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06/09/2026

मंडी में अधिकारियों पर भड़कीं सांसद कंगना रनौत?

नेपाल बाढ़ के 9 दिन बाद त्रिशूली-3 ‘A’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से 2 मजदूर जिंदा निकाले गए हैं। शुक्रवार सुबह रेस्...
04/09/2026

नेपाल बाढ़ के 9 दिन बाद त्रिशूली-3 ‘A’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से 2 मजदूर जिंदा निकाले गए हैं। शुक्रवार सुबह रेस्क्यू टीम ने दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला।

बिलासपुर की वॉलीबॉल प्रतिभाओं के लिए बड़ा अवसर, धर्मशाला में लड़कियों के चयन परीक्षण 7 से 9 सितंबर तकबिलासपुर, 3 सितंबर।...
03/09/2026

बिलासपुर की वॉलीबॉल प्रतिभाओं के लिए बड़ा अवसर, धर्मशाला में लड़कियों के चयन परीक्षण 7 से 9 सितंबर तक

बिलासपुर, 3 सितंबर। बिलासपुर जिले की वॉलीबॉल प्रतिभाओं के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र, धर्मशाला में लड़कियों के लिए आवासीय आधार पर आयोजित होने वाले चयन परीक्षण में भाग लेने का अवसर है। चयन परीक्षण 7 से 9 सितंबर 2026 तक आयोजित किए जाएंगे।

इच्छुक एवं पात्र लड़कियां 7 सितंबर को प्रातः 9:00 बजे राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र, खेल परिसर, निकट क्रिकेट स्टेडियम, धर्मशाला, जिला काँगड़ा में पंजीकरण एवं रिपोर्टिंग कर सकती हैं। बिलासपुर जिले की वॉलीबॉल में रुचि रखने वाली एवं निर्धारित शारीरिक मानदंड पूरा करने वाली लड़कियों से इस अवसर का लाभ उठाने की अपील की गई है।

चयन परीक्षण के लिए जन्मतिथि एवं न्यूनतम ऊंचाई के मानदंड निर्धारित किए गए हैं। 1 जनवरी 2011 या इसके बाद जन्मी लड़कियों के लिए न्यूनतम ऊंचाई 172 सेंटीमीटर, 1 जनवरी 2010 या इसके बाद जन्मी लड़कियों के लिए 174 सेंटीमीटर, 1 जनवरी 2009 या इसके बाद जन्मी लड़कियों के लिए 176 सेंटीमीटर तथा 31 दिसंबर 2008 एवं उससे पहले जन्मी लड़कियों के लिए न्यूनतम ऊंचाई 180 सेंटीमीटर निर्धारित है।

राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में चयनित खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण, विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की सेवाएं, उत्कृष्ट खेल अवसंरचना एवं उपकरण, खेल किट, खेल विज्ञान विशेषज्ञों के माध्यम से वैज्ञानिक प्रशिक्षण सहायता, प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर, शैक्षणिक सहायता, निःशुल्क आवास एवं भोजन, चिकित्सा सुविधाएं तथा चिकित्सा बीमा सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिताओं के माध्यम से खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव प्राप्त करने का अवसर भी मिलेगा।

रिपोर्टिंग के समय प्रतिभागियों को मूल दस्तावेजों के साथ उनकी स्वप्रमाणित फोटो प्रतियां, प्रत्येक की दो प्रतियां, साथ लानी होंगी। इनमें जन्मतिथि प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, निर्धारित प्रदर्शन मानदंड के अनुसार खेल उपलब्धि प्रमाणपत्र, शैक्षणिक योग्यता प्रमाणपत्र तथा चार पासपोर्ट आकार के नवीनतम फोटो शामिल हैं।

महत्वपूर्ण है कि चयन परीक्षण में भाग लेने वाली लड़कियों के लिए परीक्षण अवधि के दौरान खान-पान एवं ठहरने की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।

अधिक जानकारी के लिए 9816107438, 8708553893 अथवा 01892-224807 पर संपर्क किया जा सकता है। अंतिम चयन भारतीय खेल प्राधिकरण के निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार समग्र योग्यता, उपलब्ध सीटों, आयु सत्यापन तथा अन्य निर्धारित मानदंडों के आधार पर किया जाएगा।

*इंटेंसिफाइड आईईसी कैंपेन-2026 के तहत ‘ब्रेकफ्री’ अभियान में बिलासपुर प्रदेश में अव्वल**एचआईवी जोखिम की जानकारी के लिए 3...
03/09/2026

*इंटेंसिफाइड आईईसी कैंपेन-2026 के तहत ‘ब्रेकफ्री’ अभियान में बिलासपुर प्रदेश में अव्वल*

*एचआईवी जोखिम की जानकारी के लिए 3,550 सेल्फ रिस्क असेसमेंट के साथ बिलासपुर प्रथम*

बिलासपुर, 3 सितंबर।

राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत इंटेंसिफाइड आईईसी कैंपेन-2026 के तहत युवाओं को एचआईवी संक्रमण के जोखिम के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा ‘ब्रेकफ्री’ अभियान बिलासपुर जिले में प्रभावी ढंग से संचालित किया जा रहा है। जिले में 34 रेड रिबन क्लबों के माध्यम से अभियान के तहत विभिन्न जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।

यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी शशि दत्त शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि अभियान की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस 12 अगस्त 2026 को हुई थी और यह 12 अक्टूबर 2026 तक दो माह तक जारी रहेगा। ‘ब्रेकफ्री’ अभियान के तहत युवाओं को क्यूआर कोड स्कैन कर ऑनलाइन प्रश्नावली में पूछे गए विभिन्न प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं। इन उत्तरों के आधार पर उनका सेल्फ रिस्क असेसमेंट किया जाता है, जिसके माध्यम से उन्हें अपने एचआईवी जोखिम स्तर की जानकारी मिलती है। आवश्यकता होने पर उन्हें आगे की जांच एवं स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में भी मार्गदर्शन दिया जाता है।

उन्होंने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं को एचआईवी संक्रमण के जोखिम को समझने, स्वयं अपने जोखिम का आकलन करने तथा आवश्यकता पड़ने पर समय पर एचआईवी जांच और उपचार के लिए प्रेरित करना है।

30 अगस्त 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बिलासपुर जिले में 3,550 सेल्फ रिस्क असेसमेंट किए जा चुके हैं, जो प्रदेश के सभी जिलों में सर्वाधिक हैं। इस उपलब्धि के साथ बिलासपुर प्रदेश में प्रथम स्थान पर है। मंडी जिला 2,057 सेल्फ रिस्क असेसमेंट के साथ दूसरे स्थान पर है। सोलन में 1,147, हमीरपुर में 973, शिमला में 802, ऊना में 598, कांगड़ा में 520, कुल्लू में 485, चंबा में 342, सिरमौर में 255 तथा किन्नौर में 188 सेल्फ रिस्क असेसमेंट दर्ज किए गए हैं, जबकि लाहौल एवं स्पीति में यह संख्या शून्य है। प्रदेश में अब तक कुल 10,917 सेल्फ रिस्क असेसमेंट दर्ज किए गए हैं।

प्रतिदिन के प्रदर्शन के आधार पर भी बिलासपुर प्रदेश में प्रथम स्थान पर है। जिले में प्रतिदिन औसतन 187 सेल्फ रिस्क असेसमेंट दर्ज किए गए हैं, जबकि मंडी में 108 और सोलन में 60 सेल्फ रिस्क असेसमेंट प्रतिदिन दर्ज किए गए हैं।

अभियान के अंतर्गत जिले के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में वाद-विवाद, नारा लेखन, रैलियों सहित अन्य जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को एचआईवी संक्रमण से बचाव, जोखिम की पहचान, जांच तथा समय पर उपचार के संबंध में आवश्यक एवं सही जानकारी उपलब्ध करवाई जा रही है।

जिला स्तर पर अभियान को प्रभावी बनाने के लिए रेड रिबन क्लबों के माध्यम से युवाओं की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। ‘ब्रेकफ्री’ सेल्फ रिस्क असेसमेंट के माध्यम से युवा अपने एचआईवी जोखिम की स्थिति को समझ सकते हैं तथा आवश्यकता के अनुसार आगे की जांच और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।

जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ने युवाओं से इंटेंसिफाइड आईईसी कैंपेन-2026 के तहत चलाए जा रहे ‘ब्रेकफ्री’ अभियान में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने तथा एचआईवी संक्रमण से बचाव एवं जागरूकता के प्रति सजग रहने की अपील की है।

*बॉक्स*

राज्य स्तर की उपलब्धि

इंटेंसिफाइड आईईसी कैंपेन-2026 के तहत चलाए जा रहे ‘ब्रेकफ्री’ अभियान में सेल्फ रिस्क असेसमेंट के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। प्रदेश की रैंकिंग पहले 7वें स्थान पर थी, जो अब सुधरकर 4वें स्थान पर पहुंच गई है। इस प्रकार हिमाचल प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी रैंकिंग में 3 स्थान का सुधार किया है।

02/09/2026

******प्रधानमंत्री मोदी की अपील *****


******प्रधानमंत्री मोदी की दूसरी बार अपील जरूरत न हो तो सोना न खरीदें।
01/09/2026

******प्रधानमंत्री मोदी की दूसरी बार अपील
जरूरत न हो तो सोना न खरीदें।

01/09/2026

विधानसभा में अपनी बात रखते हुए विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर

01/09/2026

मल्टी टास्क वर्करो के लिए बनाएगी पॉलिसी सरकार गंभीरता से कर रही है प्रयास —सुखविंदर सिंह सुक्खू

*डीसी बिलासपुर की महत्वाकांक्षी पहल मिशन दृष्टि बिलासपुर’ का विधिवत आगाज**जिले में 3 से 8 वर्ष के बच्चों की होगी आंखों क...
01/09/2026

*डीसी बिलासपुर की महत्वाकांक्षी पहल मिशन दृष्टि बिलासपुर’ का विधिवत आगाज*

*जिले में 3 से 8 वर्ष के बच्चों की होगी आंखों की होगी स्क्रीनिंग, समय पर मिलेगा उपचार*

*प्राथमिक पाठशाला रौड़ा में एडीसी रुपिंदर कौर ने किया अभियान का विधिवत शुभारंभ,पहले दिन 50 बच्चों की आंखों की जांच, 2 में मिला दृष्टि दोष*

बिलासपुर, 1 सितंबर: बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान और उचित उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार की महत्वाकांक्षी पहल ‘मिशन दृष्टि बिलासपुर’ का आज राजकीय प्राथमिक पाठशाला रौड़ा में विधिवत शुभारंभ किया गया। अतिरिक्त उपायुक्त बिलासपुर रुपिंदर कौर ने अभियान का शुभारंभ किया। अभियान के शुभारंभ अवसर पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने राजकीय प्राथमिक पाठशाला रौड़ा और संबंधित आंगनबाड़ी केंद्र के कुल 50 बच्चों की आंखों की जांच की गई। इनमें आंगनबाड़ी केंद्र के 12 बच्चों की स्क्रीनिंग में किसी भी बच्चे में दृष्टि संबंधी दोष नहीं पाया गया, जबकि प्राथमिक पाठशाला के 38 बच्चों की जांच में 2 बच्चों में दृष्टि संबंधी दोष सामने आए।

अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि कम उम्र में बच्चों की आंखों में होने वाली दृष्टि संबंधी समस्या की समय पर पहचान न होने से इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई, सीखने की क्षमता और समग्र विकास पर पड़ सकता है। छोटे बच्चे अक्सर अपनी दृष्टि संबंधी परेशानी को स्वयं पहचान या स्पष्ट रूप से बता नहीं पाते। ऐसे में नियमित स्क्रीनिंग के माध्यम से आंखों की समस्या का शुरुआती स्तर पर पता लगाना बेहद महत्वपूर्ण है। समय रहते समस्या की पहचान होने पर आवश्यक उपचार और चश्मे के माध्यम से बच्चे की दृष्टि को बेहतर किया जा सकता है।

अतिरिक्त उपायुक्त ने बताया कि ‘मिशन दृष्टि बिलासपुर’ के तहत 1 सितंबर 2026 से जिले के स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में 3 से 8 वर्ष के बच्चों की आंखों की स्क्रीनिंग की जाएगी। अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों की आंखों की समय पर जांच कर दृष्टि संबंधी कमियों की प्रारंभिक स्तर पर पहचान करना और आवश्यकता के अनुसार उन्हें उचित उपचार उपलब्ध करवाना है, ताकि आंखों की समस्या उनकी पढ़ाई और भविष्य में बाधा न बने।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी शशि दत्त शर्मा ने बताया कि
स्क्रीनिंग की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी। सबसे पहले बच्चों का स्नेलन चार्ट के माध्यम से विजन टेस्ट किया जाएगा। यदि प्रारंभिक जांच में दृष्टि संबंधी दोष पाया जाता है, तो बच्चे की आगे की जांच ऑटो-रिफ्रैक्टर मशीन के माध्यम से की जाएगी। इस उपकरण से बच्चे की आंखों में रिफ्रैक्टिव एरर तथा चश्मे के संभावित नंबर का आकलन किया जाएगा।

जिन बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्या पाई जाएगी, उन्हें आगे ऑप्थैल्मोलॉजिस्ट/आई स्पेशलिस्ट के पास भेजा जाएगा। विशेषज्ञ चिकित्सक की जांच के बाद यदि बच्चे को चश्मे की आवश्यकता होगी, तो चश्मे का नंबर निर्धारित किया जाएगा तथा आवश्यकतानुसार चश्मा उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की जाएगी।

अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीमों को इसमें शामिल किया गया है। जिले के प्रत्येक ब्लॉक में की टीमें कार्यरत हैं। कई ब्लॉकों में दो-दो टीमें हैं, जबकि नैना देवी ब्लॉक में एक टीम उपलब्ध है। ये टीमें स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग करेंगी।

अन्य बताया कि वर्तमान में विभाग के पास एक ऑटो-रिफ्रैक्टर मशीन उपलब्ध है। अभियान को जिलेभर में प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए प्रशासन द्वारा अतिरिक्त मशीनें उपलब्ध करवाने की प्रक्रिया शुरू की गई है और इनकी खरीद प्रक्रिया जारी है। अतिरिक्त मशीनें उपलब्ध होने के बाद प्रत्येक ब्लॉक को एक-एक मशीन उपलब्ध करवाने की योजना है।

जब तक सभी मशीनें उपलब्ध नहीं हो जातीं, तब तक उपलब्ध मशीन को 15-15 दिन की शिफ्ट के आधार पर विभिन्न ब्लॉकों में भेजकर स्क्रीनिंग की जाएगी। संबंधित ब्लॉक की आरकेबीएस टीमें स्कूलों में जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग करेंगी। मशीन उपलब्ध होने से पहले संबंधित टीमों को इसके संचालन के लिए आवश्यक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि सदर ब्लॉक की आरकेबीएस टीम को ऑटो-रिफ्रैक्टर मशीन के संचालन के लिए पहले ही प्रशिक्षण दिया जा चुका है। टीम को मशीन के उपयोग और स्क्रीनिंग प्रक्रिया का प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। अन्य ब्लॉकों की टीमों को भी मशीन उपलब्ध करवाने से पहले आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि बच्चों की जांच निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रभावी ढंग से की जा सके।

उन्होंने बताया कि मिशन दृष्टि के पायलट चरण में प्राथमिक विद्यालय डियारा और आंगनबाड़ी केंद्र और डीएवी स्कूल चंगर में बच्चों की आंखों की स्क्रीनिंग की गई। डियारा में जांच किए गए 52 बच्चों में 11 बच्चों में दृष्टि संबंधी दोष पाए गए, जबकि डीएवी स्कूल चंगर में करीब 100 बच्चों की स्क्रीनिंग में लगभग 20 बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्या अथवा रिफ्रैक्टिव एरर के संकेत मिले। पायलट चरण के इन परिणामों ने कम उम्र में नियमित नेत्र स्क्रीनिंग की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

*आपदा में केंद्र की 1500 करोड़ की घोषणा, एक साल बीतने के बाद भी हिमाचल को नहीं मिला राहत का पैसा : धर्माणी* *शिक्षा और स...
01/09/2026

*आपदा में केंद्र की 1500 करोड़ की घोषणा, एक साल बीतने के बाद भी हिमाचल को नहीं मिला राहत का पैसा : धर्माणी*

*शिक्षा और स्वास्थ्य प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता,*

*मुख्यमंत्री ‘अपना परिवार सुखी परिवार’ योजना के अंतर्गत सालाना 10 लाख रुपये तक की कैशलेस उपचार की मिलेंगी सुविधा*

घुमारवीं, 31 अगस्त 2026। नगर एवं ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा तथा व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने घुमारवीं रेस्ट हाउस में मुख्यमंत्री ‘अपना परिवार सुखी परिवार’ योजना के अंतर्गत पट्टा, सेऊ तथा बाड़ी मझेड़वा पंचायतों के पात्र लाभार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदा से हुए भारी नुकसान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हिमाचल प्रदेश के आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए घोषित 1,500 करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय सहायता का एक वर्ष बीतने के बावजूद प्रदेश को इंतजार है। उन्होंने कहा कि सितंबर 2025 में घोषित इस सहायता राशि को लेकर प्रदेश सरकार लगातार केंद्र सरकार के समक्ष अपना पक्ष रख रही है। उन्होंने कहा कि यह राजनीति का विषय नहीं, बल्कि हिमाचल के अधिकार और आपदा प्रभावित परिवारों के दर्द से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि आरडीजी बंद किए जाने से हिमाचल के वित्तीय संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने अपने सीमित संसाधनों से आपदा प्रभावित परिवारों हर संभव सहायता की।

मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ‘अपना परिवार सुखी परिवार’ योजना प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य ऐसे अति निर्धन परिवारों को सरकारी योजनाओं के दायरे में लाना है, जो अभी तक किसी न किसी कारण से सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त नहीं कर पाए हैं। उन्होंने कहा कि 2 अक्टूबर से योजना के पात्र लाभार्थियों को प्रतिमाह 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता के साथ 300 यूनिट तक निःशुल्क बिजली उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की जाएगी। इसके अतिरिक्त हिमकेयर योजना को बीमा आधारित बनाकर प्रत्येक परिवार को सालाना 10 लाख रुपये तक की कैशलेस उपचार सुविधा उपलब्ध करवाने की दिशा में भी सरकार कार्य कर रही है।

धर्माणी ने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य अंतिम छोर तक रहने वाले प्रत्येक पात्र परिवार को सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक संबल उपलब्ध करवाना है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे अपने पंचायत क्षेत्रों में योजना की पात्रता रखने वाले किसी भी परिवार को लाभ से वंचित न रहने दें। उन्होंने निर्देश दिए कि 20 सितंबर से पहले सभी पात्र परिवारों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि पात्र परिवारों को योजना का लाभ समय पर मिल सके।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रही है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाना सरकार के प्रमुख लक्ष्यों में शामिल है। इसके साथ ही आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से ग्रामीण एवं दूरदराज क्षेत्रों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि लोगों को शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं मिले।

मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका लाभ सीधे पात्र परिवारों तक पहुंचे, यही सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों से आग्रह किया कि वे सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी पात्र परिवारों तक पहुंचाएं और अधिक से अधिक पात्र लोगों को इन योजनाओं का लाभ दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने पात्र और जरूरतमंद वर्गों को सहारा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। ‘मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना’ के तहत प्रदेश के लगभग 6,000 अनाथ बच्चों की शिक्षा, आवास और अन्य आवश्यकताओं का खर्च सरकार वहन कर रही है तथा 27 वर्ष तक की आयु में प्रतिमाह 4,000 रुपये की सहायता दी जा रही है। विधवा और तलाकशुदा महिलाओं के बच्चों की शिक्षा के लिए ‘इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना’ तथा विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा के लिए डॉ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना के तहत 20 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण 1 प्रतिशत ब्याज पर उपलब्ध करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए भी सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। भैंस के दूध का खरीद मूल्य 71 रुपये तथा गाय के दूध का 61 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है। वहीं गेहूं 40 रुपये, मक्की 30 रुपये, कच्ची हल्दी 150 रुपये और अदरक 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीद के लिए समर्थन मूल्य घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि इन फैसलों का उद्देश्य मेहनतकश किसानों और जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक संबल देना है।

कार्यक्रम में बीडीओ अभिषेक शर्मा, पट्टा पंचायत के उपप्रधान रवि ठाकुर, बीडीसी सदस्य कुलदीप सिंह सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

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