01/09/2026
सियासत के बाजार में वादे बहुत बिकते हैं, मगर सच्चाई अक्सर मुफ्त में भी नहीं मिलती।
वोट के वक्त जनता सबसे खास होती है, लेकिन जीत के बाद उसी जनता के सवाल क्यों भुला दिए जाते हैं?
कुर्सी किसी की भी हो, सवाल जनता का रहेगा—काम कितना हुआ?