21/08/2026
तारीख वही, कैलेंडर वही, बस एक नाम बदल जाता है,
हर महीने का यह दिन दिल को एक गहरा जख्म दे जाता है।21.04..26💔
पापा,💔21.08.26
आज फिर वही तारीख लौट कर आई है,
जो बिना कुछ कहे, सब कुछ ले जाती है।
लगता है वक्त ठहर गया है उसी मोड़ पर,
जहाँ आपकी उंगली पकड़कर चलना सिखाया था आपने।
लोग कहते हैं वक्त हर घाव भर देता है,
पर इन्हें क्या पता...
कुछ खालीपन वक्त के साथ और गहरे हो जाते हैं।
जब भी घर की दहलीज़ पर नज़र जाती है,
हर कोना चुपचाप आपका नाम पुकारता है।
आपकी वो कुर्सी, आपकी वो आवाज़,
और वो साया जो हर मुश्किल में ढाल बनता था...
आज जब पास नहीं है,
तो महसूस होता है कि दुनिया कितनी बेरंग और अकेली है।
पर पापा,
मैं जानती हूँ कि आप कहीं गए नहीं हैं,
यहीं आसपास, हवाओं में, मेरी हर सांस में शामिल हैं।
बस आपको देखना चाहूँ तो आँखें नम हो जाती हैं,
और आपके बिना ये सफर बहुत लंबा लगने लगता है।
आज दिल बहुत भारी है,
बस आपका एक हाथ सिर पर चाहिए...
कहने को तो सब अपने हैं,
पर आपके बिना यह जहाँ अधूरा सा लगता है।💔💔