18/02/2026
आज के दौर में मोबाइल और सोशल मीडिया हमारी ज़िंदगी का हिस्सा हैं। अभिनेता सोनू सूद ने सुझाव दिया है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन होना चाहिए। यह इसलिए क्योंकि सोशल मीडिया बच्चों को मानसिक रूप से कमजोर बना देता है, तुलना, साइबर बुलिंग और गलत कंटेंट उनके दिमाग पर गहरा असर डालती है। 16 साल से पहले का समय सीखने और खुद को पहचानने का होता है, जिसे सोशल मीडिया की जल्दबाज़ी छीन लेती है। माता-पिता और समाज की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखें और इस मुद्दे पर गंभीरता से सोचें।.......!👇👇👇👇👇👇👇👇
आज के दौर में मोबाइल और सोशल मीडिया हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन सवाल ये है कि क्या हर उम्र के लिए इसकी आज़ादी सही है?
हाल ही में अभिनेता Sonu Sood ने सुझाव दिया कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन होना चाहिए। यह बात सुनने में भले सख़्त लगे, लेकिन इसके पीछे की सोच पर ध्यान देना ज़रूरी है।
आज के बच्चे बहुत कम उम्र में स्क्रीन की दुनिया में खो जाते हैं। पढ़ाई, खेल, परिवार और असली रिश्तों की जगह लाइक्स, रील्स और फॉलोअर्स ले लेते हैं। सोशल मीडिया बच्चों को जल्दी बड़ा तो बना देता है, लेकिन मानसिक रूप से कमजोर भी कर देता है। तुलना, साइबर बुलिंग, गलत कंटेंट और फेक लाइफस्टाइल बच्चों के दिमाग पर गहरा असर डालती है।
16 साल से पहले का समय सीखने, समझने और खुद को पहचानने का होता है। इस उम्र में अगर बच्चों को सही मार्गदर्शन मिले, तो वे मजबूत इंसान बनते हैं। सोशल मीडिया की जल्दबाज़ी उन्हें वह समय नहीं देती।
यह बैन बच्चों को सज़ा देने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखने के लिए है। जैसे हर चीज़ की एक उम्र होती है, वैसे ही डिजिटल आज़ादी की भी होनी चाहिए।
यह जिम्मेदारी सिर्फ सरकार या सेलेब्रिटी की नहीं, बल्कि माता-पिता और समाज की भी है।
अगर हम सच में बच्चों का भविष्य सुरक्षित देखना चाहते हैं, तो इस मुद्दे पर गंभीरता से सोचना होगा।