Dr. Ambedkar Yuva Manch

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"सावित्रीबाई फुले – महिलाओं की पहली क्रांति"सावित्रीबाई फुले  महिलाओं की आजादी की पहली मशाल 🔥🔥 जब लड़की का पढ़ना "गुनाह"...
03/01/2026

"सावित्रीबाई फुले – महिलाओं की पहली क्रांति"

सावित्रीबाई फुले
महिलाओं की आजादी की पहली मशाल 🔥

🔥 जब लड़की का पढ़ना "गुनाह" था...
तब उन्होंने किताब उठाई
और समाज से टकरा गई

🔥 जब औरत की आवाज़ दबाई जाती थी...
तब सावित्रीबाई फुले बोलीं –
"लड़की पढ़ेगी, तभी समाज बढ़ेगा"

🔥 जब बेटियों को घर में कैद रखा जाता था...
तब उन्होंने
भारत का पहला कन्या विद्यालय खोला (1848)

🔥 जब विधवाओं को जीने का हक़ नहीं था...
तब उन्होंने
विधवा आश्रम और सहारा दिया

🔥 जब गर्भ में बेटियों को मार दिया जाता था...
तब उन्होंने
कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ लड़ाई लड़ी

🔥 जब दलित और गरीब लड़कियाँ इंसान नहीं मानी जाती थीं...
तब उन्होंने कहा –
"शिक्षा सबका अधिकार है"

🔥 जब लोग पत्थर और गालियाँ देते थे...
तब उन्होंने जवाब दिया –
हिम्मत, शिक्षा और संघर्ष से

🔥 जब बीमारी से लोग भागते थे...
तब सावित्रीबाई फुले
बीमारों को कंधे पर उठाकर अस्पताल ले जाती थीं

🔥 यह सिर्फ एक महिला नहीं थी...
यह महिलाओं की
पहली क्रांतिकारी गुरु थीं

🔥 सावित्रीबाई फुले
महिलाओं की शिक्षा = समाज की मुक्ति

❤️ पढ़ो | जागो | लड़ो | इतिहास बदलो
जय सावित्रीबाई फुले

असली ज्ञान की देवी - सावित्रीबाई फुले 🙏
✨ 3 जनवरी | सावित्रीबाई फुले जयंती
📚 भारत की पहली महिला शिक्षिका
👩‍🏫 नारी शिक्षा की अमरदूत
🔥 सावित्रीबाई फुले जी को शत्-शत् नमन

हम अपनी जड़ों को ही मिट्टी में मिला रहे हैं...खेजड़ी सिर्फ़ एक पेड़ नहीं, थार के रेगिस्तान की जान है – चारे की उम्मीद, स...
22/12/2025

हम अपनी जड़ों को ही मिट्टी में मिला रहे हैं...

खेजड़ी सिर्फ़ एक पेड़ नहीं, थार के रेगिस्तान की जान है – चारे की उम्मीद, सांगरी की खुशबू, छांव की ठंडक और मिट्टी को थामने वाली जड़ें।

अरावली सिर्फ़ पहाड़ नहीं, उत्तर भारत की रक्षा कवच है – थार की रेत को रोकती है, बारिश को सोखती है, हवा को साफ़ करती है।

सोलर ऊर्जा चाहिए, स्वच्छ बिजली चाहिए – लेकिन क्या खेजड़ी की बलि देकर? क्या अरावली को खोदकर?

विकास चाहिए, लेकिन ऐसा विकास जो आने वाली पीढ़ियों को सूखा, धूल और बंजर ज़मीन न सौंपे।

पेड़ बचेंगे, पहाड़ बचेंगे – तभी पानी बचेगा, किसान बचेगा, हमारी संतान बचेगी।

ये लड़ाई बिजली या खनन के खिलाफ नहीं... ये अंधे लालच के खिलाफ है, जो प्रकृति को लूटकर हमें ही कंगाल बना रहा है।

सोचिए, बदलाव लाइए – संतुलित विकास, हरा विकास। 🌳🏔️💚

🤔🤔🤔🤔🤔

#हराविकास #खेजड़ीबचाओ #अरावलीबचाओ #पर्यावरणसंरक्षण #जलजंगलजमीन

उत्तर प्रदेश STF द्वारा नैनीताल से आशीष शुक्ला उर्फ आशु शुक्ला की गिरफ्तारी एक गंभीर मामला है, जहां फर्जी शैक्षिक प्रमाण...
22/12/2025

उत्तर प्रदेश STF द्वारा नैनीताल से आशीष शुक्ला उर्फ आशु शुक्ला की गिरफ्तारी एक गंभीर मामला है, जहां फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल कर वकालत की प्रैक्टिस की जा रही थी।

यह घटना बेहद निंदनीय है और कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती है कि कैसे फर्जी डिग्री के आधार पर कोई व्यक्ति अदालतों में लोगों का प्रतिनिधित्व कर सकता है तथा आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त हो सकता है। पुलिस द्वारा 25,000 रुपये का इनाम घोषित करना इसकी गंभीरता को दर्शाता है।

ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है ताकि शिक्षा और न्याय व्यवस्था की पवित्रता बनी रहे। बार काउंसिल और पुलिस को मिलकर फर्जी वकीलों के पूरे नेटवर्क का पता लगाना चाहिए, चाहे आरोपी किसी भी जाति या समुदाय से हो। धोखाधड़ी और ठगी किसी की जातीय पहचान से नहीं जुड़ी होती, बल्कि यह व्यक्तिगत अपराध है।

कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए। न्याय व्यवस्था की रक्षा हम सबकी जिम्मेदारी है। जय हिंद! 🇮🇳

#न्यायव्यवस्था #कानूनका राज #फर्जीवकील TF #धोखाधड़ीपरकार्रवाई #एकता #जयभारत

22/12/2025

बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास की कट्टरपंथी भीड़ द्वारा बेरहमी से हत्या और शव को जलाने की घटना बेहद दुखद और निंदनीय है। यह हमें याद दिलाती है कि भारत में बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान की वजह से ही हम एक धर्मनिरपेक्ष और कानून के शासन वाले देश में सुरक्षित हैं। अन्यथा ऐसी घटनाएं यहां भी आम हो सकती थीं। बाबासाहेब को कोटि-कोटि नमन 🙏🏾

भारत सरकार से अनुरोध है कि बांग्लादेश व पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर दबाव बनाए और पीड़ितों को भारत में शरण देने की नीति को मजबूत करे। साथ ही, भारत में रहने वाले उन लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए जो विदेशी कट्टरपंथ का समर्थन करते हैं या अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत फैलाते हैं।

एकता और संविधान की रक्षा ही हमारा सबसे बड़ा कवच है। जय हिंद! 🇮🇳

जब धरती की सांसें अभी नवजात थीं, जब इंसान का कोई चिह्न नहीं था, तब  #अरावली पर्वतमाला ने जन्म लिया।कहा जाता है, लगभग 180...
21/12/2025

जब धरती की सांसें अभी नवजात थीं, जब इंसान का कोई चिह्न नहीं था, तब #अरावली पर्वतमाला ने जन्म लिया।
कहा जाता है, लगभग 180-200 करोड़ वर्ष पहले, प्राचीन महाद्वीपों के टकराव से धरती हिली, और अरावली उठ खड़ा हुआ।
यह कोई मामूली पहाड़ नहीं, बल्कि प्रकृति की ढाल था – राजस्थान का प्राचीन रक्षक।
समय गुजरा, राजवंश उभरे और मिटे, थार का रेगिस्तान फैलने को बेकरार हुआ।
लेकिन अरावली चट्टान की तरह डटा रहा – आंधियों को रोकता, बाढ़ को थामता, भूमिगत जल को जीवित रखता।
आज वही अरावली चुपचाप सवाल कर रहा है:
अगर मेरी ऊंचाई 100 मीटर से कम है, तो क्या मेरी भूमिका भी कम हो गई?
अब कहा जा रहा है कि छोटी पहाड़ियां काटी जा सकती हैं।
लेकिन कोई नहीं सोचता कि यही छोटी चट्टानें हमें थार के रेगिस्तान से बचाती हैं।
ये न रहें तो रेत शहरों को निगल लेगी, जलस्रोत सूख जाएंगे, हवाएं विषैली हो जाएंगी।
अरावली कहता है: मैं सबसे ऊंचा नहीं, लेकिन सबसे प्राचीन हूं।
मैं बूढ़ा हूं, पर अटल हूं।
करोड़ों वर्षों से खड़ा यह योद्धा आज मशीनों के सामने कमजोर पड़ रहा है।
अगर हमने अरावली को खो दिया, तो आने वाली पीढ़ियां पूछेंगी –
जो तुम्हारा रक्षक था, उसे तुमने क्यों नहीं बचाया?
#अरावलीबचाओ #पर्वतमाला #रेगिस्तान_से_रक्षा #राजस्थान #पर्यावरण

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