18/06/2026
महंगाई, निजीकरण और मताधिकार के सवाल पर सड़कों पर उतरेगी माकपा : संजय चौहान
शिमला, 17 जून। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की राज्य कमेटी की दो दिवसीय बैठक 16-17 जून, 2026 को शिमला स्थित पार्टी कार्यालय में संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता राज्य सचिवालय सदस्य कॉमरेड ओंकार शाद ने की, जबकि पार्टी केंद्रीय सचिवालय सदस्य कॉमरेड विक्रम सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में राज्य सचिव कॉमरेड संजय चौहान ने राजनीतिक एवं संगठनात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा केंद्रीय कमेटी द्वारा पारित राजनीतिक प्रस्तावों और समसामयिक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान, फिलिस्तीन, वेनेज़ुएला तथा क्यूबा के विरुद्ध अपनाई जा रही सैन्य आक्रामकता की कड़ी निंदा की गई। राज्य कमेटी ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ता युद्ध केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता का कारण बन रहा है। इसके परिणामस्वरूप महंगाई, बेरोजगारी और ऊर्जा संकट गहरा रहा है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर भी पड़ रहा है। पार्टी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की चुप्पी पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
बैठक में केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने तथा मताधिकार जैसे संवैधानिक अधिकारों को सीमित करने का आरोप लगाया गया। पार्टी का मत है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रियाओं में पक्षपातपूर्ण हस्तक्षेप लोकतंत्र की बुनियाद को कमजोर कर रहा है। इसके विरोध में देशव्यापी जनजागरण अभियान चलाने तथा हिमाचल प्रदेश में भी लोगों को मताधिकार की रक्षा के लिए संगठित करने का निर्णय लिया गया।
राज्य कमेटी ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की नवउदारवादी आर्थिक नीतियों के कारण प्रदेश की वित्तीय स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। केंद्र द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद किए जाने से हिमाचल प्रदेश को प्रतिवर्ष हजारों करोड़ रुपये की क्षति उठानी पड़ रही है, जिससे कर्ज का बोझ बढ़ रहा है और विकास योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि राजस्व की भरपाई के लिए आम जनता पर करों और शुल्कों का अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है, जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, पेयजल और बिजली जैसी मूलभूत सेवाओं के बजट में कटौती कर निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। पार्टी ने केंद्र सरकार से राजस्व घाटा अनुदान तत्काल बहाल करने की मांग की।
बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत प्रदेश में स्कूलों और कॉलेजों के बंदीकरण तथा विलय की प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति व्यक्त की गई। पार्टी ने कहा कि शिक्षा संस्थानों का निरंतर संकुचन ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए अवसरों को सीमित कर रहा है। राज्य सरकार से इन निर्णयों को वापस लेने की मांग की गई।
राज्य कमेटी ने बिजली क्षेत्र में प्रीपेड स्मार्ट मीटरों की स्थापना, बढ़ते सेस तथा बिजली सेवाओं के निजीकरण के प्रयासों का विरोध करते हुए कहा कि इससे उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और सार्वजनिक क्षेत्र कमजोर हो रहा है। पार्टी ने प्रदेशवासियों को सस्ती और सुलभ बिजली उपलब्ध कराने की मांग उठाई।
बैठक में कृषि एवं बागवानी क्षेत्र के गहराते संकट पर भी चिंता व्यक्त की गई। खाद की बढ़ती कीमतों, कृषि-बागवानी सब्सिडी में कटौती, बढ़ती उत्पादन लागत और फसलों के उचित मूल्य न मिलने से किसान गंभीर आर्थिक दबाव में हैं। पार्टी ने कहा कि कृषि और बागवानी प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, इसलिए सरकार को किसानों और बागवानों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
पार्टी ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा 11 जून, 2026 को जारी पेट्रोल और डीज़ल संबंधी अधिसूचना को किसान विरोधी बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की। चेतावनी दी गई कि यदि अधिसूचना वापस नहीं ली गई तो किसानों को संगठित कर व्यापक आंदोलन, प्रदर्शन और घेराव किए जाएंगे।
बैठक में हाल ही में हुई भारी वर्षा और ओलावृष्टि से सेब, नाशपाती, प्लम, खुमानी, मटर, गेहूं तथा अन्य फसलों को हुए नुकसान पर चिंता व्यक्त की गई। पार्टी ने मांग की कि नुकसान का तत्काल आकलन कर किसानों और बागवानों को उचित मुआवजा दिया जाए, कर्ज वसूली पर रोक लगाई जाए तथा मंडी मध्यस्थता योजना (MIS) के तहत लंबित भुगतानों का शीघ्र निपटारा किया जाए।
राज्य कमेटी ने भूमिहीन परिवारों, गरीब किसानों, दलितों और आपदा प्रभावित लोगों को भूमि अधिकार दिलाने की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि भूमि नियमितीकरण संबंधी नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए तथा आवश्यक कानूनी संशोधनों के माध्यम से पात्र परिवारों को भूमि उपलब्ध कराई जाए।
पार्टी ने दूध उत्पादकों के आंदोलन का समर्थन करते हुए सरकार से घोषित मूल्य पर समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने, दुग्ध संग्रहण क्षमता बढ़ाने तथा प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आधुनिक चिलिंग प्लांट स्थापित करने की मांग की। इसके अतिरिक्त मनरेगा और ग्रामीण रोजगार योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा रोजगार के अवसरों में वृद्धि की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), भारतीय जनता पार्टी और उनके सहयोगी संगठनों पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए ऐसी प्रवृत्तियों की निंदा की गई। पार्टी ने प्रदेशवासियों से सामाजिक सौहार्द, भाईचारे और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट रहने की अपील की।
राज्य कमेटी ने निर्णय लिया कि आने वाले समय में केंद्र और राज्य सरकारों की जनविरोधी नीतियों, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, निजीकरण तथा किसान-मजदूर विरोधी निर्णयों के विरुद्ध व्यापक जनसंघर्ष को तेज किया जाएगा और प्रदेश में मजदूर, किसान तथा आमजन की एकता को मजबूत किया जाएगा।