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(Freelance Journalist)

जीव दया प्रेमी, पुस्तक प्रेमी, सिक्के इकट्ठे करना, परोपकार, जैन धर्म ग्रंथ पढ़ना , जो प्राप्त है वह पर्याप्त है , न अपेक्षा न उपेक्षा , जियो और जीने दो

सम्पूर्ण विश्व अराजकता और युद्ध के करीब हैं. ऐसे में सभी देशों की अर्थव्यवस्था नीचे जा रही हैं लेकिन मोदीजी के नेत्तरव म...
08/06/2026

सम्पूर्ण विश्व अराजकता और युद्ध के करीब हैं. ऐसे में सभी देशों की अर्थव्यवस्था नीचे जा रही हैं लेकिन मोदीजी के नेत्तरव में देश लगातार आगे बढ़ रहा है.

भारत का सच्चा हितैषी और मोदी जी का परम् मित्र पुतिन भारत को बहुत आगे बढ़ते देखना चाहते हैं.
08/06/2026

भारत का सच्चा हितैषी और मोदी जी का परम् मित्र पुतिन भारत को बहुत आगे बढ़ते देखना चाहते हैं.

भारत एक ऐसा देश है जिसमें बाहरी गद्दारो से ज्यादा देश में ही गद्दार हैं. जिनका कार्य है मोदीजी की किसी भी कामयाबी पर विध...
07/06/2026

भारत एक ऐसा देश है जिसमें बाहरी गद्दारो से ज्यादा देश में ही गद्दार हैं. जिनका कार्य है मोदीजी की किसी भी कामयाबी पर विधवा विलाप करना. यह देश का दुर्भाग्य है.

07/06/2026

कॉकरोच की बेचैनी देखकर मैं हैरान रह गया।
मैं भी धर्मेंद्र प्रधान के ख़िलाफ़ था।
वह आदमी फेल हो गया है।
जांच होनी चाहिए।
लेकिन फिर एक सवाल आया।
यह बेचैनी क्यों?
बोस्टन क्यों?
जर्मनी क्यों?
अभी क्यों?
जून 2026 क्यों?
तो, मैंने खोजना शुरू किया।
मुझे जो मिला उसका पेपर लीक से कोई लेना-देना नहीं था।
इसका सारा लेना-देना पैसे से था।
बहुत सारा पैसा।
प्रधान की टेबल पर तीन फैसले थे।
सभी जुलाई - अगस्त 2026 के लिए तय थे।
सभी भारतीय शिक्षा को नया रूप दे सकते हैं।
फैसला 1.
NCERT.
नई किताबें।
क्लास 9 से 12.
नए मैथमेटिक्स करिकुलम में सुल्ब सूत्र शामिल हैं।
एक खतरनाक आइडिया।
क्योंकि यह भारतीय बच्चों को कुछ ऐसा बताता है जिसे बहुत से लोग छिपाना चाहेंगे।
मैथमेटिक्स यहीं रहता था।
यूरोप के कहानी पर मालिकाना हक जताने से बहुत पहले।
नया हिस्ट्री करिकुलम और आगे जाता है।
आर्यन इनवेज़न थ्योरी।
बाहर।
सिंधु-सरस्वती सिविलाइज़ेशन।
अंदर।
इंडिया की अपनी कहानी।
इंडिया वापस लौटा।
डिसीज़न 2.
15 मई, 2026.
CBSE एक सर्कुलर जारी करता है।
क्लास 9 से 3 भाषाएँ ज़रूरी।
कम से कम दो भारतीय भाषाएँ होनी चाहिए।
डिसीज़न 3.
NTA के लिए के. राधाकृष्णन कमेटी के सुधार।
डीसेंट्रलाइज़्ड एग्ज़ाम।
टेक्नोलॉजी-सॉवरेन आर्किटेक्चर।
फेलियर का कोई सिंगल पॉइंट नहीं।
मैनिपुलेशन का कोई सिंगल पॉइंट नहीं।
अब असली सवाल पूछिए।
अगर तीनों हो जाते हैं तो किसे नुकसान होगा?
एकेडेमिया से शुरू करें।
हार्वर्ड।
SOAS लंदन।
कोलंबिया।
शिकागो।
आर्यन माइग्रेशन फ्रेमवर्क के आस-पास बने डिपार्टमेंट।
सालाना ग्रांट दांव पर।
~ $500 मिलियन.
फिर विदेशी यूनिवर्सिटी.
UK.
US.
ऑस्ट्रेलिया.
कुल मिलाकर भारतीय स्टूडेंट्स से सालाना लगभग $3.7 बिलियन कमाते हैं.
उनमें से लगभग 1.8 मिलियन.
इंडिया के सिस्टम को ठीक करते हैं.
कॉन्फिडेंस बनाते हैं.
सेल्फ-वर्थ वापस लाते हैं.
और वह पाइपलाइन सिकुड़ने लगती है.
फिर कोचिंग इंडस्ट्री आती है.
एंग्जायटी पैदा करते हैं.
उम्मीद बेचते हैं.
रिपीट करते हैं.
आज ₹58,000 करोड़ की कीमत.
2028 तक ₹1,33,995 करोड़ होने का अनुमान.
कमी पर बना.
इंग्लिश-डोमिनेटेड एग्जाम पर बना.
NTA को डीसेंट्रलाइज़ करते हैं.
इंडियन भाषाओं को बढ़ाते हैं.
और इकोनॉमिक्स डगमगाने लगती है.
एलन.
आकाश.
FIITJEE.
BYJU'S.
रेजोनेंस.
दृष्टि IAS.
हज़ारों छोटे प्लेयर्स।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स ने इस इकोसिस्टम में अरबों डॉलर डाले हैं।
चैरिटी के लिए नहीं।
देशभक्ति के लिए नहीं।
रिटर्न के लिए।
फिर आता है NGO इकोसिस्टम।
आउटरेज इंडस्ट्री।
ग्रांट सर्किट।
एक नैरेटिव जो तभी बचता है जब इंडिया इंटेलेक्चुअली डिपेंडेंट रहता है।
बच्चों को उनका अपना इतिहास सिखाओ।
सही-सही।
और नैरेटिव दम घुटने लगता है।
फंडिंग नैरेटिव के पीछे आती है।
फंडिंग भी उनके साथ चली जाती है।
इसे एक साथ जोड़ें।
कंजर्वेटिव एस्टीमेट।
लगभग ₹3 लाख करोड़ रिस्क पर।
$35 बिलियन से ज़्यादा।
यह बिज़नेस सर्वाइवल की लड़ाई है।
भारत यही खत्म करने वाला था।
इसीलिए मीम फैक्ट्री को नई एनर्जी मिली।
इसीलिए प्रोटेस्ट 6 जून को होता है।
एकेडमिक ईयर शुरू होने से पहले।
इससे पहले कि रिफॉर्म्स इर्रिवर्सिबल हो जाएं।
प्रधान जा सकते हैं।
शायद उन्हें जाना चाहिए।
यह एक अलग बहस है।
लेकिन पॉलिसी ही असली लड़ाई का मैदान हैं।
हमेशा से रही हैं।
ज़्यादातर लोग अभी भी हेडलाइन देख रहे हैं।
और लड़ाई को मिस कर रहे हैं।

Satya Sanatan

अब अस्पतालो में डॉक्टरी लूट, ऑपरेशन के नाम पर लूट, दवाइयो की लूट के बाद नकली सर्जरी सामान से लूट का मामला सामने आया है. ...
07/06/2026

अब अस्पतालो में डॉक्टरी लूट, ऑपरेशन के नाम पर लूट, दवाइयो की लूट के बाद नकली सर्जरी सामान से लूट का मामला सामने आया है. मामला पालघर का बताया जा रहा है. जिसमें असली सामान बाजारों में बेच दिया और नकली सामान अस्पताल में पहुंचा दिया. अब तो दोषियों को सिर्फ फांसी की सज़ा ही होनी चाहिए.

गटर से निकले थे, गटर में चले गए.कोक्रोच आंदोलन गंदगी की भेंट चढ़ गया. अराजक तत्व, उनकी भाषा, उनकी वेशभूषा ही आंदोलन को ले...
07/06/2026

गटर से निकले थे, गटर में चले गए.
कोक्रोच आंदोलन गंदगी की भेंट चढ़ गया. अराजक तत्व, उनकी भाषा, उनकी वेशभूषा ही आंदोलन को ले डूबी. कॉक्रोचो का बाप बीमार हो गया. असल में गटर से बाहर ज्यादा देर नहीँ रहा सकता था.
हमारा विचार यह है की पेपर लीक तो दशकों से होते आये हैं. लेकिन कभी तो माफिया पर शिकजा कसना पड़ेगा. दोषियी को उम्र कैद हो फांसी हो.

नाली के कीड़े कॉकरोच कॉकरोच पार्टी में थोड़े बहुत लोग अच्छे भी है या फिर सब के सब मीठे और समलैंगिक ही भरे पड़े है ? मेरी म...
06/06/2026

नाली के कीड़े कॉकरोच
कॉकरोच पार्टी में थोड़े बहुत लोग अच्छे भी है या फिर सब के सब मीठे और समलैंगिक ही भरे पड़े है ? मेरी मोदी सरकार से हाथ जोड़कर अनुरोध है कि इन मानसिक बीमार लोगों का दिल्ली के किसी अच्छे हॉस्पिटल में भर्ती करवाये ये हमारे जैसे ही शस्त्रधारी लोग है बस रास्ता भटक गए है

ये किसी इल्यूजन (भ्रम ) में फंसे हुए है इन्हें बढ़िया से ट्रीटमेंट दिलवाए और किसी के घर का चिराग़ बुझने से बचाए यही राष्ट्र हित होगा अब देश को बचाने के लिए मीठे लोग आ रहे है तब देश तो क्या ही बचना है हमे उन लोगों को बचाना है जो इनके संपर्क में आकर संक्रमित हो सकते है

एक कॉकरोच हाथ में डायरी लेकर कहा रहा था ये हमारा संविधान है जब पत्रकार ने खोलकर दिखाने के लिए कहा तो कुछ नोट बनाकर घूम रहा है मतलब ये अपना ही संविधान बनकर घूम रहे है और बाबा साहब के संविधान को कचरे में फेंकना चाहते है

एक कॉकरोच तो सीधे हाई कोर्ट से आया हुआ था जब पत्रकार ने कहा आप तो कानून के रक्षक है फिर आप संविधान बचाने कैसे आए हुए थे तब कॉकरोच ने कहा आगे की बात ये भाईसाहब बताएंगे पत्रकार ने कहा नहीं आप ही बताइए तो

कहने लगा कि मुझे ज्यादा कुछ पता नहीं है बताओ अब ऐसे वकीलों बाला कोर्ट पहन कर फर्जी वकील बनकर जनता को गुमराह कर रहे है वकीलों को इस पर संज्ञान लेकर कार्यवाही करवानी चाहिएं इस तरह तो ये कॉकरोच वकीलों का नाम ही खराब कर के रख देंगे

एक कॉकरोच ने तो सीधे सीधे व्यपारियों से ही अपील कर डाली कि सरकार को टैक्स मत भरो सरकार अपने आप दबाव में आ जाएगी मतलब कॉकरोच पार्टी के नाम पर कुछ भी चल रहा है इनके पास कोई नया विजन नहीं है ये सब वही लोग है जो हर आंदोलन में अपना खर्चा पानी लेकर निकल जाते है महीने दो महीने इनका भी रोजगार चल निकलता है

अब वामपंथी भी आकर अपना समर्थन दे दिए है मतलब ये सब वही फूंकी हुई झालर के बल्व है बस नई पैकेजिंग में आई है इनके बारे है गोदी मीडिया मुर्दाबाद ले के रहेंगे आजादी मोदी शाह इस्तीफा दें मतलब कुछ भी ? किसी बात में कोई लॉजिक तो होना चाहिए कि नहीं ?

POK में जनता सड़को पर हंगामा कर रही है. बुनियादी जरूरतों के लिए लड़ रही है.
06/06/2026

POK में जनता सड़को पर हंगामा कर रही है. बुनियादी जरूरतों के लिए लड़ रही है.

POK में जनता सड़को पर हंगामा कर रही है. बुनियादी जरूरतों के लिए लड़ रही है.नवाज़ शरीफ बड़े शरीफ से बन जनता की वकालत करने लगे...
06/06/2026

POK में जनता सड़को पर हंगामा कर रही है. बुनियादी जरूरतों के लिए लड़ रही है.नवाज़ शरीफ बड़े शरीफ से बन जनता की वकालत करने लगे हैं. पाकिस्तान को लुटकर विदेशों सेभाषण दे रहे हैं. अब शाहनवाज़ जायेगा नवाज़ बदमाश आयेगा. यही खेल खेलेंगे.

विपक्ष झूठ ही फैलाता रहता है. मोदीजी विरोध में लगा रहता है.
06/06/2026

विपक्ष झूठ ही फैलाता रहता है. मोदीजी विरोध में लगा रहता है.

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