10/04/2026
गला उस #इंसान का नहीं कटा, गला इस समाज की ' #इंसानियत' का कटा है!
#फारबिसगंज की सड़कों पर जो हुआ, वो सिर्फ एक अपराध नहीं बल्कि हमारे "मुर्दा" होने का प्रमाण है। जब एक इंसान #जिंदगी के लिए तड़प रहा था, तब हमारी सभ्यता #वीडियो बना रही थी। कातिल के हाथ में तो हथियार था, पर #तमाशबीन भीड़ के हाथ में मौजूद मोबाइल उस हथियार से कहीं ज्यादा घातक साबित हुआ।
हम 'सभ्य' नहीं, सिर्फ ' #दर्शक' बन गए हैं। जिसे खून में भी 'कंटेंट' नजर आता है, उस समाज से सुरक्षा की उम्मीद करना बेमानी है। #धिक्कार है ऐसी #आधुनिकता पर जहाँ इंसान मर रहा हो और इंसानियत वायरल होने का इंतज़ार कर रही हो।
आज #सवाल उस हत्यारे से भी बड़ा हम सब पर है— क्या हम वाकई #ज़िंदा हैं?