22/10/2025
दिनभर की थकान से टूटी हुई पूजा जैसे ही अपनी घर में दाखिल हुई, उसके सामने बैठे उसके शराबी पति राजेश ने जोर से कहा, "आ गई? चल, जल्दी से 200 रुपए निकाल, तीन दिन से गला सूख रहा है।"
पूजा ने चुपचाप पानी पीने के लिए कदम बढ़ाए ही थे कि राजेश फिर से चिल्लाया, "सुनती नहीं है? जल्दी कर, पैसा दे!"
पूजा ने शांत स्वर में जवाब दिया, "मेरे पास पैसे नहीं हैं।"
राजेश का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। उसने गरजते हुए कहा, "झूठ बोल रही है! सारा दिन बाहर रही और कह रही है कि पैसे नहीं हैं। ठीक है, 100 रुपए ही दे दे, कहीं से दो घूंट लेकर पी लूंगा।"
पूजा ने फिर से वही बात दोहराई, "मैंने कहा ना, आज काम नहीं मिला।"
यह सुनते ही राजेश का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसकी मर्दानगी को जैसे किसी ने चुनौती दे दी हो। वह उठा और उसके अंदर छिपा हुआ उसका क्रूर रूप बाहर आ गया। बिना कुछ सोचे, उसने पूजा पर लात-घूंसों की बारिश शुरू कर दी। वह लगातार गालियाँ बकते हुए उसे पीटता रहा, और पूजा चुपचाप मार खाती रही, जैसे उसे इसकी आदत हो गई हो।
इस पूरे मंजर को उनका पाँच साल का बेटा राजा, चारपाई के नीचे छुपकर, सिसकते हुए देख रहा था। उसकी मासूम आँखों में डर और बेबसी साफ दिखाई दे रही थी।
पूजा मार खाती-खाती सोच रही थी कि उसकी माँ ने उसे सिखाया था कि "पति परमेश्वर होता है, उसका घर ही तेरा घर है।" कितनी बार उसने सोचा था कि इस दर्द और पीड़ा से मर जाए, लेकिन अपने बेटे राजा के लिए वह जीने की कोशिश करती रही थी। हर बार खुद को संभाल लेती थी, क्योंकि उसे अपने बेटे के भविष्य की चिंता थी।
चार-पाँच घंटे तक राजेश के पीटने के बाद, जब वह थक गया, तो बड़बड़ाते हुए सो गया। पूजा रातभर दर्द और आँसुओं में डूबी रही, अपनी किस्मत को कोसती रही। सुबह जब सूरज की किरणें झोपड़ी के भीतर आईं, तो राजा धीरे से अपनी माँ के पास आया और बोला, "माँ, आज मैं स्कूल नहीं जाऊँगा। सबने अपनी फीस जमा कर दी है, लेकिन मेरे पास नहीं है। कल मास्टर जी ने मुझे मुर्गा बनाया था, आज वे मुझे मारेंगे।"
पूजा ने अपने बेटे की उदास आँखों को देखा और उसका दर्द महसूस किया। उसने अपने पेटीकोट के पल्लू से 200 रुपए निकालते हुए कहा, "मेरे राजा बेटा, तू स्कूल में ना पीटे, इसलिए तेरी माँ रातभर पिटती रही। ये ले, अपनी फीस जमा करवा दे।"
राजा की आँखें खुशी से चमक उठीं। उसने अपनी माँ के आँसू पोछते हुए कहा, "माँ, जब मैं बड़ा हो जाऊँगा, तो तेरी आँखों में कभी आँसू नहीं आने दूँगा।"
पूजा ने अपने राजा बेटे को गले से लगा लिया, और उस दर्दभरे क्षण में भी उसे एक उम्मीद की किरण दिखाई दी।
मित्रो यह कहानी सिर्फ पूजा की नहीं है, बल्कि दुनिया की हर ओह माँ की है, जो अपने बच्चों के भविष्य के लिए हर तरह की कठिनाइयों का सामना करती है। वह दिन-रात मेहनत करती है, सिर्फ इस उम्मीद में कि उसका बच्चा बड़ा होकर एक सफल और खुशहाल इंसान बने।
लेकिन अफसोस, कुछ बच्चे बड़े होकर अपनी माँ के बलिदानों को भूल जाते हैं। वे यह सोचने लगते हैं कि वे अपनी माँ का बोझ उठा रहे हैं, जबकि असलियत यह है कि माँ ही उनकी जिंदगी की नींव है। उन्होंने उन्हें नौ महीने अपनी कोख में रखा, फिर सालों तक उन्हें अपनी गोद में संभाला, और जीवनभर उनका साथ दिया। अगर वह माँ न होती, तो शायद उनका अस्तित्व भी न होता।
इसलिए, हमें अपनी माँ के बलिदानों को कभी नहीं भूलना चाहिए। उन्हें कभी भी बोझ नहीं समझना चाहिए, क्योंकि वे ही हमारे जीवन का असली आधार हैं। माँ के प्रेम और त्याग का सम्मान करना ही हमारी सच्ची जिम्मेदारी है।....
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