03/08/2026
शिपकी ला में आज भी सामान के बदले सामान, 1697 की परंपरा कायम; जानें इसके बारे में
पूह। आज दुनिया नकद से डिजिटल भुगतान तक पहुंच चुकी है, लेकिन भारत-चीन सीमा पर किन्नौर के शिपकी ला में सदियों पुरानी वस्तु विनिमय प्रणाली आज भी जारी है। छह साल बाद फिर शुरू हुए सीमा व्यापार में यहां न नकद चलता है, न ऑनलाइन भुगतान। 1697 में तिब्बत और बुशहर रियासत के बीच हुई संधि के अनुसार आज भी सामान के बदले सामान का लेनदेन होता है।शनिवार को शिपकी ला मार्ग, उत्तराखंड के लिपुलेख और सिक्किम के नाथू ला मार्ग से चीन के साथ कारोबार छह साल बाद शुरू हुआ। शिपकी ला मार्ग से होने वाला कारोबार अन्य दोनों मार्गों से अलग है। इस मार्ग से होने वाले कारोबार में आज भी वस्तुओं का आदान-प्रदान होता है। इस अनूठी परंपरा की नींव वर्ष 1697 में पड़ी थी, जब तिब्बत और तत्कालीन बुशहर रियासत के राजा केहरी सिंह के बीच विनियमित वस्तु विनिमय व्यापार संधि हुई। खास बात यह है कि यह समझौता किसी लिखित दस्तावेज के बजाय पारंपरिक लोक शपथ ‘गामग्या’ और आपसी विश्वास पर आधारित था।...
पूह। आज दुनिया नकद से डिजिटल भुगतान तक पहुंच चुकी है, लेकिन भारत-चीन सीमा पर किन्नौर के शिपकी ला में सदियों पुरानी व...