27/05/2026
यह पोस्ट बहुत भारी दिल से लिख रहा हूँ… 💔
समझ नहीं आता कि हमारे प्रदेश के लोग इतने स्वार्थी कैसे हो गए हैं, और सरकार इतनी असक्षम क्यों दिखाई देती है।
जिस हिमाचल को देवभूमि कहा जाता है, आज वहीं लोग अपने मतलब के लिए प्रकृति और वन्यजीवन को भूलते जा रहे हैं।
पहाड़ों को काटकर कंक्रीट के जंगल खड़े किए जा रहे हैं, लेकिन शायद किसी को यह एहसास नहीं कि आने वाली पीढ़ियाँ आखिर कौन-से पहाड़ देख पाएंगी?
अगर हम इसी तरह अपने पहाड़ों को आग लगाते रहे, जंगल उजाड़ते रहे और सिर्फ इमारतें बनाते रहे, तो हिमाचल की असली पहचान ही खत्म हो जाएगी।
और सरकार की बात करें तो, शायद इतनी असक्षम व्यवस्था कहीं और नहीं देखी।
ना कोई दूरदृष्टि, ना कोई ठोस योजना… बस अपने घर भरने में लगे हुए हैं।
सपने और वादे तो बहुत दिखाए जाते हैं, लेकिन हकीकत इस वीडियो में साफ दिखाई दे रही है।
दुख इस बात का भी है कि सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि लोग भी अपने ही प्रदेश की पहचान और demographics बदलने में लगे हुए हैं।
भारत का सबसे शिक्षित राज्य कहा जाता है हिमाचल को…
लेकिन क्या फायदा उस शिक्षा का, जब लोगों में अपने पर्यावरण को बचाने की समझ ही नहीं?
जब अपने संस्कृति और विरासत को बचाने की इच्छा ही नहीं?
और जब अपने ही लोगों में एकता नहीं?
युवा वर्ग नशे में धंसता हुआ चले जा रहा है|
हिमाचल सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं है…
ये हमारी पहचान, हमारी संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों की अमानत है। 🙏
कसौली, ऊना और हमीरपुर के पहाड़ ऐसे ही जल रहें हैं और हमारी सरकार के साथ साथ हम भी मूक दर्शक बनकर इसे देख रहे हैं||