21/11/2021
बच्चों की प्रत्येक बीमारियों का सफल ईलाज नोबेल हॉस्पिटल में है उपलब्ध : डॉ हरीश भारद्वाज
पीजीआई रोहतक से मना किए गए प्रतिदिन के 5-7 केसों को ठीक करने का रिकॉर्ड नॉबल हॉस्पिटल के नाम : डॉ. भारद्वाज
विशेष बातचीत में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हरीश भारद्वाज ने सांझा की केसों को लेकर जानकारी
एंकर-- रोहतक स्थित नोबल हार्ट सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल में डॉ हरीश भारद्वाज एमडी, पीडियाट्रिक्स, बाल रोग विशेषज्ञ ऐसे माहिर डॉक्टर साबित हो रहे हैं जो कि हर प्रकार के केस, बच्चों के रोगों और अन्य मामलों के चलते इलाज करने में पूरे माहिर साबित हुए हैं। हाल ही में उन्होंने एक एक्सीडेंट केस में घायल हुए मात्र 6 महीने की बच्ची का पूर्ण तरीके से इलाज किया है। हमारे साथ विशेष बातचीत में रोहतक पीजीआई के पूर्व रजिस्ट्रार एवं नोबल हार्ट एवं सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल रोहतक के बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर हरीश भारद्वाज ने बताया कि नोबल हॉस्पिटल आज दिल्ली, रोहतक, आसपास के क्षेत्र सहित प्रदेश का एकमात्र ऐसा हॉस्पिटल बना गया है जोकि बच्चों के मामले में जो केस कहीं से भी मना किए गए हों, उनको एक्सेप्ट करता है और उन बच्चो का सफल ईलाज करता है। उन्होंने कहा कि बच्चे का किसी भी रोग से संबंधित मामला हो उसको एक बार नोबेल हर्ट हॉस्पिटल में जरूर लेकर आएं। एक्सीडेंट केस में 6 महीने की घायल बच्ची दीप्ति के केस को लेकर जानकारी देते हुए डॉ हरीश भारद्वाज ने बताया कि इस बच्ची के दिमाग में काफी ब्लीडिंग और सूजन हो रही थी। बच्ची के कैथल के गांव टीक निवासी परिजन पवन प्रजापति, विनोद प्रजापति, भिवानी निवासी रोशनी देवी, अशोक धुरान ने 10 नवम्बर को शाम को बच्ची को हॉस्पिटल में एडमिट करवाया था। बच्ची ऐसी स्थिति में थी कि उसको देखकर कुछ भी नहीं कहा जा सकता था परंतु परमात्मा के आशीर्वाद से आज वह बच्ची पहले से काफी स्वस्थ है और छुट्टी लेकर घर पहुंच गई। इसके अलावा दिमागी बुखार से पीड़ित बच्चे, कई ऐसे बच्चों के केस होते हैं जिनको दस्त लगते हुए 15 दिन से ज्यादा का समय और कई बच्चों को तो एक एक महीने का समय होने पर भी इस प्रकार के रोगों से पीड़ित देखा गया है जोकि अन्य हॉस्पिटलों में ठीक नहीं होते हैं उनको यदि नोबल हार्ट हॉस्पिटल में लाया जाता है तो उनका पूर्ण तरीके से इलाज होता है। डॉ हरीश भारद्वाज ने बताया कि आजकल बदलते मौसम में एलर्जी के बहुत केस हमारे हॉस्पिटल में आ रहे हैं। डॉ भारद्वाज ने कहा कि हमारे पास अत्यंत कमजोर बच्चों की 10 बेड की एक नर्सरी (NICU) है, जहां पर अविकसित बच्चों का इलाज होता है। उन्होंने कहा कि एक केस में जन्म के समय बच्चे का वजन साढ़े 600 ग्राम था, दो महीने बाद जब बच्चे को छुट्टी दी गई तो ईश्वर की अनुकम्पा व डॉ हरीश भारद्वाज द्वारा किए गए ईलाज से बच्चे का वजन 1200 ग्राम हुआ और बच्चा काफी हद तक स्वस्थ है। इसके अलावा बच्चों की हर प्रकार सर्जरी/ऑपरेशन सफल तरीके से पूरी टीम के साथ किए जा रहे हैं। बदलते मौसम में लगातार बीमार हो रहे बच्चों के रोगों के बारे में बताते हुए डॉ हरीश भारद्वाज ने कहा कि यदि आज हमारे हॉस्पिटल में 70 बच्चे मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं तो उनमें से 50 मरीज (बाल रोगी) बदलते मौसम के कारण आ रही बीमारियों के हैं। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात यह है कि आजकल मौसम में बढ़ता प्रदूषण बच्चों के लिए काफी खतरे का कारण है। उन्होंने कहा कि बच्चों को मार्केट की तरफ नहीं ले जाना चाहिए, ऐसे बच्चों को जिन्हें प्रदूषण के कारण सांस लेने में दिक्कत हो रही है, उन्हें सुबह-शाम पार्क में सैर के लिए साथ ले जाया जा सकता है ताकि खुली हवा में बच्चा सांस ले सके, बच्चा खेल सके, कूद सके। डॉ ने बताया कि वायरल इनफेक्शन एक से दूसरे बच्चो को हो जाता है इसलिए बच्चों में आपसी दूरी भी बनाए रखनी चाहिए। जैसे खांसते समय और छींकते समय बच्चों को रूमाल आदि का प्रयोग करने के लिए सुझाव देना चाहिए। बच्चो के खानपान का पूरा ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि
नोबल हार्ट स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल को ज्वाइन किए उन्हें डेढ़ वर्ष हो चुके हैं, इस दौरान उन्होंने लगभग 1100 से अधिक बच्चो का सफल ईलाज किया है। पहले उन्होंने पीजीआई रोहतक में 3 साल की सेवा के बाद अब खुद का हॉस्पिटल शुरू किया है, जिसमें जनता का बहुत अच्छा रिस्पांस मिल रहा है और सबसे बड़ी खास बात यह है कि बाल रोग का जो डिपार्टमेंट है उसमें इस बात के लिए स्पेशल हिदायत दी गई हैं कि कोई भी केस किसी भी प्रकार का बिगड़ा हुआ हो, उसको मना नहीं करेंगे, हर बच्चे की हर टाइप की बीमारी का इलाज यहां ट्रेंड स्टाफ द्वारा किया जाता है। बाल रोग विशेषज्ञ विभाग में 25 बैड का एक वार्ड बनाया हुआ है जिसमें छोटे बच्चों के लिए 10 बेड और 15 बेड बड़े बच्चों के लिए उपलब्ध हैं। इसके अलावा पानी में डूबने वाले बच्चे को, मानसिक रोगों से पीड़ित बच्चे या किसी भी प्रकार के एक्सीडेंट के केस, दिमागी बुखार के, ओवरडोजिंग केस (कई बच्चे कई बार बच्चे बड़ों की दवाइयां खा लेते हैं और अधिक मात्रा में खा लेते हैं) उनका इलाज भी नोबल हॉस्पिटल में पूरे सफल तरीके से किया जाता है। बच्चों की दिल की बीमारी का इलाज भी बहुत अच्छे तरीके से यहां किया जाता है, ब्रेन सर्जरी का भी बच्चों का इलाज यहां किया जाता है, पेट के ऑपरेशन का इलाज भी नोबेल हॉस्पिटल में उपलब्ध है। डॉ. हरीश भारद्वाज ने बताया कि एक पूरी टीम बच्चों के इलाज के लिए उपलब्ध है। डॉ. ने बताया कि दिल्ली बाईपास पर रोहतक में स्थित नोबेल हॉस्पिटल शहर के भी बिल्कुल नजदीक है। डॉ. हरीश भारद्वाज ने कहा कि पीजीआई के प्रतिदिन 5 से 7 बच्चों के केस उनके हॉस्पिटल में आ रहे हैं जिनका वे इलाज कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अत्यंत कमजोर बच्चे, नवजात शिशुओं की आंत में सूजन हो या आंत का ना बनना हो, सांस व खाने की नली का जुड़ा होना आदि बच्चों की सभी प्रकार के ईलाज उपलब्ध है। बच्चों को किसी भी प्रकार का बार बार सांस फूलना, छाती का रुकना, छींक आना, दमे की परेशानी आदि सभी रोगों की सफल जांच और इलाज यहां पर उपलब्ध है।
रिपोर्टर- कृष्ण प्रजापति कैथल
बाइट- नॉबल हॉस्पिटल के बाल रोग विशेषज्ञ एमडी हरीश भारद्वाज।