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 #सतनासंदीप जैन, अशोक अग्रवाल, मनोहर डिगवानी सतीश सुखेजाइन्ही 4 में कोई एक बनेगा विंध्य चैंबर ऑफ़ कॉमर्स का अध्यक्ष ?पर ...
04/06/2026

#सतना
संदीप जैन, अशोक अग्रवाल, मनोहर डिगवानी सतीश सुखेजा
इन्ही 4 में कोई एक बनेगा विंध्य चैंबर ऑफ़ कॉमर्स का अध्यक्ष ?

पर सवाल ये है,.....
• इनमें कौन है जिसने व्यापारियों के हित की आवाज बुलंद की ?
• कौन है जो व्यपारियों की समस्याओं और कष्ट पर खड़ा रहा ?
• किसने बाजार के गड्ढे, सड़क, यातायात पर भी बोला है ?

अध्यक्ष का चुनाव की केवल पद के लिए नहीं
बल्कि व्यापारियों की प्रतिनिधित्व के लिए होना चाहिए

सतना | विंध्य न्यूज़विंध्य चैंबर चुनाव को लेकर व्यापारी सम्मान बैठक सम्पन्नविंध्य चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के आगा...
22/05/2026

सतना | विंध्य न्यूज़

विंध्य चैंबर चुनाव को लेकर व्यापारी सम्मान बैठक सम्पन्न

विंध्य चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के आगामी चुनाव को लेकर शनिवार को एक भव्य व्यापारी सम्मान बैठक आयोजित की गई, जिसमें सैकड़ों व्यापारियों एवं वरिष्ठजनों ने सहभागिता की।

बैठक में व्यापारिक एकता, संगठन की मजबूती एवं आगामी चुनाव की रणनीति को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। इस अवसर पर उपस्थित व्यापारियों ने अशोक अग्रवाल एवं उनके साथियों को अपना समर्थन और विश्वास व्यक्त किया।

अशोक अग्रवाल ने सभी व्यापारियों एवं वरिष्ठजनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल शुरुआत है और शीघ्र ही अन्य साथियों एवं व्यापारिक मित्रों से भी आत्मीय संवाद किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि व्यापारियों का प्रेम, सहयोग और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

— विंध्य न्यूज़, सतना

वैश्य समाज की बुलंद आवाज, अग्रवाल समाज के यशस्वी जिला अध्यक्ष, आदरणीय Ashok Agrawal जी को आगामी Vindhya Chamber of Comme...
21/05/2026

वैश्य समाज की बुलंद आवाज, अग्रवाल समाज के यशस्वी जिला अध्यक्ष, आदरणीय Ashok Agrawal जी को आगामी Vindhya Chamber of Commerce and Industries के अध्यक्ष पद हेतु उम्मीदवार बनने पर हार्दिक शुभकामनाएं।

आप सभी सम्मानित सदस्यों एवं मतदाताओं से विनम्र आग्रह है कि अपने बहुमूल्य मत एवं समर्थन देकर उन्हें भारी मतों से विजयी बनाएं, ताकि व्यापारियों, वैश्य समाज एवं अग्रवाल समाज की आवाज़ और अधिक मजबूती से बुलंद हो सके।

“अनुभव, नेतृत्व और समाजसेवा का नाम —
आदरणीय अशोक अग्रवाल जी को दें अपना अमूल्य समर्थन।”

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10/05/2026

Tamil Nadu ki takhti per talapati Vijay Ne liya mukhymantri pad ki Shapath

परवान चढ़ा डिप्टी जेलर ने माफ़ी शुदा कैदी का प्रेम  शादि में पिता और भाई की जगह बजरंगियों ने निभाई रश्मेंसतना। केन्द्रीय...
07/05/2026

परवान चढ़ा डिप्टी जेलर ने माफ़ी शुदा कैदी का प्रेम शादि में पिता और भाई की जगह बजरंगियों ने निभाई रश्में

सतना। केन्द्रीय जेल सतना की ऊंची दीवारें और भीतर की सलाखें आमतौर पर सिर्फ अपराध, सजा और पछतावे की कहानियाँ सुनाती हैं। लेकिन हाल के दिनों में इसी जेल ने एक ऐसी प्रेम कहानी को जन्म दिया है, जिसने समाज की परंपरागत सोच और धार्मिक बंदिशों को चुनौती दी है। यह कहानी है डिप्टी जेलर फिरोजा खातून और पूर्व सजायाफ्ता कैदी धर्मेन्द्र सिंह की, जिन्होंने 5 मई 2025 को छतरपुर में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कर एक मिसाल पेश की।

जेल की नौकरी और वारंट शाखा का साथ
-Jail Duty and the Warrant Branch Association

कहानी सालों पुरानी है,जब वर्ष 2007 में छतरपुर जिले के चंदला में नगर परिषद उपाध्यक्ष कृष्णदत्त दीक्षित की हत्या कर दी गई थी। पुलिस जांच में स्थानीय युवक धर्मेन्द्र सिंह हत्यारोपी पाया गया और अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सजा काटने के लिए धर्मेन्द्र को सतना केन्द्रीय जेल भेजा गया। यहाँ उसने बेहद अच्छा आचरण दिखाया, जिसके चलते जेल प्रशासन ने उसे वारंट शाखा में सहायक के रूप में तैनात कर दिया। उसका काम कैदियों के आने-जाने के दस्तावेज संभालना था। इसी शाखा में डिप्टी जेलर के पद पर तैनात हुईं रीवा जिले की मूल निवासी फिरोजा खातून। एक पटवारी रहते हुए पीएससी परीक्षा पास कर वह डिप्टी जेलर बनीं थीं। वारंट शाखा के प्रभारी के रूप में उनका दैनिक सामना धर्मेन्द्र से होने लगा। शुरू में व्यावसायिक बातचीत, फिर धीरे-धीरे यह बातें अपनत्व और फिर प्रेम में बदल गईं। यह रिश्ता जेल के भीतर ही परवान चढ़ा, लेकिन किसी की नजर में नहीं आया।

रिहाई के बाद भी नहीं टूटा साथ
-The Bond Didn't Break After Release

अपने बेहतर आचरण और सेवा भाव के कारण धर्मेन्द्र सिंह को जेल प्रबंधन ने समय से पहले रिहा कर दिया। लगभग 18 साल जेल की चहारदीवारी में बिताने के बाद वह बाहर आया, लेकिन वह फिरोजा से मिलने नियमित रूप से सतना आने लगा। तीन साल से अधिक समय तक यह सिलसिला चुपके-चुपके चलता रहा, जब तक कि दोनों ने स्थायी रूप से एक साथ रहने का फैसला नहीं कर लिया।

नहीं बांध सकीं समाज, धर्म और परिवार की बाधाएँ
-Barriers of Society, Religion and Family

फिरोजा मुस्लिम हैं और धर्मेन्द्र हिंदू। दोनों अलग-अलग धर्मों में पले-बढ़े थे। धर्मेन्द्र के परिवार वाले इस विवाह के लिए राजी नहीं थे, तो फिरोजा के अपने परिवार ने भी इस रिश्ते से इनकार कर दिया। पर दोनों ने हार नहीं मानी। फिरोजा ने हिंदू रीति-रिवाज अपनाने शुरू कर दिए, तो धर्मेन्द्र ने अपनों को मनाने की कोशिशें तेज कर दीं। आखिरकार विवाह की तारीख तय हो गई – वह भी हिंदू परंपरा से। लेकिन एक बड़ी अड़चन थी: फिरोजा का कन्यादान कौन करेगा? उनके परिजन तो शादी में शामिल होने से भी इनकार कर चुके थे।

बजरंगियों ने निभाई पिता और भाई की भूमिका
-Bajrangis Played the Role of Father and Brother

यहीं पर एक अप्रत्याशित मोड़ आया। जेल के अंदर निर्माण कार्य का ठेका लेने वाले बजरंग दल के पदाधिकारी राजबहादुर से फिरोजा की पहचान हुई थी। फिरोजा ने उनसे अपनी समस्या साझा की। राजबहादुर ने बिना किसी हिचकिचाहट के कहा, “तुम्हारा कन्यादान मैं करूंगा, और मेरे साथी सचिन शुक्ला भाई का फर्ज निभाएंगे।” 5 मई को छतरपुर में हिंदू रीति-रिवाजों से दोनों का विवाह संपन्न हुआ। फिरोजा पूरे विधि-विधान से कुंवारी बनकर जयमाला रची, और राजबहादुर ने कन्यादान की रस्म अदा की। यह दृश्य आजादी और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बन गया।

निष्कर्ष-Conclusion :- प्रेम की कोई दीवार नहीं होती-यह सिद्ध कर दिखाया है डिप्टी जेलर फिरोजा और पूर्व कैदी धर्मेन्द्र ने। जेल की सलाखें, ऊंची दीवारें, अलग धर्म, परिवार का विरोध और समाज की रूढ़ियां-सब कुछ उन्होंने अपने विश्वास और प्रेम के बल पर पार कर लिया। शायद इसीलिए यह कहानी महज़ एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और हिम्मत का दस्तावेज़ बन गई है। यह जेल की चहारदीवारी से निकलकर अब पूरे प्रदेश की चर्चा का विषय बनी हुई है। वैसे भी जहाँ प्रेम होता है, वहाँ सारी विधियाँ सार्थक हो जाती हैं।

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07/05/2026

उत्तरप्रदेशः गाजीपुर के बिरनो थाना क्षेत्र के बेठौरा जयरामपुर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां प्रिया विश्वकर्मा नाम की युवती, जो अपने प्रेमी अभिषेक कन्नौजिया के साथ घर से भागकर शादी कर चुकी थी, को ससुराल पहुंचने पर बुरा व्यवहार झेलना पड़ा। बताया जा रहा है कि प्रिया के परिवार ने पहले से उसकी शादी कहीं और तय कर रखी थी। इसी बीच वह अभिषेक के झांसे में आकर घर से निकल गई और अपने साथ शादी के लिए रखे गए लाखों रुपये के आभूषण और नकदी भी ले गई। बाद में दोनों ने शादी कर ली। लेकिन शादी के बाद जब प्रिया अपने पति के घर पहुंची, तो ससुराल पक्ष ने उसे स्वीकार नहीं किया। आरोप है कि उसके साथ मारपीट की गई और उसे घर से भगा दिया गया।

07/05/2026

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