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14/09/2025
 ी_को  #विश्व_आदिवासी_दिवस_की  #हार्दिक_बधाई_और_ढेर_सारी_शुभकामनाएं !!अपणी संस्कृति !     अपणा अभिमान !!                ...
09/08/2020

ी_को #विश्व_आदिवासी_दिवस_की #हार्दिक_बधाई_और_ढेर_सारी_शुभकामनाएं !!

अपणी संस्कृति ! अपणा अभिमान !! मैं आदिवासी! मेरा स्वाभिमान !!
ोहार !!

16/07/2020

देखा तो! वे शख्स भी मेरे दुश्मनो में थे,,,
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नाम जिसका शामिल मेरी धड़कनों में था !!

16/07/2020

शराफत का जमाना ही नहीं रहा,,,,
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किसी को इज्ज़त दो तो वो कमज़ोर समझने लगते हैं !!

10/05/2020

#माँ_के_लिये_क्या_लिखूं_दोस्तों
#माँ_ने_तो_मुझे_खुद_लिखा_है!!

💟 ’s 💟

10/05/2020

#बीते_दिनों_की_यादें👇

#स्कूल_में, पांचवीं तक #स्लेट_को_जीभ_से_चाटकर उससे #अक्षरों_को_मिटाना, द्वितीय फलस्वरूप शरीर मे #कैल्शियम_को_बढ़ाना हमारी स्थाई ी लेकिन इसमें #पापबोध_भी_था कि कहीं #विद्यामाता_नाराज_न_हो_जायें ।

#पढ़ाई_का_तनाव हमने #पेन्सिल का पिछला हिस्सा #चबाकर_मिटाया था ।

" #पुस्तक_के_बीच_विद्या , #पौधे_की=पत्ती और #मोरपंख #रखने_से हम #होशियार_हो_जाएंगे ऐसा #हमारा दृढ #विश्वास_था"।

#कपड़े_के_थैले_में_किताब कॉपियां #जमाने_का_विन्यास हमारा #रचनात्मक_कौशल_था ।

ाल जब ्षा के बस्ते बंधते तब #कॉपी_किताबों िल्द_चढ़ाना हमारे जीवन का #वार्षिक_उत्सव_था ।*

#माता_पिता_को हमारी #पढ़ाई_की #कोई_फ़िक्र_नहीं_थी , #न हमारी #पढ़ाई उनकी जेब पर #बोझा_थी ।
सालों साल बीत जाते पर #माता_पिता_के_कदम हमारे #स्कूल_में_नही_पड़ते_थे ।

एक दोस्त को साईकिल के डंडे पर और दूसरे को पीछे कैरियर पर बिठा हमने कितने रास्ते नापें हैं ।

स्कूल में पिटते हुए और मुर्गा बनते हमारा ईगो हमें कभी परेशान नहीं करता था , दरअसल हम जानते ही नही थे कि ईगो होता क्या है ?

पिटाई हमारे दैनिक जीवन की सहज सामान्य प्रक्रिया थी ,
"पीटने वाला और पिटने
वाला दोनो खुश थे" ,
पिटने वाला इसलिए कि कम पिटे , पीटने वाला इसलिए खुश कि हाथ साफ़ हुवा।

हम अपने माता पिता को कभी नहीं बता पाए कि हम उन्हें कितना प्यार करते हैं,क्योंकि हमें "आई लव यू" कहना नहीं आता था ।

आज हम गिरते - सम्भलते , संघर्ष करते दुनियां का हिस्सा बन चुके हैं , कुछ मंजिल पा गये हैं तो कुछ न जाने कहां खो गए हैं ।

हम दुनिया में कहीं भी हों लेकिन यह सच है , हमे हकीकतों ने पाला है , हम सच की दुनियां में थे ।

कपड़ों को सिलवटों से बचाए रखना और रिश्तों को औपचारिकता से बनाए रखना हमें कभी नहीं आया इस मामले में हम सदा मूर्ख ही रहे ।

अपना अपना प्रारब्ध झेलते हुए हम आज भी ख्वाब बुन रहे हैं , शायद ख्वाब बुनना ही हमें जिन्दा रखे है, वरना जो जीवन हम जीकर आये हैं उसके सामने यह वर्तमान कुछ भी नहीं ।

हम अच्छे थे या बुरे थे पर हम एक साथ थे, काश वो समय फिर लौट आए ।

हम सबका दिन शुभ हो,

🌹हँसते रहिये हंसाते रहिये🌹

🙏 घर पर रहे स्वस्थ रहे।। 🙏

AP Meena Def

 #मतलब जब तक इसका  #परमानेंट_सोलुशन नही मिल जाता, तब तक यह बेहद ही  #चिंता का विषय है। #अतः  #लॉक_डाउन का  #सख्ती से पाल...
23/04/2020

#मतलब जब तक इसका #परमानेंट_सोलुशन नही मिल जाता, तब तक यह बेहद ही #चिंता का विषय है।

#अतः #लॉक_डाउन का #सख्ती से पालन करें, अपने #घर पर #सुरक्षित_रहे ।

जरा, उन  #फौजी_भाइयो के  #बारे_में_भी_सोचो, जो उनसे दूर उनके  #बच्चों परिवार की  #चिंता को मन मे लिए हुए,  #बॉर्डर पर  #...
11/04/2020

जरा, उन #फौजी_भाइयो के #बारे_में_भी_सोचो, जो उनसे दूर उनके #बच्चों परिवार की #चिंता को मन मे लिए हुए, #बॉर्डर पर #दुश्मनों_और_कोरोना से लड़ रहे है और #उनका_परिवार #बिना_मुखिया के भी #लॉक_डाउन के पालन के साथ परिस्थितियों में घर #परिवार भी चला रहे है ।। िंद

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