Pankaj tripathi fans

Pankaj tripathi fans "जो प्राप्त है वो पर्याप्त है”
"मानव सेवा ही मेरा धर्म है"
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IG पद से रिटायरमेंट! फिर भी अपना मकान नहीं, किराए का घर ढूंढ रहे IPS किशन सहाय...........!🙏🙏~ ऐसी सादगी, धैर्यवान, सहनशी...
01/08/2026

IG पद से रिटायरमेंट! फिर भी अपना मकान नहीं, किराए का घर ढूंढ रहे IPS किशन सहाय...........!🙏
🙏~ ऐसी सादगी, धैर्यवान, सहनशील, चरित्रवान और ईमानदारी को दिल से सलाम!"
आप आज के नये दौर मे युवा शक्ति के प्रेरणास्रोत है .
जयपुर.
ईश्वर आपके हौंसले को बरकरार रखें.🙏
🕉कहीं आप राजेश सहाय ,एस.पी. लोकायुक्त,इंदौर के मार्ग दर्शक तो नहीं??🕉

30/07/2026
05/07/2026

🗣️ "जो सच बोलता है, वो सबका नहीं होता,
और जो सबका होता है, वो सच नहीं बोलता।" 💯✨

05/07/2026

💰 चंद सिक्कों की #मजबूरी ही है, जो खुद का बच्चा रोता छोड़ के, 🤱 एक माँ अपने मालकिन के बच्चों को रोज खिलाने जाती है..!!

"जिन लड़कियों ने टपकती छतों के बावजूद अपने पतियों का साथ नहीं छोड़ा, आज वही हमारी माँएँ हैयह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि प...
05/07/2026

"जिन लड़कियों ने टपकती छतों के बावजूद अपने पतियों का साथ नहीं छोड़ा, आज वही हमारी माँएँ है
यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि पूरी एक पीढ़ी की कहानी है।
एक समय था जब घर की छत बारिश में टपकती थी, दीवारों में दरारें होती थीं, बिजली घंटों गायब रहती थी, लेकिन फिर भी घर नहीं टूटते थे। महिलाएँ अपने पतियों के साथ भूख और अभाव भी सह लेती थीं, पर उनका हाथ नहीं छोड़ती थीं। वे जानती थीं कि गरीबी कोई अपराध नहीं, बल्कि बेवफाई अपराध है। वे अपने पति के साथ मिलकर परिस्थितियों से लड़ती थीं, पति से नहीं।
आज वही महिलाएँ सफेद बालों के साथ हमारी माँएँ और दादियाँ हैं। उनके चेहरों पर झुर्रियाँ ज़रूर हैं, लेकिन उनके ज़मीर पर कोई बोझ नहीं। क्योंकि उन्होंने अपने रिश्ते को वफ़ादारी और समर्पण से निभाया।
लेकिन आज का समय बदल चुका है।
आज बहुत-से रिश्ते प्रेम से पहले सुविधाओं को देखते हैं। कुछ लोग विवाह को जीवन का साथ नहीं, बल्कि एक समझौता मानते हैं, जहाँ ज़रा-सी कठिनाई आते ही साथ छोड़ देना आसान लगता है। सोशल मीडिया ने लोगों को दूसरों की चमकती हुई ज़िंदगी तो दिखाई, लेकिन उनके संघर्ष और दुख नहीं दिखाए। नतीजा यह हुआ कि लोग अपनी ज़िंदगी की तुलना दूसरों की दिखावटी दुनिया से करने लगे।
यह भी सच है कि हर रिश्ता एक जैसा नहीं होता। यदि किसी रिश्ते में अत्याचार, हिंसा, नशे की लत, या जान और सम्मान को खतरा हो, तो वहाँ चुप रहना वफ़ादारी नहीं, बल्कि स्वयं पर अत्याचार हो सकता है। लेकिन जहाँ केवल गरीबी, कठिन परिस्थितियाँ और समय की परीक्षा हो, वहाँ साथ निभाना ही सच्चे प्रेम की पहचान बनता है।
आज भी ऐसे असंख्य दंपति हैं जो कठिन हालात में एक-दूसरे का हाथ थामे हुए हैं, और यही रिश्ते समय के साथ और अधिक मज़बूत होते जाते हैं।
घर केवल ईंट-पत्थरों से नहीं, बल्कि धैर्य और विश्वास से बनते हैं। रिश्ते केवल पैसों से नहीं, बल्कि भरोसे से चलते हैं। और जो लोग कठिन समय में एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ते, समय भी उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता।
अंत में एक प्रश्न… क्या सचमुच ज़माना बदल गया है, या हमने रिश्तों की कद्र करना छोड़ दिया है?

04/07/2026

🏏 वैभव सूर्यवंशी... आत्मविश्वास या अतिआत्मविश्वास? 🤔

✅ एक नज़रिया
इंग्लैंड जैसे मजबूत गेंदबाज़ी आक्रमण के सामने क्रीज़ छोड़कर खेलने का साहस वैभव सूर्यवंशी के आत्मविश्वास को दिखाता है। आज रन नहीं बने, लेकिन यही निडर सोच और बढ़ता अनुभव उन्हें भविष्य का बड़ा खिलाड़ी बना सकता है।

⚠️ दूसरा नज़रिया
इंग्लैंड जैसे अनुभवी गेंदबाज़ों के सामने बार-बार क्रीज़ छोड़कर खेलना अभी अतिआत्मविश्वास भी माना जा सकता है। प्रतिभा पर कोई सवाल नहीं, लेकिन बड़े स्तर पर सफलता के लिए धैर्य, मैच की समझ और अनुभव की अभी जरूरत है।

आगे आप समझें...
आपको कौन-सा नज़रिया ज़्यादा सही लगता है?

04/07/2026

"जिन लड़कियों ने टपकती छतों के बावजूद अपने पतियों का साथ नहीं छोड़ा, आज वही हमारी माँएँ है
यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि पूरी एक पीढ़ी की कहानी है।
एक समय था जब घर की छत बारिश में टपकती थी, दीवारों में दरारें होती थीं, बिजली घंटों गायब रहती थी, लेकिन फिर भी घर नहीं टूटते थे। महिलाएँ अपने पतियों के साथ भूख और अभाव भी सह लेती थीं, पर उनका हाथ नहीं छोड़ती थीं। वे जानती थीं कि गरीबी कोई अपराध नहीं, बल्कि बेवफाई अपराध है। वे अपने पति के साथ मिलकर परिस्थितियों से लड़ती थीं, पति से नहीं।
आज वही महिलाएँ सफेद बालों के साथ हमारी माँएँ और दादियाँ हैं। उनके चेहरों पर झुर्रियाँ ज़रूर हैं, लेकिन उनके ज़मीर पर कोई बोझ नहीं। क्योंकि उन्होंने अपने रिश्ते को वफ़ादारी और समर्पण से निभाया।
लेकिन आज का समय बदल चुका है।
आज बहुत-से रिश्ते प्रेम से पहले सुविधाओं को देखते हैं। कुछ लोग विवाह को जीवन का साथ नहीं, बल्कि एक समझौता मानते हैं, जहाँ ज़रा-सी कठिनाई आते ही साथ छोड़ देना आसान लगता है। सोशल मीडिया ने लोगों को दूसरों की चमकती हुई ज़िंदगी तो दिखाई, लेकिन उनके संघर्ष और दुख नहीं दिखाए। नतीजा यह हुआ कि लोग अपनी ज़िंदगी की तुलना दूसरों की दिखावटी दुनिया से करने लगे।
यह भी सच है कि हर रिश्ता एक जैसा नहीं होता। यदि किसी रिश्ते में अत्याचार, हिंसा, नशे की लत, या जान और सम्मान को खतरा हो, तो वहाँ चुप रहना वफ़ादारी नहीं, बल्कि स्वयं पर अत्याचार हो सकता है। लेकिन जहाँ केवल गरीबी, कठिन परिस्थितियाँ और समय की परीक्षा हो, वहाँ साथ निभाना ही सच्चे प्रेम की पहचान बनता है।
आज भी ऐसे असंख्य दंपति हैं जो कठिन हालात में एक-दूसरे का हाथ थामे हुए हैं, और यही रिश्ते समय के साथ और अधिक मज़बूत होते जाते हैं।
घर केवल ईंट-पत्थरों से नहीं, बल्कि धैर्य और विश्वास से बनते हैं। रिश्ते केवल पैसों से नहीं, बल्कि भरोसे से चलते हैं। और जो लोग कठिन समय में एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ते, समय भी उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता।
अंत में एक प्रश्न… क्या सचमुच ज़माना बदल गया है, या हमने रिश्तों की कद्र करना छोड़ दिया है?

28/06/2026

💁🏻‍♂️*हर बूंद... पोलियो से सुरक्षा का मजबूत कवच*

आज 28 जून को राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के तहत 0 से 5 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को पोलियो की दो बूंदें अवश्य पिलाएं।

याद रखें, एक भी बच्चा छूटना नहीं चाहिए। आइए, मिलकर अपने जिले और देश को हमेशा के लिए पोलियो मुक्त बनाए रखें।

आज 28 जून को सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक निकटतम पोलियो बूथ पर पहुंचें।

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