिसमें महिला लेटी हुई थी. वह जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचने के लिए कोशिश कर रहे थे ताकि महिला के साथ-साथ उसके बच्चे को भी उचित देखभाल मिल सके।

करीब 2 घंटे की कठिन यात्रा के बाद डॉक्टर महिला को अस्पताल पहुंचाने में सफल रहे महिला की जान बचाने के लिए डॉक्टर ओमकार ने जिस तरह कोशिश की, वो उनके प्रोफेशन का मान बढ़ाता है. अपने काम के प्रति उन्होंने दुनिया को ये दिखा दिया कि आप जिस भी पेशे में काम कर रहे हैं उसकी पूरी इज्जत करें।

इस डॉक्टर ने सिर्फ एक जा'न नहीं बचाई, बल्कि इंसानियत की सबसे खूबसूरत मिसाल पेश की। 10 किलोमीटर पैदल चलकर गर्भवती महिला की मदद करना किसी देवता से कम नहीं। 💐💐

CRPF के वीर कमांडेंट चेतन चीता वह नाम हैं, जिनकी कहानी, हिम्मत और निष्ठा देशभक्ति की मिसाल बन चुकी है। आतंकियों से लड़ते...
27/02/2026

CRPF के वीर कमांडेंट चेतन चीता वह नाम हैं, जिनकी कहानी, हिम्मत और निष्ठा देशभक्ति की मिसाल बन चुकी है। आतंकियों से लड़ते वक्त 9 गोलियां लगने के बावजूद भी वो उनसे लड़ते रहे। चेतन चीता ने ना सिर्फ मोर्चा संभाले रखा, बल्कि अपनी टीम की जान बचाते हुए ऑपरेशन को सफल भी बनाया।

आतंकियों के साथ इस मुठभेड़ में उनको 9 गोलियाँ लगी और उन्होंने अपनी एक आँख भी गवाई। और पूरे दो महीने तक कोमा में रहे उनकी इस बहादुरी के लिए उनको कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया।

CRPF कमांडेंट चेतन चीता की पत्नी उमा बताती हैं जब डॉक्टर उनका इलाज कर रहे थे, तब में इस अटूट विश्वास के साथ उनके बगल में खड़ी थीं कि वह ठीक हो जाएंगे।

दो बच्चों की मां उमा ने कहा, "उसकी आंखें बंद थीं, वह पूरी तरह से बेहोश था, लेकिन जैसे ही मैंने उसे सांस लेते देखा, मुझे पता चल गया कि वह बच जाएगा।"

चीता को अस्पताल में भर्ती होने के 24 घंटे के भीतर ही ऑपरेशन किया गया, जिसमें डॉक्टरों ने खो’पड़ी के उस हिस्से को हटा दिया जो गोली से क्षतिग्रस्त हो गया था। चीता 2 महीने तक कोमा में रहा और उसने एक महीना आईसीयू में बिताया।

चेतन चीता की पत्नी ने कहा, “डॉक्टर कहते थे कि वह कोमा में हैं, लेकिन जब भी मैं उनसे मिलती और उनके हाथ पकड़ती, तो वह अपनी उंगलियां हिलाकर प्रतिक्रिया देते थे। इससे मेरा यह विश्वास और मजबूत हो गया कि वह मेरे पास वापस लौटेंगे।”

डॉक्टरों ने चीता के ठीक होने को किसी चमत्कार से कम नहीं बताया है। दिल्ली के एम्स ट्रॉमा सेंटर से डिस्चार्ज होने के बाद चीता का घर पर गर्मजोशी से स्वागत किया गया।

कड़ाके की ठंड में भारी बर्फबारी के बीच CRPF के जवान की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है जिसमे जवान कड़ाक...
21/01/2026

कड़ाके की ठंड में भारी बर्फबारी के बीच CRPF के जवान की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है जिसमे जवान कड़ाके की ठंड में रात को भारी बर्फबारी के बीच ड्यूटी करता हुआ नज़र आ रहा है। जी हाँ इस ठंड में हम सब अपने घरों में कंबल में बैठे हुए हैं लेकिन कोई हैं जो सीमाओं पर दिन रात देश और आपकी सुरक्षा के लिए वहाँ तैनात है।

आपको बता दे कश्मीर में इन दिनों बर्फबारी हो रही है। इसी मौसम से एक तस्वीर आई है, जिसने लोगों का दिल जीत लिया है। यह फोटो किसी नजारे की नहीं, बल्कि सीआरपीएफ के एक जवान की है, जो बर्फबारी के बीच अपनी ड्यूटी निभाता नजर आ रहा है। फोटो शेयर करते हुए बताया गया कि जवान का नाम एजाज है, जो भारी बर्फबारी के बावजूद अपनी ड्यूटी पर तैनात है।

CRPF जवान की यह तस्वीर Kashyap Kadagattur ने शेयर की है। उन्होंने फोटो के कैप्शन में लिखा, यह कोई बैटमैन नहीं है। यह एजाज हैं CRPF के कांस्टेबल जो इस कड़ाके की ठंड में भारी बर्फबारी के बावजूद जम्मू-कश्मीर में अपनी ड्यूटी पर तैनात हैं। हमारे जवान देश की सुरक्षा में 24/7 काम करते हैं।

उत्तर प्रदेश के उन्नाव के हसनगंज से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। हसनगंज के तहसील क्षेत्र के बीचपरी गांव में एक...
16/01/2026

उत्तर प्रदेश के उन्नाव के हसनगंज से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। हसनगंज के तहसील क्षेत्र के बीचपरी गांव में एक पीपल के पेड़ के नीचे कुछ लोगों ने खुदाई की जहां से खाटू श्याम की एक मूर्ति निकली है। अब जैसे ही यह खबर लोगों के बीच फैला, खाटू श्याम की मूर्ति देखने के लिए वहां लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। आपको यह भी बता दें कि वहां एक मूर्ति है, यह एक युवक को उसके सपने से पता चला।
आपको बता दे युवक को लगातार आ रहे सपनों के बाद जब पीपल के पेड़ के नीचे खुदाई की गई, तो वहां से अष्टधातु की खाटू श्याम की मूर्ति निकली जिसके बाद वहां ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रही है जिसमे एक माँ अपने शहीद बेटे की प्रतिमा पर कंबल ओढ़ती हुई नज़र आ रही है।...
13/01/2026

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रही है जिसमे एक माँ अपने शहीद बेटे की प्रतिमा पर कंबल ओढ़ती हुई नज़र आ रही है।

जिसमे वो कहती है की मां तो फिर मां होती है...भला इस कड़ाके की सर्दी में अपने लाडले को ठंड कैसे लगने देती। यह बूढ़ी मां कैसे रजाई ओढ़कर घर में सो सकती थी। वह घर से निकली और आरएसपुरा के रठाना मोड़ (गुरनाम सिंह चौक) में अपने बलिदानी बेटे की प्रतिमा के पास पहुंची। आंखों से आंसू बहते रहे और हाथों में कंबल था।

मां ने प्रतिमा को लाड-दुलार कर कंबल ओढ़ाया। और बोलीं....इस समय इतनी सर्दी में सभी लोग अपने-अपने घरों में हीटर लगाकर बैठे हैं, ऐसे में मेरा बेटा कैसे ठंड में खड़ा रहेगा? मां हूं, दिल कैसे मान जाए। यह दृश्य केवल एक स्मृति नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि बलिदानी कभी मरते नहीं। मां की ममता आज भी बेटे के साथ खड़ी है और गुरनाम सिंह का बलिदान देश की सीमाओं पर एक मजबूत पहरेदार की तरह अमर है।

वीडियो में दिख रही प्रतिमा जम्मू के रणबीर सिंह पुरा के शहीद BSF कांस्टेबल गुरनाम सिंह का है। उनकी मां जसवंत कौर ने अपने बेटे की प्रतिमा को ठंड से बचाने के लिए यह कंबल ओढ़ाया है। मां अपने बेटे की मूर्ति को जीवित बच्चे की तरह मानती हैं। बता दें कि BSF की 173वीं बटालियन के कांस्टेबल गुरनाम सिंह साल 2016 में आतंकवादी घुसपैठ की कोशिश को नाकाम करते हुए देश के लिए शहीद हो गए थे।

आपको बता दे 21 अक्टूबर 2016 को हीरानगर सेक्टर में घुसपैठ करते आतंकियों के लिए गुरनाम काल बन गए। एक आतंकी को ढेर किया और सीजफायर का मुंहतोड़ जवाब दिया। वह बॉर्डर पार से हुई फायरिंग में घायल हुए थे। बाद में इलाज के दौरान अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी।

कैप्टन सौरभ कालिया कारगिल युद्ध में शहीद होने वाले पहले भारतीय सेना अधिकारी बने। उन्हें पांच अन्य सैनिकों के साथ पाकिस्त...
11/01/2026

कैप्टन सौरभ कालिया कारगिल युद्ध में शहीद होने वाले पहले भारतीय सेना अधिकारी बने। उन्हें पांच अन्य सैनिकों के साथ पाकिस्तानी सेना ने पकड़ लिया था और 22 दिनों तक क्रूर यातनाएं दी गईं, जिसके बाद उनकी मृत्यु हो गई।

अगस्त 1997 में सौरभ कालिया चयन भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून में हुआ और 12 दिसंबर 1998 को वे लेफ्टिनेंट के पद पर कमीशन प्राप्त कर 4 जाट रेजिमेंट में शामिल हुए। जनवरी 1999 में उनकी पहली तैनाती कारगिल सेक्टर में हुई - जहां कुछ ही महीनों बाद उन्होंने मातृभूमि के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

15 मई 1999 को कैप्टन कालिया और पांच सैनिक नियमित गश्त पर थे, तभी पाकिस्तानी सेना ने उन पर घात लगाकर हमला किया और उन्हें जिंदा पकड़ लिया। उन्हें 22 दिनों तक बंदी बनाकर रखा गया और यातनाएं देकर मार डाला गया। उनके शव पाकिस्तानी सेना द्वारा 9 जून 1999 को लौटाए गए।

कैप्टन सौरभ के पिता ने बताया कि उनके कानों में गर्म लोहे की छड़ें घुसाई गईं, आंखें निकाल ली गईं, नाक, कान और निजी अंग का’ट डाले गए । शरीर को तड़पा-तड़पा कर ज’ला दिया गया, लेकिन उन्होंने दुश्मन को एक शब्द तक नहीं बताया। उनका अद्वितीय साहस और मानसिक दृढ़ता, दुश्मन के हर अत्याचार से भी नहीं टूटा।

भारतीय सेना ने जम्मू और कश्मीर के डोडा ज़िले में गाँव वालों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया है। सेना ने इन...
08/01/2026

भारतीय सेना ने जम्मू और कश्मीर के डोडा ज़िले में गाँव वालों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया है। सेना ने इनका नाम गांव रक्षा गार्ड्स रखा है। इस प्रोग्राम में हथियार चलाने, आत्मरक्षा और बेसिक लड़ाई के हुनर ​​पर ध्यान दिया जा रहा है। VDG को अपने गाँवों की निगरानी और सुरक्षा की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। इससे स्थानीय सुरक्षा मज़बूत होगी।

इस प्रशिक्षण के लिए डोडा शहर से लगभग 90 किलोमीटर दूर स्थित उन गांवों के निवासियों को चुना गया जो 1990 के दशक के मध्य में चिनाब घाटी क्षेत्र में उग्रवाद के चरम के दौरान सबसे बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों में से थे, जिसमें वर्तमान किश्तवार, डोडा और रामबन जिले शामिल हैं।

आपको ये भी बता दे इससे पहले जम्मू-कश्मीर के हिंदू इलाकों में 1990 के समय में गांववालों को हथियार दिए गए थे. अब एक बार फिर यहां गांववालों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देने के साथ बंदूक थमाई जा रही है. उन्हें बंकर बनाने की भी ट्रेनिंग दी गई है।

1990 के दशक में आतंकी घटनाएं बढ़ने से कश्मीर से बढ़ी संख्या में पंडितों का पलायन हुआ था. तब एक खतरा पैदा हो गया था कि चिनाब वैली (जम्मू संभाग) में रहने वाले अल्पसंख्यक हिंदू लोग भी कहीं चिनाब, डोडा आदि जगहों से पलायन न करने लगें. वहां भी मुस्लिम आबादी ज्यादा रहती है. ऐसे में एक अफसर ने रणनीति के तहत गांववालों को प्रशिक्षण देकर हथियार देने शुरू कर दिए. इससे गांववालों में न सिर्फ सुरक्षा का भरोसा जगा बल्कि हथियार से ताकत भी मिली. अब एक बार फिर कश्मीर में सेना गांववालों को हथियार दे रही है।

ये हैं पूरी दुनियाँ में मेटल किंग के नाम से मशहूर वेदांता ग्रुप ' के मालिक अनिल अग्रवाल जिन्होंने अपने जीवन की सारी कमाई...
07/01/2026

ये हैं पूरी दुनियाँ में मेटल किंग के नाम से मशहूर वेदांता ग्रुप ' के मालिक अनिल अग्रवाल जिन्होंने अपने जीवन की सारी कमाई का 75 प्रतिशत शैक्षणिक कार्यों के लिए दान करने का एलान किया है। लन्दन में बसे अनिल अग्रवाल का ये दान भारतीय करेंसी के अनुसार 21000 करोड़ रूपए है। यह अब तक किसी भी भारतीय के द्वारा दान की जाने वाली सबसे बड़ी रकम है।

बिहार के पटना में 24 जनवरी 1954 को जन्मे और स्थानीय 'सर जी डी पाटलिपुत्रा हाई स्कूल' के छात्र रहे श्री अनिल अग्रवाल ने लन्दन में अपने परिवार की सहमति के बाद एलान किया कि वे यह रकम भारत में नि:शुल्क शिक्षा के बड़े प्रोजेक्टों में दान देना चाहते हैं और यहाँ ऑक्सफ़ोर्ड से भी बड़ी यूनिवर्सिटीज बनाना चाहते हैं जो 'नो प्रॉफिट नो लॉस' के आधार पर चलेंगी
इस स्वार्थी भौतिकवादी आधुनिक युग के भामाशाह अनिल अग्रवाल जी को सादर नमन

ये हैं परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र सिंह यादव जिन्होंने महज़ 19 साल की उम्र में 15 गोलियाँ खाने के बावजूद दुश्मनों को हरा...
29/12/2025

ये हैं परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र सिंह यादव जिन्होंने महज़ 19 साल की उम्र में 15 गोलियाँ खाने के बावजूद दुश्मनों को हराकर तिरंगा लहराया था। योगेंद्र सिंह यादव की शादी की मेहंदी फीकी भी नहीं पड़ी थी कि शादी के 15 दिन बाद कारगिल से बुलावा आ गया।

10 मई, 1980 को जन्मे योगेंद्र यादव महज 16 साल और 5 महीने की छोटी उम्र में सेना की 18 ग्रेनेडियर में भर्ती हो गए थे। कारगिल में दुश्मनों के हमले के बाद शुरू हुए ऑपरेशन विजय के दौरान योगेंद्र 18वीं ग्रेनेडियर्स की घातक प्लाटून के सदस्य थे। इस प्लाटून को जम्मू कश्मीर के द्रास सेक्टर में टाइगर हिल टॉप कब्जाने का जिम्मा मिला था।

3 जुलाई, 1999 को जब दुश्मन ऊपर बैठा भारी गोलाबारी कर रहा था। उस समय बर्फीली चट्टानों में गोलिबारी के बीच दुश्मनों का सामना करना बेहद मुश्किल काम था। युद्ध क्षेत्र की हर स्थिति भारतीय सेना के विपरीत थी। इसके बावजूद भी भारत के वीर जवान हर मुश्किल को पार कर आगे बढ़ते गए। इस ऑपरेशन में योगेंद्र यादव को कुल 15 गोलियां लगीं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कई पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया। टाइगर हिल फतह करने पर योगेंद्र यादव को महज 19 साल की छोटी उम्र में परमवीर चक्र से सम्मानित किया था।
ये कहानी भले ही किसी बॉलीवुड फिल्म की स्क्रिप्ट की तरह लगे, लेकिन ये परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र सिंह यादव ही थे, जिन्होंने अपने अदम्य साहस के दम पर अकेले टाइगर हिल पर भारतीय सेना को कब्जा दिला दिया था. उस समय उनकी उम्र महज 19 साल की थी।🇮🇳

ये है नीतू पंडित जो अभी महज 22 साल की है और उनके जज्बे की बात करें तो पहले वो बस चलाती थी और आज फोरलेन पर 16 टायर वाला 3...
19/12/2025

ये है नीतू पंडित जो अभी महज 22 साल की है और उनके जज्बे की बात करें तो पहले वो बस चलाती थी और आज फोरलेन पर 16 टायर वाला 35 टन भार क्षमता का कमर्शियल ट्रक चला रही है।

नीतू हिमाचल प्रदेश के सरकाघाट के समसौह गांव की रहने वाली है और इतनी सी उम्र मे 16 टायर वाला कमर्शियल ट्रक चला रही है।
आपका बता दे 22 साल की नीतू पंडित को हैवी कमर्शियल लाइसेंस भी मिल चुका है। हम नीतू पंडित के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते है।💐💐

ये हैं बॉलीवुड सिंगर पलक मुच्छल जो अब तक 3800 से भी ज़्यादा बच्चों के दिल का मुफ्त में ऑपरेशन करवा चुकी है। पलक मुच्छल अ...
18/12/2025

ये हैं बॉलीवुड सिंगर पलक मुच्छल जो अब तक 3800 से भी ज़्यादा बच्चों के दिल का मुफ्त में ऑपरेशन करवा चुकी है। पलक मुच्छल अपनी आवाज से लाखों करोड़ों लोगों के दिलों में जगह बना चुकी हैं. लेकिन उन्होंने सिंगिग के साथ-साथ एक ऐसा काम किया है, जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे, और आपकी नजर में पलक मुच्छल की इज्जत हजार गुणा ज्यादा बढ़ जाएगी।

पलक मुच्छल हिंदुस्तान की एक मात्र ऐसी महिला सिंगर है, जिन्होंने गाना गाने के साथ-साथ 3800 से ज़्यादा बच्चों को दुबारा जिंदगी देने का काम भी कर चुकी हैं। और अब पलक का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया है।पलक कई मासूमों को नई ज़िंदगी देने का भी काम करती हैं. दरअसल, गायिका होने के साथ-साथ पलक मुच्छल सामाजिक कार्यों से भी जुड़ी हुई हैं और अब तक वह 3800 बच्चों के दिल के ऑपरेशन करवा चुकी हैं
पलक मुच्छल हिंदुस्तान की एक मात्र ऐसी महिला सिंगर है, जिन्होंने गाना गाने के साथ-साथ 3800 से ज़्यादा बच्चों को दुबारा जिंदगी देने का काम भी करती है। और अब पलक का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया है।

पहाड़ों में अपने गांव के पुस्तैनी घर के बरामदे में उत्तराखंड के सबसे लोकप्रिय IAS दीपक रावत कहते हैं आप कितने भी बड़े अभ...
18/12/2025

पहाड़ों में अपने गांव के पुस्तैनी घर के बरामदे में उत्तराखंड के सबसे लोकप्रिय IAS दीपक रावत कहते हैं आप कितने भी बड़े अभिनेता, अधिकारी क्यों न बन जाओ अपनी जड़ों से हमेशा जुड़े रहना चाहिए। 💐💐

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