Newspaper

Newspaper weekly hindi news paper

31/01/2024

खेतवा की मेड़वा पर ; सोचत बाने घूरा ,
ठोढिया पर लगवले ऊ ; लाठी के हुर्रा ।

26/01/2024

आज गणतंत्र दिवस के अवसर पर चिड़ियाघर देखने गया था ।वहाँ आज बहुत भीड़ थी , मौसम भी आज अच्छा था ,धूप निकली थी ।वहाँ तरह तरह के जंगली जानवर , मछलियाँ और पंछी भिन्न-भिन्न बाड़ो मे रखे गये थे । सबकी सुरक्षा ,भोजन, ईलाज इत्यादि की समुचित ब्यवस्था की गयी थी और सबको निर्भय होकर सुरक्षित जीवन जीने एवं अपनी प्रजाति को विकसित करने की पूर्ण आजादी सुनिश्चित की गयी थी । कोई जानवर, पंछी या मछली , किसी अन्य जीव के हक ,स्वतन्त्रता, या संवर्धन मे हस्तक्षेप नही कर सकता था और न ही कोई जानवर किसी अन्य जानवर को मारकर अपना भोजन बना सकता था । सभी जानवर अपने अपने दायरे ( बाड़े ) में स्वतंत्र थे , परन्तु किसी अन्य जानवर की स्वतंत्रता मे बाधा पहुँचा सकते थे और न ही किसी अन्य जानवर के बाड़े का अतिक्रमण कर सकते थे । चिड़ियाघर एक सख्त नियम के अन्तर्गत संचालित है और सबको बिकसित होने , स्वतंत्रता पूर्वक जीने का पूर्ण अवसर प्रदान करता है ।वहाँ शेर ,चीता , बाध , भेड़िया इत्यादि बलशाली और खूंखार जानवरों को भी स्वतंत्रता है परन्तु अपने बाड़ो तक ही तो हिरन , खरगोश, चीतल , भेड़ , इत्यादि जैसे निर्बल जानवर की आजादी भी सुनिश्चित की गयी है , वे भी अपने बाड़ो मे सुरक्षित हैं और किसी हिंसक पशु को उनके बड़ों मे घुसने की आजादी नहीं है । अर्थात कमजोर और अहिंसक जानवरों के लिए सुरक्षा के दृष्टिकोण से बाड़े बनाये गये हैं ,अर्थात प्रोटेक्शन हेतु आरक्षित हैं वहीं मजबूत और हिंसक जानवर के बाड़े उनको कमजोर जानवरों पर हिंसा करने से रोकने और उन्हे उनके दायरों मे सीमित किये रखने की नियत से बनाये गये हैं ।अर्थात प्रिवेंशन हेतु बनाये गये हैं ।
इसी प्रकार हिंसक मछलियों जैसे शार्क , बरारी इत्यादि को शाकाहारी मछलियों और हिंसक पछियों जैसे बाज , चील , कौवे इत्यादि को कबूतर , गौरैया , तोता इत्यादि से अलग रखा जाता है ।और सबके भोजन, पानी और इलाज चिड़ियाघर प्रशासन द्वारा सुनिश्चित किया जाता है ।
आज चिड़ियाघर से आने के बाद मुझे जंगलराज जंगल समाज और संविधान का मतलब समझ आया । जंगलराज और संविधान राज का अन्तर स्पष्ट हुआ।
जंगलराज में सर्वाइवल आफ फिटेस्ट का फार्मूला चलता है ।अर्थात जो ताकतवर है और हिंसक है वही जंगलराज में जिन्दा रह पाएगें । अहिंसक और कमजोर नस्लें खत्म हो जाऐगी । जबकि संविधान राज में सभी जीव विकास करेंगे और सभी जीवित रहेगें । कोई जीव आजीवन बलशाली नही रह सकता , यही प्रकृति का नियम है । शेर भी एकदिन बूढा और कमजोर होगा तब जंगलराज में उसको भी भोजन के लाले पड़ेगे और उसको भी एकदिन गीदड़ का भोजन बनना पड़ेगा । परन्तु संविधान राज में उसे भोजन , पानी और इलाज आजीवन सुनिश्चित होगा और वह गीदड़ों का शिकार होने से बच जाऐगा ।अर्थात संविधान राज सम्पूर्ण मानवता के विकास और सुरक्षा हेतु आवश्यक और अनिवार्य है ।इसके द्वारा ही सम्पूर्ण विश्व की मानवता सुरक्षित एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में रह सकती है ।
चिड़ियाघर दरअसल जंगल का सामाजीकरण है और संविधान राज जंगलराज का बिकल्प है जो प्रत्येक जीव की सुरक्षा, संरक्षण और विकास सुनिश्चित करती है ।
कल्पना कीजिए यदि चिड़ियाघर के बाड़ों को तोड़ दिया जाय तो हिंसक जानवर सभी अहिंसक जानवरों को मार कर खा जाऐगे , फिर आपस में एकदूसरे को मारकर खाऐगें और अन्त मे खुद भी एकदिन भोजन के बिना भूख से मर जाएगें ।यही जंगलराज है और यही इसकी अन्तिम परिणिति , जबकि संविधान राज मे सभी जीव अनवरत काल तक खुशहाल जिन्दा रहेंगे ।
वास्तव में ये चिड़ियाघर के बाड़े ही किसी भी देश के संविधान की आर्टिकल्स के समान हैं जो मानव और जीव जन्तु के स्वतंत्र और खुशहाल जीवन सुनिश्चित करती हैं । इसीलिए हर ब्यक्ति और हर समाज को अपने देश के संविधान का सम्मान और उसकी रक्षा करनी चाहिए ।
जय संविधान

14/05/2021

जिस तरह कोरोना आम जनमानस में फैल गया है, इलाज पहुँच से बाहर हो गया है और संसाधनों का अकाल पड़ गया है| बेड , अस्पताल, दवाये कम पड़ रहे हैं| सरकार को छोटे मोटे कस्बों के प्राइवेट अस्पतालों को भी अधिग्रहण कर उन्हें कोरोना सेन्टर बनाने पर विचार करना चाहिए| इसके इलाज की दवाये सरकार ने सार्वजनिक कर अच्छा काम किया है, दवाये लगभग सबको पता हैं, जरूरत मात्र आक्सीजन युक्त सेन्टरो की है जो आम जनमानस को सुलभ नहीं हो पा रही हैं|
लेबल वन और टू छोटे कस्बों के प्राइबेट अस्पतालों और पीएचसी और सीएचसी को लेबल थ्री अस्पतालों की सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी इसकी भयावहता को देखते हुये विचार करना चाहिए|
कोरोना बर्षो तक रहना है, इसलिए ग्रामीण स्तर पर वर्तमान मे उपलब्ध प्राइवेट चिकित्सा सुविधाओ को भी ट्रेनिंग देकर आम जनमानस के लिये सुलभ करने पर विचार करना उपयुक्त हो सकता है |

11/10/2020

ऐसा नहीं कि हमारे नेता उचित अनुचित नहीं जानते , या उन्हें इस बात कि समझ नहीं कि समाज की भलाई के लिये कौन सा कार्य उपयोगी है और कौन अनुपयोगी ।
जातीय तुष्टिकरण और सामाजिक विघटन के कार्य वे मुख्‍यतः दो कारणों से करते हैं ।
पहला और मुख्य कारण यह है कि जातीय तुष्टिकरण से एक लम्‍बे समय तक वह जाति बिशेष उनकी ब्‍यक्‍तिगत वोट बैंक बनी रहती है, जिससे वे लम्‍बे समय तक सत्‍तासुख का आनन्द लेते हैं ।
दूसरा कारण यह है कि जनता भी स्‍वजातिय नेता को ही देश और प्रदेश के मुखिया के पद पर आसीन करने की लालसा रखती है। विभिन्‍न वर्गो मे विभाजित जनता का इससे इगो की तुष्‍टि होती हैं और वर्गो मे विभाजित समाज मे उसे सर्वोपरि होने की अनुभूति होती है।इसीलिये कोई भी नेता स्‍वजातिय नेता को बढने से रोकने का बिपक्षी दल को हराने से ज्यादा ताकत लगाता है ।
सभी नेता जानते है कि धार्मिक उन्‍माद , वर्गीय विभाजन और जातीय तुष्टिकरण से समाज को कोई भला नहीं होनेवाला बल्‍कि नौकरियां, रोजगार, बुनियादी सुविधाये , सामाजिक भाईचारा मे बढोत्तरी से समाज का भला होना है। परन्‍तु इस लीक पर चलने से समाज का भला हो सकता है, राजनीतिक दल का भला हो सकता है परन्‍तु उनका कोई लाभ नहीं हो सकता ।
भारतीय पत्रकारिता भी राजनेताओ की जातीय और वर्गीय छवि ही गढने का काम करती है, न कि सामाजिक । हमारे देश में दलित नेता, पिछड़े नेता और सवर्ण नेता तो सभी होते रहे हैं , परन्‍तु दलितों के नेता , पिछडो़ के नेता या सवर्णो के नेता यदाकदा और इक्‍का दुक्‍का ही हो पाते हैं ।

11/10/2020

लिंगुवल लामबन्‍दी और जागरूकता का दौर दो दशक पूर्व से ही शुरु हो चुका है, ममता बनर्जी, स्‍व जयललिता, मायावती , अनुप्रिया पटेल इसी लामबन्‍दी की उपज हैं ।अभी यह धुंधला जरूर है परन्‍तु समय के साथ साथ इसकी चमक निखरती जायेगी ।

11/10/2020

यदि सपा पिछड़ों के हित में, भाजपा/ कॉग्रेस सवर्णो के हित में और बसपा दलितों के हित मे काम करती है ,तो महिलाओं के हितों में काम कौन करेगा । इसके लिए महिलाओं को स्‍वतंत्र समूह में इकट्ठा होना जरूरी है।
धुआँधार बलात्कार इसकी पृष्ठभूमि तैयार कर रहे हैं, जल्द ही समाज मे महिला समाज पार्टियो की आहट सुनायी देगी ।

24/05/2020

भारतीय समाज में प्रजातांत्रिक चेतना इतनी ही विकसित है कि वह तिलक तेरहवीं में पूड़ी तोड़ने वालों और सेव केला बाँटते हुये फोटो खिचानेवालों को ही वास्तविक समाजसेवी समझ बैठती है, और अपने और अपनी आगामी पीढ़ियों के लिये नीतियाँ निर्धारित करने के लिये लोकसभा और विधानसभाओं में भेज देती हैं।ये तथाकथित समाजसेवक भी अपने लिये कुछ और ज्यादे तिलक तेरही में पूड़ियाँ तोड़ने के लिये उपस्थित होने हेतु अपने लिये वाहनों की ब्यवस्था कर और कुछ और ज्यादा लोगों को केला सेव बाँटने हेतु अपने आप को सक्षम बनाने हेतु अपना आर्थिक सामराज्य स्थापित कर , उच्च गुणवत्ता वाले कैमरों के साथ जनता के बीच उपस्थित रहते हैं ताकि वे तिलक तेरही और फलवितरण के उच्च गुणवत्ता के फोटो मीडिया में प्रसारित कर लकें। सदन में नीतिगत फैसलों के समय प्रायः ये समाजसेवी मेंज थपथपाते ही नजर आते हैं। पर इनकी महति मेंहरबानी है कि ये आपकी पूड़ी तोड़ने का कार्य मिस नही करते वो भी दलबल के साथ , भले ही तिलकहरूओ के लिये मिठाई और पूड़ी घट जाय।

09/05/2020

एक २००८ से २०१२ तक की वैश्विक मन्दी थी कि भारतीयों को पता ही नहीं लगी, एक ये करोना है कि दो ही महीने में फाड़ के रख दिया ।

भारतीय आसानी से करोना को कर सकते हैं पराजित सुमन बी आनन्द अब तक के उपलब्ध आँकड़ों से यह पता चल रहा है कि भारतीय जलवायु क...
11/04/2020

भारतीय आसानी से करोना को कर सकते हैं पराजित
सुमन बी आनन्द

अब तक के उपलब्ध आँकड़ों से यह पता चल रहा है कि भारतीय जलवायु कोरोना वायरस के पोषण के अनुकूल नहीं है। पूरे भारत भूमि में कहीं भी कोरोना स्वतः उत्पन्न नहीं हुआ है ,बल्कि किसी न किसी देंश से आनेवालों के साथ आया है ।अब तक जितने भी इस वायरस से प्रभावित चिन्हित हुये है वे किसी न किसी देश से जल्द ही भारत आये हैं।
अमूमन यह देखा गया है कि किसी अन्य जलवायु का उत्पन्न वायरस किसी अन्य जलवायु में या तो अपनी मारक क्षमता खो देता है या अत्यंत भयानक रूप ले लेता है ।प्रयंः जहाँ की जलवायु उस जीवाणु या बिशाणु के बिपरित होती है वहाँ वह अपेक्षाकृत कम मारक होता है और उसका फैलाव भी धीमा होता है, और कुछ ही दिनों मे वह लगभग निष्प्रभावी हो जाता है ।इसके बिपरित जिन भूभागों की जलवायु अनुकूल होती है वहाँ वह महामारी का रूप ले लेता है ।
करोना चीन के बुहान क्षेत्र से उत्पन्न हुआ है जो एक ठंढा भौगोलिक क्षेत्र है और अमेरिका, इटली , फ्रांस ,जर्मनी इत्यादि देशों में महामारी का रूप ले चुका है ।जबकि अफ्रीका और अरब के गर्म क्षेत्रों मे इसका फैलाव और कहर अपेक्षाकृत कम है । मतलब साफ है कि ठंढी जलवायु इस वायरस के अनुकूल और गर्म जलवायु इसके प्रतिकूल है ।अतः इसके फैलाव की गति भारत मे धीमी होगी और जल्द ही इसकी शक्ति क्षीण हो जायेगी ।
अगर भारतीय समाज कड़ाई से लाकडाउन का पालन करता है और अपनी संवेदनाओं पर नियंत्रण रख बाहर निकलने , लोगों से मिलने जुलने, सामूहिक कार्यक्रमों से दूरी बनाने, भोजन , ब्यायाम करने का कड़ाई से पालन करता है तो निश्चित रूप से भारतीय जनमानस करोना को पराजित कर अपने देश और देशवासियों को सुरक्षित बचा सकता है ।
बिदेशी या बाहरी सूक्ष्मजीव प्रायः स्वयं तो किसी अन्य भूभाग मे बहुत खतरनाक या महामारी का रूप लेने मे, यदि परिस्थितियाँ उनके अनुकूल नही है तो सक्षम नहीं होते , परन्तु यदि वे किसी न किसी स्थानीय सीजनल रोग से जब युग्मित हो जाते है यानि किसी स्थानीय सीजनल रोग से मिल जाने के बाद महामारी का रूप ले सकते हैं।
प्रकृति के जानकारों के अनुसार जिस साल गर्मी के शुरूआती मौसम में गाँवों मे स्वतः उगने वाले भटकोआँ के पौधे हर साल की अपेक्षा ज्यादा उगने लगें और ज्यादा मजबूत और बड़े आकार में दिखाई दें , उस साल हेपेटाइटिस बी रोग के फैलने की सँभावना ज्यादा होती है ।अतः यह तय तो नहीं है कि करोना और हेपेटाइटिस बी का युग्म बनेगा ही, परन्तु एक संभावना तो हो ही सकती है । भटकोआँ का मटर के दाने जैसे काले काले फल जो स्वाद मे खट्टे मीठे लगतें है हेपेटाइटिस बी रोकने की दवा हैं ।अतः हर ब्यक्ति को दो चार दाने दो चार दिन खा लेना चाहिए ।
इस प्रकार हम भारतवासी करोना को इस जंग मे लाकडाउन का पालन कर पराजित कर सकतें हैं,और भारतीय आवाम को सुरक्षित रख सकतें हैं। करोना का उद्गम चूकि चीन है अतः उसकी प्राकृतिक दवा की जड़ी बूटी चीन मे ही पैदा होगी किसी अन्य देश में नहीं , अतः हमे करोना के साथ साथ इस मौसम में होने वाले मौसमी रोगों से भी सावधानी बरतने की जरूरत है। तभी हम करोना को पराजित कर अपनी आवाम को बचा पायेगें।

27/03/2020

सम्‍मानित संचार कर्मी मित्रों,
निश्चित रूप से यह आपदा की घड़ी हम सबके लिए एक चुनौती लेकर आयी है, एक तरफ भय है तो एकतरफ कर्तव्य बोथ । हमे यह याद रखना है कि यही हमारा कर्तव्य बोध हमे समाज मे सम्मान, परिवार और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने के लिये अर्थ दिलाता है।हमारा यही कर्तव्य बोध हमे एक आम इन्सान से अलग पहचान और आम आदमी के दिलो दिमाग मे सम्मान पैदा करता है।एक कर्मचारी के मात्र घोषित कर्तव्य ही नहीं होते वरन कुछ अघोषित नैतिक कर्तव्य भी होते हैं ,जिसको हर कर्मचारी को ऐसे आपदा के समय निर्वहन करना पडता है।और यही अघोषित नैतिक कर्तव्य पूरे समाज की नजर मे पूरे कर्मचारी समुदाय के सम्मान का आधार होता है ।
अभी आम जनता अपने अपने घरो से स्‍वत: बाहर नहीं निकल रही है,उसकी एक वजह आपका योगदान भी है जो आम जनमानस को बाहरी दुनियाँ से इन्‍टरनेट, ह्‍वाटसैप , फेसबुक, इन्‍सटाग्राम इत्यादि के माध्यम से जोडे हुये है। मनोरंजन के अन्य साधन, समाचार,बैकिंग सेवाये, मेडिकल सेवाये, सभी प्रकार की सूचना सेवाये भी आम जनमानस को आपकी कर्तव्य निष्‍ठा से उपलब्ध हो रहा हैजिससे जनता निरन्तर अपने आप अपडेट हो रही है और सबलोग खुशी खुशी अपने को आइसोलेट कर रहे हैं । जरा कल्पना कीजिए यदि संचार सेवाये बाधित हो जायेगी तो क्‍या स्थिति होगी।तरह तरह की अफवाहे, शंकाये फैलने लगेगी और लोग आइसोलेसन तोडने लगेगे।उनको घरो मे रोकना मुश्किल हो जायेगा और जिस पवित्र उद्देश्य से हमारी सरकार ने इतना महत्वपूर्ण और साहसिक फैसला लिया है, उसका फलीभूत होना मुश्किल हो जायेगा ।
अतः सभी बीएसएनएल कर्मीयो से यह अनुरोध और अपेक्षा की जाती है कि अपनेआप को सुरक्षित रखते हुये अपने नैतिक कर्तव्यो की पूर्ति मे अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान कर राष्ट्र और समाज के प्रति अपना निष्ठा के नये आयाम स्थापित कर समस्त कर्मचारी समुदाय को सम्मानित करे, और कर्मचारी और कर्मचारी समुदाय की सार्थकता को स्थापित करें ।
शुभकामनाओं सहित
आपका कर्मचारी मित्र
महा प्रबन्धक
बीएसएनएल

24/02/2020

फौलादी आत्मबल के स्वामी थे दुर्गा बाबा
मेरे लगभग 40 साल के चिकित्सकीय कैरियर में ऐसा किसी व्यक्ति से सामना नहीं हुआ जिसका आत्मबल पंडित दुर्गा प्रसाद मिश्र के करीब भी हो। सामान्यतया लोग सामान्य रोगो की चपेट में आने पर ही अपना आत्मविष्वास खो बैठते हैं जिन्हे दवा से ठीक करनें में काफी मुष्किल का सामना करना पड़ता है। पंडित मिश्र मेरे चिकित्सक जीवन में अपवाद है। इतने बड़े आत्मबल का व्यक्ति मैनें आज तक नहीं देखा। भयंकर बीमारी से ग्रसित पंडित मिश्र को उच्च चिकित्सकीय व्यवस्था ने भले ही ठीक किया हो परन्तु उनके इस असाध्य समझी जाने वाली बीमारी से ठीक होने में उनके फौलादी आत्मबल का सर्वाधिक योगदान है। दुर्गा प्रसाद मिश्र विष्व के उन चन्द लोगो मे षामिल हैं जिन्होनें असाध्य समझे जाने वाले रोग से लड़कर विजय प्राप्त किया। किसी षायन ने सही कहा है -
दुनिया में वही षख्स है, ताजीम के काविल,
जिस षख्स ने हालात का रूख मोड़ दिया हैं।
रोग को मात देने के बाद का जीवन भी उतना ही चमकृत कर देने वाला रहा। सामान्यता रोग के बाद लोग अपना आत्मविष्वास खो देते हैं अथवा मानसिक रूप से हार मानकर बैठ जाते है परन्तु पण्डित मिश्र का जोष एवं समर्पण कम होनें की वजाय और बढ़ा हुआ दिखता था। ऐसा लगता था जैसे यह वही दुर्गा हैं जो आज से 40-50 वर्श पूर्व में हुआ करते थे कदाचित उससे भी अधिक आत्मबल और ओज से भरे व्यक्तित्व के स्वामी। उनमें परिस्थितियो से लड़ने की अद्भुत क्षमता थी और रोग मुक्त होने के बाद तो उससे भी बढ़ी हुई लगती थी। यह एक चमत्कार जैसी बात है। इसकी कल्पना तो की जा सकती है, परन्तु साकार रूप में विरलतम ही पायी जाती है। हार न मानना और परिस्थितियों से लगातार जुझना उनका स्वभाव था। वो तब तक जुझते रहते थे जबतक परिस्थितियाँ खुद ही हार न जाय परन्तु दुर्गा हार जाय यह असम्भव था। वषीर वद्र ने किसी दुर्गा को ही देखकर कहा होगा।
कभी मैं अपने हाथो की लकीरों में, नही उलझा,
मुझे मालूम है, किस्मत का लिक्खा भी बदलता है।
मैं अपने आप और अपने पूरे परिवार को खुषनसीब मानता हूँ कि हम लोगो को दुर्गा बाबा जैसे व्यक्तित्व को करीब से देखने समझने का मौका मिला और उनसे बहुत कुछ सीखने-समझनें का भी। कई परिस्थितियों को सुलझाने और धैर्य के साथ सामना करने का आत्मबल भी पंडित मिश्र के सानिध्य का प्रतिफल ही है। षायद अगर मै दुर्गा जी के करीब नहीं होता तो उन बिकल परिस्थितियों से पार नही पाया होता। कुँअर बेचैन नें सही ही कहा है।
वो जिसमें लौ है, बिरोधों में और चमकेगा,
किसी दिये पर, अंधेरा उछाल कर देखो।
मैं ईष्वर से पंडित मिश्र की महान आत्मा की षान्ति और उनके परिवार को इस महान कश्ट को सहन करने की क्षमता देनें की प्रार्थना करता हूँ।
डा0 उदय प्रताप आजाद
सलेमपुर - देवरिया

13/01/2020

उच्च शिक्षित इसलिए समाज मे गम्भीरता पूर्वक सुने जातें हैं या सम्मान पाते हैं कि उनमें समस्याओं , नीतियों , और नीतियों के दूरगामी परिणामों को सोचने समझने की क्षमता अशिक्षित या अल्प शिक्षित लोगों की अपेक्षा ज्यादा होती है ।दुर्भाग्यवश हम ऐसे दौर से गुजर रहे है जिसमे उच्च शिक्षित लोगों द्वारा नीतियों के विश्लेषण को राष्ट्र द्रोह कहा जाता है ।
यह ऐसा अभिशप्त दौर है जिसमें अशिक्षित लोग उच्च शिक्षितों को कटघरे मे खणा करतें है ।

Address

Station Road
Salempur
274509

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Newspaper posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Newspaper:

Share