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08/06/2026

संजौली मामले में शिमला पुलिस का आधिकारिक ब्यान

हिमाचल में नीली क्रांतिः मत्स्य क्षेत्र ने रोजगार और समृद्धि के खोले नए द्वारतीन वर्षों में 972 करोड़ रुपये की आर्थिक गति...
07/06/2026

हिमाचल में नीली क्रांतिः मत्स्य क्षेत्र ने रोजगार और समृद्धि के खोले नए द्वार

तीन वर्षों में 972 करोड़ रुपये की आर्थिक गतिविधियां, 60,800 मीट्रिक टन मछली उत्पादन किया गया दर्ज

शिमला। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश का मत्स्य क्षेत्र अभूतपूर्व प्रगति के दौर से गुजर रहा है। कभी सीमित आर्थिक गतिविधि के रूप में देखा जाने वाला यह क्षेत्र आज ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक समृद्धि का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है।

राज्य सरकार की दूरदर्शी नीतियों, आधुनिक तकनीकों और मछुआरों के कल्याण के लिए उठाए गए ठोस कदमों ने मत्स्य क्षेत्र को नई पहचान प्रदान की है।

प्रदेश सरकार द्वारा मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मछुआरों और मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि, आधुनिक बुनियादी ढांचे का विकास तथा सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है, जिसके परिणामस्वरूप हिमाचल प्रदेश की ब्लू इकोनॉमी का निरंतर विस्तार हो रहा है।

राज्य सरकार की योजनाओं के फलस्वरूप जनवरी 2023 से मार्च 2026 के बीच प्रदेश में कुल 60,799.66 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन दर्ज किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत 972.46 करोड़ रुपये रही।

वर्ष 2023-24 में जहां 17,721.64 मीट्रिक टन मछली उत्पादन दर्ज किया गया, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 19,019.83 मीट्रिक टन और 2025-26 में रिकॉर्ड 20,005.97 मीट्रिक टन उत्पादन दर्ज किया गया। यह सतत वृद्धि दर्शाती है कि मत्स्य क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था में लगातार महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है तथा हजारों परिवारों के लिए आय का स्थायी स्रोत बन कर उभरा है।

वर्तमान में मत्स्य क्षेत्र रोजगार और उद्यमिता का भी महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। वर्ष 2023 से अब तक विभिन्न मत्स्य विकास योजनाओं के माध्यम से कुल 1,553 रोजगार अवसर सृजित किए गए। वर्ष 2023-24 में 385, वर्ष 2024-25 में 539 तथा वर्ष 2025-26 में युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के 612 अवसर सृजित किए गए हैं।

बायोफ्लॅाक तकनीक, रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस), तालाब आधारित मत्स्य पालन तथा ट्राउट फार्मिंग जैसी आधुनिक पद्धतियों ने ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए द्वार खोले हैं। हैचरी, मत्स्य बीज उत्पादन, फीड मिलों तथा मछली विपणन के लिए आइस बॉक्स युक्त मोटरसाइकिलों और थ्री-व्हीलरों पर दिए जा रहे अनुदान से मत्स्य क्षेत्र को मजबूती मिली है।

जनवरी 2023 से मार्च 2026 के दौरान विभागीय ट्राउट फार्मों ने 235.16 लाख रुपये की 42.29 मीट्रिक टन ट्राउट का उत्पादन किया है। विभाग ने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से 338.16 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया है। इस अवधि में निजी ट्राउट किसानों ने लगभग 333.40 करोड़ रुपये की 5,000.87 मीट्रिक टन ट्राउट का उत्पादन किया है।

सरकार द्वारा जिला कुल्लू के पतलीकूहल में स्थापित कोल्ड वाटर आरएएस प्रणाली का संचालन किया जा रहा है, जिससे ट्राउट उत्पादन की प्रक्रिया और अधिक सुगम हुई है। इस तकनीक के माध्यम से ट्राउट तैयार करने में लगने वाला समय लगभग 14 महीने से घटकर 10 महीने रह गया है।

एक अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में वर्ष 2025-26 के दौरान हिमाचल के मत्स्य पालकों ने उत्तराखंड को 2.5 लाख आइड ओवा और 8.5 लाख रेनबो ट्राउट फ्राई उपलब्ध करवाई गई, जो राज्य की गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन क्षमता को प्रदर्शित कर रहा है।

मत्स्य पालन क्षेत्र हजारों परिवारों के लिए आजीविका का सशक्त स्रोत बनकर उभरा है। वर्ष 2023-24 से 2025-26 के दौरान 18,649 मछुआरों को जलाशय मत्स्य पालन के माध्यम से पूर्णकालिक स्वरोजगार प्राप्त हुआ। वर्ष 2023-24 में 6,022, वर्ष 2024-25 में 6,318 तथा वर्ष 2025-26 में 6,309 मछुआरों को स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हुए।

इस अवधि में जलाशयों से 34.53 करोड़ रुपये की 2,246.26 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन दर्ज किया गया। जलाशयों में मछली उत्पादन में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2023-24 में 566.03 मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 818.02 मीट्रिक टन मछली उत्पादन दर्ज किया गया।

मत्स्य पालन क्षेत्र को विस्तार प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने वर्ष 2024-25 में मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य पालन योजना प्रारंभ की। इस योजना के अंतर्गत सभी श्रेणियों के लाभार्थियों को समान रूप से 80 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध करवाया जा रहा है।

वर्ष 2024-25 में इस योजना के अंतर्गत 146 लाख रुपये की सब्सिडी वितरित की गई, जबकि 2025-26 में 48.57 लाख रुपये जारी किए गए। इस सहायता से 4.8963 हेक्टेयर क्षेत्र में नए मत्स्य तालाबों का निर्माण किया गया, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि हुई है।

राज्य सरकार ने मत्स्य पालन क्षेत्र को विस्तार प्रदान करने के साथ-साथ नवाचार, नई तकनीकों के उपयोग और मछुआरों के कल्याण की दिशा में भी अनेक कदम उठाए हैं। बायोफ्लॉक और आरएएस जैसी आधुनिक तकनीकों ने सीमित भूमि और जल संसाधनों वाले क्षेत्रों में भी मत्स्य पालन की संभावनाओं को बढ़ाया गया है।

इसी क्रम में प्रदेश का पहला महाशीर संरक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है, जिसके अंतर्गत गोल्डन महाशीर के 40,000 से अधिक फिंगरलिंग पोंग जलाशय, गोबिंद सागर, पंडोह बांध तथा ब्यास नदी में डाले गए।

सरकार के इस प्रयास के लिए मत्स्य विभाग को प्रतिष्ठित ‘‘स्कॉच गोल्ड अवार्ड-2025’’ से सम्मानित किया गया।
इसके अतिरिक्त, सरकार द्वारा अमूर कार्प, एएचआर जयन्ती तथा अमृत कतला जैसी उन्नत प्रजातियों का विकास किया जा रहा है, इनकी वृद्धि दर और प्रजनन क्षमता पारंपरिक प्रजातियों की तुलना में 20 से 25 प्रतिशत अधिक है।

मछुआरों और मत्स्य पालकों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तीकरण के लिए भी अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। सेविंग्स-कम-रिलीफ योजना के अंतर्गत 13,767 जलाशय मछुआरों को 619.52 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई।

इसके अतिरिक्त, 42,000 से अधिक मछुआरों और मत्स्य पालकों को सामान्य दुर्घटना बीमा योजना के तहत सुरक्षा कवच उपलब्ध करवाया गया। वहीं 1,786 लाभार्थियों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) सुविधा से जोड़कर संस्थागत ऋण तक उनकी पहुंच सुनिश्चित की गई है।

राज्य सरकार ने जलाशयों में पकड़ी जाने वाली मछलियों पर लगने वाली रॉयल्टी को कम किया है। वर्ष 2025-26 में इसे 15 प्रतिशत से घटाकर 7.5 प्रतिशत किया गया और वर्ष 2026-27 में इसे मात्र 1 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार के इस ऐतिहासिक निर्णय से छः हजार से अधिक जलाशय मछुआरों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश का मत्स्य क्षेत्र आज विकास की एक प्रेरक कहानी प्रस्तुत कर रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा मत्स्य उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि, रोजगार सृजन, मछुआरों के कल्याण और जैव विविधता संरक्षण की दिशा में उठाए गए कदम न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि हिमाचल प्रदेश को देश में नीली क्रांति के एक सफल मॉडल के रूप में भी स्थापित कर रहे हैं।

ढली - रामपुर फोर-लेन सड़क का सर्वेक्षण पूरा, नाबार्ड के तहत हाटू माता रोपवे परियोजना का किया जाएगा विकासनवनिर्वाचित पंचाय...
07/06/2026

ढली - रामपुर फोर-लेन सड़क का सर्वेक्षण पूरा, नाबार्ड के तहत हाटू माता रोपवे परियोजना का किया जाएगा विकास

नवनिर्वाचित पंचायती राज प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को किया सम्मानित

शिमला। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज शिमला जिला के हाटू माता मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।

इस अवसर पर मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश अपनी समृद्ध ‘देव संस्कृति’ के लिए विश्व विख्यात है। यहां के लोगों की अपने देवी-देवताओं में गहरी आस्था है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अनेक प्राचीन मंदिर स्थापित है और राज्य सरकार धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

पर्यटन और बेहतर संपर्क सुविधा को प्रमुखता प्रदान करते हुए ढली - नारकंडा - रामपुर सड़क को फोर-लेन राजमार्ग में विकसित किया जा रहा है, जिसके लिए सर्वेक्षण का कार्य पूरा हो चुका है।

इस परियोजना में सुरंग के निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि भूस्खलन से होने वाली क्षति को कम किया जा सके और लोगों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हाटू माता रोपवे परियोजना के निर्माण की दिशा में सक्रियता से कार्य कर रही है और इस परियोजना को नाबार्ड के अंतर्गत प्रस्तावित किया गया है। इस परियोजना को धरातल पर उतारने में तीन से चार वर्ष का समय लग सकता है, लेकिन सरकार इसे प्राथमिकता के आधार पर क्रियान्वित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि हाटू माता सड़क के सुधार कार्यों के लिए धनराशि स्वीकृत की गई है और इस कार्य में पेड़ों को कटान से बचाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होगीं।

मुख्यमंत्री ने निर्विरोध निर्वाचित नारकंडा नगर पंचायत के लिए 50 लाख रुपये प्रदान करने की भी घोषणा की। नारकंडा में नवनिर्वाचित पंचायती राज प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नारकंडा में पौधरोपण भी किया।

07/06/2026

अपने निष्कासन के बाद नीरज भारती की प्रतिक्रिया

प्रधानों / उपप्रधानों की शपथ
07/06/2026

प्रधानों / उपप्रधानों की शपथ

07/06/2026

शिमला : संजौली में एक टेलर की दुकान में नाबालिग लडकी से छेड़छाड़ और वीडियो बनाकर धमकाने का आरोप

06/06/2026

शिमला : संजौली में नाबालिग से कथित छेड़छाड़ पर हंगामा

नीरज भारती पार्टी से निष्कासित
06/06/2026

नीरज भारती पार्टी से निष्कासित

हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल के निर्णयशिमला। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित मंत्रि...
06/06/2026

हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल के निर्णय

शिमला। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

मंत्रिमंडल ने विभिन्न विभागों द्वारा अलग-अलग कारणों से पहले अस्वीकृत किए गए करुणामूलक नियुक्ति के मामलों पर पुनर्विचार करने को मंजूरी दी। एकमुश्त विशेष उपाय के रूप में सबसे वाजिब अस्वीकृत मामलों की दोबारा जांच की जाएगी तथा आवश्यक छूट प्रदान की जाएगी।

मंत्रिमंडल ने सरकारी भूमि पर कुछ अतिक्रमणों के लिए नियमितीकरण नीति-2026 (पॉलिसी फॉर रेगुलराईजेशन ऑफ सर्टेन एनक्रोचमेंट ऑन गर्वंमेंट लैंड-2026) को मंजूरी दी।

यह नीति उन भूमिहीन परिवारों और सीमांत किसानों के मानवीय सरोकार को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है, जो आवासीय, कृषि एवं बागवानी उद्देश्यों के लिए सरकारी भूमि पर कब्जे में हैं।

यह नीति सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप तैयार की गई है तथा इसे मंजूरी के लिए भारत सरकार को भेजा गया है।

मंत्रिमंडल ने उन किसानों के लिए कृषि ऋण ब्याज अनुदान योजना शुरू करने का निर्णय लिया, जिनकी भूमि नीलामी के खतरे में है।

इसके तहत राज्य सरकार पात्र किसानों के 3 लाख रुपये तक के कृषि ऋण पर ब्याज देनदारी का 50 प्रतिशत वहन करेगी। इससे प्रदेश के 6,356 किसानों को लाभ मिलेगा।

मंत्रिमंडल ने भर्ती निदेशालय के अंतर्गत वर्क इंस्पेक्टर के 400 पद सृजित कर भरने को मंजूरी प्रदान की।
बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में चिकित्सा अधिकारियों के 300 तथा चतुर्थ श्रेणी/मल्टी टास्क वर्करों के 250 पद भरने की स्वीकृति दी गई।
इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 200 स्टाफ नर्सों की भर्ती को भी मंजूरी दी गई।

मंत्रिमंडल ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 162 पद भरने का निर्णय लिया, जिनमें 76 ऑपरेशन थिएटर सहायक, 36 रेडियोग्राफर तथा 50 लैब तकनीशियन ग्रेड-प्प् के पद शामिल हैं।

राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में विभिन्न विभागों के 75 सहायक प्रोफेसरों के पद सृजित कर भरने को मंजूरी दी गई।

मंडी जिले के नेरचौक स्थित श्री लाल बहादुर शास्त्री राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय के कार्डियोलॉजी विभाग में सहायक प्रोफेसर के दो और वरिष्ठ रेजिडेंट के दो पद भरने को स्वीकृति प्रदान की गई।

मंत्रिमंडल ने डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर के छः नामित प्रोफेसरों को पात्रता प्राप्त करने के लिए आवश्यक अवधि से 6 से 20 दिन कम होने के कारण एकमुश्त विशेष छूट देने का निर्णय लिया।

कांगड़ा जिले के सिविल अस्पताल देहरा में विभिन्न श्रेणियों के 12 पद तथा ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी कार्यालय देहरा में 3 पद सृजित कर भरने को मंजूरी दी गई।

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में विभिन्न विभागों में सहायक प्रोफेसरों के 17 पद भरने का निर्णय लिया गया।

मंत्रिमंडल ने अध्ययन अवकाश पर जाने वाले कर्मचारियों को पूर्ण वेतन देने का निर्णय लिया। जिन कर्मचारियों ने पहले अध्ययन अवकाश लिया था, उन्हें भी बकाया वेतन राशि का भुगतान किया जाएगा।

31 मार्च, 2026 तक लगातार सात वर्ष की सेवा पूरी कर चुके अंशकालिक कर्मचारियों को दैनिक वेतनभोगी बनाने को मंजूरी दी गई।

जॉब ट्रेनीज़ को 15 दिन का पितृत्व अवकाश प्रदान करने का निर्णय लिया गया।

हमीरपुर जिले के नेरी स्थित बागवानी एवं वानिकी महाविद्यालय में विभिन्न श्रेणियों के तीन पद सृजित कर भरने की मंजूरी दी गई।

मण्डलायुक्त कार्यालय मंडी में जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (आईटी) के दो पद सृजित करने का निर्णय भी लिया गया।

होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा विभाग में एक जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (आईटी) तथा दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आरक्षित एक मल्टी टास्क वर्कर का पद भरा जाएगा।

कांगड़ा जिले के बैजनाथ और बीड़ उप-मंडलों के पुनर्गठन के माध्यम से चढ़ि़यार में लोक निर्माण विभाग का नया उप-मंडल स्थापित किया जाएगा।

मंत्रिमंडल ने हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा के तीन पद भरने का निर्णय लिया।

पूर्ववर्ती हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग, हमीरपुर द्वारा जारी 80 पोस्ट कोडों के विज्ञापन वापस लेने तथा संबंधित अभ्यर्थियों को 4.27 करोड़ रुपये परीक्षा शुल्क वापस करने की मंजूरी दी गई।

मंत्रिमंडल ने राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना का चौथा चरण आरम्भ करने की मंजूरी दी। योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को ई-बस खरीदने पर 50 प्रतिशत तथा डीजल बस खरीदने पर 30 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जाएगी, जिससे स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा और सार्वजनिक परिवहन सेवाएं मजबूत होंगी।

मंत्रिमंडल ने हिमाचल प्रदेश एनडीपीएस नियम, 1989 में संशोधन को मंजूरी दी ताकि चिकित्सा एवं वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए भांग की खेती, प्रसंस्करण, निर्माण, भंडारण और परिवहन को विनियमित किया जा सके।

शिमला जिले के जुब्बल, कोटखाई और रोहड़ू क्षेत्रों के 15 अग्नि प्रभावित परिवारों के लिए विशेष राहत पैकेज को मंजूरी दी गई। जिन परिवारों के मकान पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उन्हें प्रति परिवार 7 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। कुल 84.70 लाख रुपये की सहायता राशि वितरित की जाएगी।

बैठक में उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में एक मंत्रिमंडलीय उपसमिति गठित करने का निर्णय लिया गया, जो विभिन्न विभागों में मल्टी टास्क वर्करों की भर्ती प्रक्रिया को केन्द्रीकृत एवं सुव्यवस्थित करने पर विचार करेगी।

मंत्रिमंडल ने घरेलू उपयोग के लिए खनिज परिवहन करने वाले ट्रैक्टरों की कम्पाउंडिंग फीस 4,500 रुपये से घटाकर 500 रुपये करने को मंजूरी दी। इससे ट्रैक्टर संचालकों को बड़ी राहत मिलेगी और अनावश्यक दंड से बचाव होगा।

मंत्रिमंडल ने ग्रेजिंग पॉलिसी-2026 को मंजूरी दी, जिसके तहत वन विभाग और पशुपालन विभाग संयुक्त रूप से एक ऑनलाइन पोर्टल विकसित करेंगे। इससे पशुपालकों को रियल-टाइम परमिट उपलब्ध होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

बैठक में हिम केयर योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य बीमा कवरेज को बीमा मॉडल के अंतर्गत संचालित करने का निर्णय लिया गया। संशोधित व्यवस्था के अनुसार पात्र लाभार्थियों को अब 5 लाख रुपये के स्थान पर 7 लाख रुपये तथा 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जाएगा।

मंत्रिमंडल ने तकनीकी शिक्षण संस्थानों के लिए राज्य नवाचार नीति को भी मंजूरी दी। इस नीति का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश को नवाचार, उद्यमिता और स्टार्ट-अप के उभरते केंद्रों के रूप मे विकसित करना है। इस नीति के क्रियान्वयन के लिए वर्ष 2026 से 2028 तक 2 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

बैठक में कांगड़ा जिला के पटोला में 132/33 केवी सब-स्टेशन तथा कंगैहण में 220 केवी स्विचिंग सब-स्टेशन के निर्माण के लिए हिमाचल प्रदेश पावर ट्रासमिशन कॉर्पाेरेशन लिमिटिड के पक्ष में 40 वर्षों की पट्टा (लीज) प्रदान करने को स्वीकृति प्रदान की गई।

मंत्रिमंडल ने मंडी जिला के नागरिक अस्पताल सरकाघाट की क्षमता 100 बिस्तरों से बढ़ाकर 150 बिस्तर करने तथा इसके लिए आवश्यक पदों को सृजित कर भरने को स्वीकृति दी।

बैठक में नागरिक अस्पताल बद्दी को 100 बिस्तरों वाले अस्पताल में स्तरोन्नत करने तथा सोलन जिला के मानपुरा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने तथा इसके संचालन के लिए आवश्यक पदों को सृजित कर भरने का निर्णय लिया।

मंत्रिमंडल ने हमीरपुर जिला के मझेली में प्राथमिक स्वास्थ्य उप-केंद्र खोलने तथा इसके सुचारू संचालन के लिए आवश्यक पदों का सृजन कर भरने को स्वीकृति दी।

बैठक में सोलन जिला के राज्य स्तरीय शूलिनी मेले को राष्ट्रीय स्तर का दर्जा प्रदान करने तथा चंबा जिला के छतराड़ी स्थित मां शिव शक्ति जातर मेले तथा कांगड़ा जिला के इंदौरा स्थित शिवरात्री मेले काठगढ़ को राज्य स्तरीय मेले का दर्जा देने को स्वीकृति प्रदान की।

मंत्रिमंडल ने कांगड़ा जिला के मेले नेरटी रैत, सोलन जिला के अर्की तहसील के बाड़ीधार मेले सरयांज, चंबा जिला के छिंज मेले गरनोटा तथा मंडी जिला के करसोग तहसील के नाहवीधार मेले को जिला स्तरीय मेले का दर्जा देने को मंजूरी दी।

बैठक में शिमला जिले के जुब्बल स्थित ठाकुर रामलाल कन्या खेल छात्रावास को ठाकुर रामलाल राजकीय बालिका खेल विद्यालय, जुब्बल में स्तरोन्नत करने तथा विभिन्न श्रेणियों के 23 पद सृजित कर भरने को स्वीकृति दी गई।

मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री सहारा योजना का सुचारू और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को भी मंजूरी दी।
शिक्षा सचिव ने मंत्रिमंडल केे समक्ष सीबीएसई विद्यालयों से संबंधित एक प्रस्तुति भी दी।

06/06/2026

शिमला : कैबिनेट निर्णय

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