12/06/2016
भोपाल त्रासदी पर अमेरिका को देना ही होगा जवाब
वाशिंगटन। ओबामा सरकार अब भोपाल गैस त्रासदी पर जवाब देने से नहीं बच सकती है। व्हाइट हाउस की वेबसाइट पर कार्रवाई को लेकर एक ऑनलाइन याचिका पर एक लाख से ज्यादा लोग दस्तखत कर चुके हैं। किसी याचिका को एक लाख की तय सीमा से ज्यादा लोगों का समर्थन मिलने पर अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए जवाब देना अनिवार्य हो जाता है।
याचिका में राष्ट्रपति बराक ओबामा से डाउ केमिकल को संरक्षण नहीं देने का आग्रह किया गया है। 12 जून तक इस पर कुल 1.02 लाख लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं। इस याचिका का शीर्षक है, "अंतरराष्ट्रीय कानून कायम किया जाए! भोपाल में कार्पोरेट अपराध को अंजाम देने वाली डाउ केमिकल को जवाबदेह ठहराने से संरक्षण देने का सिलसिला भी जल्द बंद किया जाए।" इसमें लिखा गया है, "अमेरिकी सरकार अंतरराष्ट्रीय कानून और समझौते के दायित्वों का पालन करे।
डाउ को नोटिस जारी कर कंपनी के प्रतिनिधियों को 13 जुलाई को भोपाल कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया जाए। भारत ने यूनियन कार्बाइड पर मानव हत्या का आरोप लगाया है, लेकिन कंपनी सुनवाई में शामिल होने से इन्कार करती रही। 2001 में डाउ केमिकल ने इस कंपनी को खरीद लिया था। अब डाउ भी अदालती कार्यवाही में शामिल नहीं हो रही है।" इसके मुताबिक भारत ने आपसी कानूनी सहयोग संधि के तहत डाउ को समन जारी करने को लेकर अमेरिकी विधि विभाग को चार बार नोटिस भेजा। विभाग या तो इसे नजरअंदाज करता रहा या फिर रोड़े अटकाए। यह वही कानून विभाग है, जिसने ब्रिटिश पेट्रोलियम कंपनी को तेल लीक मामले में चार अरब डॉलर का हर्जाना देने को मजबूर किया था।
दुनिया भर की बड़ी औद्योगिक दुर्घटनाओं में एक भोपाल गैस त्रासदी में 25 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। तीन दिसंबर, 1984 को तत्कालीन यूनियन कार्बाइड के प्लांट से मिथाइल आइसोसाइनेट के रिसाव से तकरीबन पांच लाख अन्य लोग प्रभावित हुए थे। इनमें से हजारों लोग स्थायी विकलांगता के शिकार हो गए हैं।
ओबामा सरकार अब भोपाल गैस त्रासदी पर जवाब देने से नहीं बच सकती है।