21/05/2026
एक महीना बीत गया पापा😢💔, पर आँखों से वो मंज़र जाता नहीं,
दुनिया के लिए तो सिर्फ एक महीना बीता है, पर मेरी हर साँस गवाह है,
कि सिर से पिता का साया उठ जाने के बाद, बेटी पर क्या गुज़रती है।
21/May/2026✍️
21 अप्रैल का वो मंगलवार, दिल चाहकर भी भुला पाता नहीं।
वो दिन मेरी दुनिया बदल गया, हमसे मेरा आसमान छीन गया,दुनिया के लिए तो सिर्फ एक महीना बीता है, पर मेरी हर साँस गवाह है,
कि सिर से पिता का साया उठ जाने के बाद, बेटी पर क्या गुज़रती है।"
जो साया देता था हर तपन में, वो बरगद हमसे छिन गया।
जहाँ भी रहे आप शान से रहे, हर दिल पर आपका राज था,
आपकी कलम, आपका ऊँचा पद, इस पूरे परिवार का नाज़ था।
काम के प्रति वो निष्ठा आपकी, वो ईमानदारी और वो मान,
जिस महफ़िल में भी आप जाते थे, बन जाते थे उसकी शान।
लोग तरसते थे आपकी एक सलाह को, ऐसा आपका व्यक्तित्व था,
सरल, सहज और अनुशासन से भरा, आपका हर एक कृत्य था।
ऐसे गुणी और सम्मानित पिता की बेटी होने पर मुझे अभिमान है,
आपके ही नक्श-ए-कदम पर चलना, अब मेरी ज़िंदगी का अरमान है।
आज घर की वो खाली कुर्सी, आपका वो कमरा आपको पुकारता है,
दिल चीख पड़ता है अंदर ही अंदर, जब कोई आपका नाम पुकारता है।
अब कौन कहेगा गर्व से मुझे, कौन सिर पर हाथ फिराएगा?
जब भी टूटेगी हिम्मत मेरी, कौन आकर हौसला बढ़ाएगा?
आपकी विदाई का ये दर्द पापा, मैं अपनी हर साँस में सहूँगी,
बेशक आप दूर चले गए, पर मैं हमेशा आपकी ही परछाई बन कर रहूँगी।
आपके नाम, आपके काम और स्वाभिमान को कभी झुकने नहीं दूँगी,
इस मतलबी दुनिया की भीड़ में, आपके दिए संस्कारों को हमेशा ज़िंदा रखूँगी।
भगवान से बस यही प्रार्थना है, जहाँ भी हो आप सुकून से रहना,
आपकी लाडली हर पल आपको याद करेगी, बस यही है अब आपसे कहना।
✍️🙏🙏🌹