23/02/2026
💔🥲खेत में बेटी के साथ 2 दरिंदों ने बलात्कार किया बाप ने दोनों को घायल कर लिं**ग काट दिया क्या पिता ने सही किया।पिता ने कहा कानून कोई कार्रवाई नहीं करती, कानून फाइल बनती है बस बाद में फाइलों को दबाकर छोड़ देती है। #
जब किसी पिता को अपनी बेटी की टूटी हुई हालत दिखती है, तो उसके अंदर का संसार बिखर जाता है। वह सिर्फ एक बाप नहीं रहता, वह दर्द, बेबसी और आक्रोश का प्रतीक बन जाता है। उसे लगता है कि अगर वह खुद खड़ा नहीं होगा, तो शायद कोई और नहीं होगा। यही सोच उसे ऐसे फैसलों की ओर धकेल देती है, जिन पर समाज बहस करता है।
अक्सर लोगों को महसूस होता है कि प्रक्रिया लंबी है, फाइलें बनती हैं, कागज़ चलते हैं, तारीखें मिलती हैं — और इसी बीच पीड़ित का दर्द हर दिन नया हो जाता है। यह भावना कि “सिर्फ बातें होती हैं” इंसान के भीतर की उम्मीद को तोड़ देती है।
लेकिन सच यही है कि गुस्से से जन्मा हर फैसला सही नहीं होता। असली बदलाव तब आएगा जब व्यवस्था तेज़, संवेदनशील और जवाबदेह बनेगी — ताकि किसी पिता को खुद कानून बनने की जरूरत ही न पड़े, और हर बेटी सुरक्षित महसूस कर सके।