28/03/2026
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को अमेरिका द्वारा तेहरान के एक स्कूल पर किए गए हमले को सोचा-समझा हमला बताया है।
28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के साथ ही अमेरिकी हमलों में तेहरान के एक प्राइमरी स्कूल पर मिसाइल दागी गई, जिसमें 150 से अधिक छात्राएं मारी गईं। मरने वाली छात्राओं की उम्र 7 से 12 साल के बीच थी।
ईरानी विदेश मंत्री ने इस घटना को मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह हमला जानबूझकर किया गया ताकि ईरान के लोगों को आघात पहुंचाया जा सके।न्यूज एजेंसी आईएएनएस के अनुसार अरघची ने कहा कि दोनों देश ईरान पर गैर-कानूनी युद्ध थोप रहे हैं, जिसमें आम नागरिकों और स्कूलों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।
शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद को बताते हुए अराघची ने दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में शजारेह तैयबेह प्राइमरी स्कूल पर हुए हमले का जिक्र किया।उन्होंने बताया कि इस हमले में 175 से ज्यादा छात्र और शिक्षक बेरहमी से मारे गए। यह हमला कोई हादसा नहीं, बल्कि सोची-समझी क्रूरता थी। यह युद्ध मानवता के खिलाफ अपराध है।
उन्होंने बताया कि पिछले 27 दिनों में ईरान में 600 से अधिक स्कूल तबाह हो चुके हैं, हजारों छात्र-शिक्षक मारे गए।अस्पताल, एम्बुलेंस और पानी के स्रोत भी निशाने पर हैं। अराघची ने चेतावनी दी कि संयुक्त राष्ट्र के बुनियादी मूल्य और मानवाधिकार ढांचा गंभीर संकट में है।उन्होंने दुनिया के सभी देशों से अमेरिका-इजरायल की कार्रवाइयों की निंदा करने और ईरान के लोगों के साथ खड़े होने की अपील की।
ईरानी मंत्री ने कहा कि यह युद्ध फिलिस्तीन, लेबनान समेत अन्य जगहों पर हुई चुप्पी का नतीजा है। नाइंसाफी के सामने खामोश रहना शांति नहीं, बल्कि और अधिक अत्याचार लाएगा।