21/04/2026
श्री कृष्ण के जन्म की कहानी बहुत ही अद्भुत और प्रेरणादायक है। यहाँ सरल हिंदी शब्दों में उनकी कहानी दी गई है:
# # # **कथा का प्रारंभ: कंस का अत्याचार**
प्राचीन काल में मथुरा नगरी में **उग्रसेन** नाम के राजा राज करते थे। उनका पुत्र **कंस** बहुत ही क्रूर और अत्याचारी था। उसने अपने पिता को जेल में डाल दिया और खुद राजा बन गया। कंस अपनी बहन **देवकी** से बहुत प्यार करता था।
# # # **आकाशवाणी और डर**
जब देवकी का विवाह **वासुदेव** के साथ हुआ, तो कंस खुद रथ चलाकर उन्हें विदा करने जा रहा था। तभी अचानक एक आकाशवाणी हुई:
> *"हे कंस! जिसे तू इतने प्रेम से विदा कर रहा है, उसी देवकी की आठवीं संतान तेरा वध करेगी।"*
>
यह सुनकर कंस डर गया और उसने अपनी बहन देवकी और वासुदेव को कारागार (जेल) में डाल दिया।
# # # **कारागार में जन्म**
कंस ने देवकी की पहली छह संतानों को एक-एक करके मार डाला। सातवें बालक (बलराम जी) को भगवान ने योगमाया की मदद से रोहिणी के गर्भ में सुरक्षित पहुँचा दिया।
फिर वह समय आया जब भगवान विष्णु स्वयं पृथ्वी पर अवतार लेने वाले थे। भाद्रपद मास की **अष्टमी तिथि**, रोहिणी नक्षत्र और आधी रात का समय था। चारों ओर घनघोर बारिश हो रही थी। तभी जेल की कोठरी में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ।
# # # **नंद गाँव की यात्रा**
जैसे ही कृष्ण का जन्म हुआ, जेल के पहरेदार गहरी नींद में सो गए और जेल के दरवाजे अपने आप खुल गए। वासुदेव जी ने नन्हे कृष्ण को एक टोकरी में रखा और उन्हें गोकुल पहुँचाने के लिए निकल पड़े।
रास्ते में उफनती हुई **यमुना नदी** थी। जब वासुदेव जी नदी पार कर रहे थे, तो शेषनाग ने बारिश से बचाने के लिए उन पर छाता तान दिया। यमुना ने भगवान के चरणों को स्पर्श किया और रास्ता दे दिया।
# # # **गोकुल में उत्सव**
वासुदेव जी गोकुल पहुँचे और कृष्ण को अपने मित्र **नंद बाबा** के यहाँ छोड़ दिया। वहाँ यशोदा माता ने एक पुत्री (योगमाया) को जन्म दिया था, वासुदेव जी उस पुत्री को लेकर वापस जेल आ गए।
अगले दिन जब कंस को पता चला कि आठवीं संतान पैदा हुई है, तो वह उसे मारने दौड़ा। जैसे ही उसने कन्या को मारना चाहा, वह हाथ से छूटकर आकाश में चली गई और बोली— **"तुझे मारने वाला गोकुल में जन्म ले चुका है।"**
इस प्रकार, भगवान श्री कृष्ण ने धरती पर पाप का अंत करने के लिए जन्म लिया। गोकुल में उनके जन्म की खुशी में बड़ा उत्सव मनाया गया, जिसे हम आज भी **जन्माष्टमी** के रूप में मनाते हैं।