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खादी : गांवों की करघों से उठती आत्मनिर्भर भारत की नई आहटमोहिंद्र प्रताप सिंह राणा/ग्राम परिवेश जिस खादी को कभी केवल स्वद...
27/05/2026

खादी : गांवों की करघों से उठती आत्मनिर्भर भारत की नई आहट

मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा/ग्राम परिवेश

जिस खादी को कभी केवल स्वदेशी आंदोलन और गांधीवादी जीवनशैली का प्रतीक माना जाता था, वही खादी आज भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनकर उभरी है। गांवों की चरखों से निकली यह परंपरा अब “लोकल टू ग्लोबल” की नई आर्थिक धारा में बदल चुकी है। बढ़ती बेरोजगारी, पलायन और ग्रामीण आर्थिक असंतुलन के बीच खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने न केवल करोड़ों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया है, बल्कि गांव आधारित उत्पादन प्रणाली को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य भी किया है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत केवीआईसी अब केवल परंपरागत उद्योगों का संरक्षक नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत अभियान का सबसे सशक्त ग्रामीण आर्थिक मॉडल बनकर सामने आया है।

26 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित गांधी दर्शन, राजघाट कार्यालय में जारी वित्त वर्ष 2025-26 के प्रारंभिक आंकड़ों ने इस परिवर्तन की तस्वीर को और स्पष्ट कर दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने पहली बार 1.87 लाख करोड़ रुपये के कारोबार का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है।

खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के अध्यक्ष मनोज कुमार ने वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े जारी करते हुए बताया कि पिछले 12 वर्षों में इस क्षेत्र ने विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं। वर्ष 2013-14 की तुलना में बिक्री में 501 प्रतिशत, उत्पादन में 380 प्रतिशत तथा रोजगार सृजन में 56 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2013-14 में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों का उत्पादन 26,109 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग पांच गुना बढ़कर 1,25,296 करोड़ रुपये पहुंच गया। इसी प्रकार बिक्री 31,154 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,87,105 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गई, जो अब तक की सर्वाधिक बिक्री है।

खादी वस्त्रों के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व विस्तार देखने को मिला है। वर्ष 2013-14 में 811 करोड़ रुपये का उत्पादन बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 3,974 करोड़ रुपये हो गया, जबकि बिक्री 1,081 करोड़ रुपये से बढ़कर 7,869 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। प्रधानमंत्री द्वारा खादी के सतत प्रचार-प्रसार और “वोकल फॉर लोकल” अभियान ने इस क्षेत्र को नई बाजार पहचान प्रदान की है।

ग्रामोद्योग क्षेत्र ने भी रिकॉर्ड प्रगति दर्ज की है। वर्ष 2013-14 में 25,298 करोड़ रुपये का उत्पादन बढ़कर 1,21,322 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि बिक्री 30,073 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,79,236 करोड़ रुपये हो गई। यही नहीं, ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में भी यह क्षेत्र नई ताकत बनकर उभरा है। वर्ष 2013-14 में जहां 1.19 करोड़ लोगों को रोजगार प्राप्त था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर लगभग 1.99 करोड़ तक पहुंच गई।

केवीआईसी के अनुसार रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। वर्ष 2013-14 में खादी और ग्रामोद्योग से जुड़े संचयी रोजगार का आंकड़ा 1.30 करोड़ था, जो अब 56 प्रतिशत वृद्धि के साथ बढ़कर 2.04 करोड़ तक पहुंच गया है।

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) ने स्वरोजगार और ग्रामीण उद्यमिता को नई गति दी है। वित्त वर्ष 2025-26 में 66,494 नई इकाइयों की स्थापना की गई, जिनके लिए 7,375 करोड़ रुपये के ऋण के विरुद्ध 2,457 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी वितरित की गई। इन इकाइयों के माध्यम से 7,31,434 लोगों को रोजगार मिला। योजना की शुरुआत से अब तक 10,84,679 इकाइयों की स्थापना की जा चुकी है, जिनके लिए 80,705 करोड़ रुपये के ऋण के सापेक्ष 29,623 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी वितरित की गई है। इससे अब तक लगभग 97.95 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है।

ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत कारीगरों को आधुनिक उपकरणों और मशीनों से जोड़ने की दिशा में भी व्यापक कार्य हुआ है। अब तक 51,230 विद्युत चालित चाक, 2,46,099 बी-बॉक्स एवं बी-कालोनी, 2,674 अगरबत्ती निर्माण मशीन, 7,669 फुटवियर टूलकिट, 836 पेपर प्लेट एवं दोना निर्माण मशीन, 7,571 एसी, मोबाइल, सिलाई, इलेक्ट्रिशियन एवं प्लंबर टूलकिट, 5,138 लकड़ी के खिलौने निर्माण मशीन तथा 1,789 पामगुड़, तेल घानी एवं इमली प्रसंस्करण मशीनों का वितरण किया जा चुका है। वित्त वर्ष 2025-26 में अकेले 37,769 मशीन, टूलकिट एवं उपकरण वितरित किए गए। पिछले चार वर्षों में यह संख्या लगातार बढ़ी है और अब तक कुल 3,23,006 मशीनें एवं उपकरण वितरित किए जा चुके हैं।

महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी केवीआईसी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण बनकर सामने आई है। वित्त वर्ष 2025-26 में विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत 79,682 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें 47,382 महिलाएं शामिल रहीं। पीएमईजीपी के तहत 28,180 महिला उद्यमियों ने नई इकाइयां स्थापित कीं, जिनसे 3,09,980 महिलाओं को रोजगार मिला। खादी क्षेत्र में लगभग 5 लाख कारीगरों में 80 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं, जो इसे महिला नेतृत्व आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्त मॉडल बनाता है।

कारीगरों के पारिश्रमिक में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2013-14 में जहां पारिश्रमिक 4 रुपये प्रति हैंक था, वहीं अब यह बढ़कर 15 रुपये प्रति हैंक हो गया है, अर्थात लगभग 275 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

सरकारी आपूर्ति और प्रदर्शनी बिक्री में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज हुई है। सरकारी आपूर्ति 92.08 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जबकि प्रदर्शनी एवं विपणन गतिविधियों के माध्यम से 30.83 करोड़ रुपये की बिक्री हुई। राष्ट्रीय ध्वज की बिक्री भी 0.87 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.35 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो “हर घर तिरंगा” अभियान और खादी के प्रति बढ़ती जनभागीदारी को दर्शाती है।

केवीआईसी अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में केवीआईसी की योजनाएं “वोकल फॉर लोकल” और “लोकल टू ग्लोबल” के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दे रही हैं। उनके अनुसार खादी अब केवल परिधान नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी गौरव और ग्रामीण समृद्धि का जीवंत प्रतीक बन चुकी है।

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