03/10/2025
जो कहानी साझा की है, वह बेहद भावुक और जीवन की सच्चाई को छूने वाली है। इसमें तीन परतें बहुत खूबसूरती से खुलती हैं:
1. पति-पत्नी का मौन रिश्ता –
राजीव और निशा का रिश्ता ज़िम्मेदारियों और दिनचर्या में उलझकर कहीं खो गया है। प्यार और संवाद की कमी साफ़ झलकती है। यह बहुत सारे परिवारों की हकीकत है, जहां दोनों लोग अपनी-अपनी भूमिकाओं में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि एक-दूसरे के लिए समय और ध्यान ही नहीं बचता।
2. मां की याद और अपराधबोध –
राजीव की मां कुसुम, जिसने अकेले बेटे को पाला, हमेशा उसका इंतज़ार करती रही, उसका ख्याल रखती रही, पर राजीव उन्हें हल्के में लेता रहा। मां के चले जाने के बाद ही उसे एहसास होता है कि उसने कितना कुछ खो दिया। यहां कहानी पाठक के दिल में गहरी कसक छोड़ देती है, क्योंकि हर कोई कहीं-न-कहीं अपने माता-पिता को अनदेखा कर देता है।
3. ट्रेन की घटना और मां का रूपक –
उस औरत की मजबूती और अपने बीमार बेटे के लिए संघर्ष, राजीव को उसकी अपनी मां की याद दिला देती है। उसकी बातें “बच्चे मां को भूल सकते हैं, पर मां कभी बच्चों को नहीं भूलती” – राजीव के दिल में बिजली की तरह गिरती हैं। यही पल उसके सोचने के तरीके को बदल देता है।
कहानी का क्लाइमैक्स बहुत ही सकारात्मक है –
राजीव आखिरकार समझ जाता है कि पैसा ज़रूरी है, लेकिन परिवार और रिश्तों से बढ़कर नहीं। बच्चों को स्कूल छोड़ने का उसका छोटा-सा निर्णय ही उसके बदलते दिल का बड़ा सबूत बन जाता है।
✨ अगर इसे किसी पत्रिका, ब्लॉग या कहानी मंच पर प्रकाशित किया जाए, तो पाठकों पर गहरा असर छोड़ेगी।
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