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27/03/2026
Dhurandhar- The Propaganda of BJP
25/03/2026

Dhurandhar- The Propaganda of BJP

23/03/2026

अगर बिहारियों ने चुनाव का खेल खत्म कर लिया हो तो अब बारी है अपने आत्मसम्मान की।

15/03/2026

**किसी भी नशे की लत कैसे लगती है?**

जब इंसान नशा लेना शुरू करता है तो पहले तो एक जिज्ञासा होती है उसे महसूस करने की, फिर थोड़ा अच्छा लगता है। धीरे धीरे कभी कभी उस नशे को करके इंसान उसकी अनुभूति में खोने लगता है और यहीं से शुरू होता है शौख और आदत का अंतर। इंसान का शौख इतना बढ़ जाता है कि वो रोज़ मर्रा की जिंदगी में आदत बन जाती है।

हमारा समाज ऐसे लोगों को नशेड़ी का नाम देती है, उससे गाड़ी नजर से देखते है। यहाँ तक की उसके परिवार से भी कोई नहीं जुड़ना चाहता है। धीरे धीरे पूरा समाज उस परिवार को अकेला छोड़ देता है। उनके बारे में समाज बातें बनाने लगते है कि बिगड़ा हुआ लड़का है, परिवार वालों ने ध्यान नहीं दिया, मनोबल और बढ़ के चोर दिया जिसका परिणाम ये है कि मोहल्ले में गाली गलौज करते रहता है।

पहले लोग इज्जत-प्रतिष्ठा, मान-मर्यादा, और बेईमानी-ईमानदारी की बात करते थे। आज का समाज बेईमानी में इतना लिप्त हो चुका है कि कौन कितना ज्यादा बेईमान हैं और कौन कितना कम बेईमान, उसकी चर्चा करता है।

जब राजनेता आते है और अपने प्रचार प्रसार के लिए पैसे बांटते हैं, तो समाज में चर्चा उसे अस्वीकार करने की नहीं होती है। लोग अपने आप को समझदार और ज्यादा दिमाग वाला समझ के कहते हैं, हमारा टैक्स का पैसा ही तो था हमने ले लिया।

ईमानदारी और बुद्धिमानी में बहुत फर्क है। ईमानदार इंसान बुद्धिमान हो भी सकता है और नहीं भी, उसी प्रकार एक बुद्धिमान इंसान जरूरी नहीं कि ईमानदार ही हो। पर समाज में इसकी चर्चा इस बात से नहीं होती है कि सही हैं या गलत। समाज में जल्दी की होर मची है कि, दूसरे व्यक्ति ने पैसे ले के घर में नहीं टीवी ली, कार लिया तो हम कब से लेंगे।

यही परिवर्तन है आज के समाज का ओर यही कारण है राजनेता समझ चुके है कि हम लालची हो चुके है। ये अफीम के नशे की लत जैसी लग चुकी है। अब समाज इसी अवस्था में आगे बढ़ेगा। लोगों को सोचने की जरूरत है तो बुनियादी बातों की, क्या हम ईमानदार है या बेईमान है। बुद्धिमान तो आप बढ़ लिख के बन सकते है लेकिन ईमानदारी एक नीब है जिसको बहुत ही मजबूती से मकान के बनावट के शुरुआत में रखनी होती है, जिसे बाद में सही नहीं किया जा सकता है।

वैसे तो आज के समाज में इन बातों को पढ़ने ओर समझने के लिए बहुत कम लोग है, पर फिर भी दिल में आया तो सोचा कुछ लोग तो जरूर बचे होंगे जिन्हें ये पसंद आयेगा या फिर कुछ ऐसे लोग भी होंगे जिन्हें ये झकझोर देगा !

©अभिषेक_रॉय

12/03/2026

चलो लापता हो जाते है।

पहले बिहार से बिहारियों का पलायन होता था.अब तो मुख्यमंत्री का ही पलायन हो गया है 😂😂
09/03/2026

पहले बिहार से बिहारियों का पलायन होता था.
अब तो मुख्यमंत्री का ही पलायन हो गया है 😂😂

01/03/2026

इस बार की होली में भी बिहार के लाखों युवा अपने घर-गांव का मालपुआ नहीं खा पाएंगे, जन सुराज का संकल्प इन्हीं युवाओं के घर वापसी की लड़ाई है।

28/02/2026

नेता जी के बेटे राज्यसभा जाएंगे या नहीं ऐसी खबरें बहुत हुईं, अब बात बिहार के उन युवाओं की हो जो 10-12 हज़ार की मजदूरी के लिए दूसरे प्रदेशों में जा रहे हैं।

मजबुरी का नाम नही...मजबुती का नाम है महात्मा गांधी !!
31/01/2026

मजबुरी का नाम नही...मजबुती का नाम है महात्मा गांधी !!

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