15/10/2026
सपनों की उड़ान भरने निकला आयुष, घर लौटने से पहले थम गई जिंदगी; शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने जताया गहरा शोक।
गिरीश ठाकुर
चौपाल, 15 अक्तूबर।
जिस उम्र में आंखों में बड़े सपने और दिल में कुछ कर गुजरने का जुनून होता है, उस उम्र में आयुष कौंडल का दुनिया से असमय विदा हो जाना हर किसी को झकझोर गया है। वॉलीबॉल के मैदान में अपनी प्रतिभा दिखाने और भविष्य में नई ऊंचाइयां हासिल करने का सपना लेकर घर से निकला हमीरपुर का यह युवा खिलाड़ी प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद कभी अपने घर नहीं लौट सका। कुपवी के समीप हुए दर्दनाक हादसे में आयुष की मौत ने न केवल उसके परिवार, बल्कि साथी खिलाड़ियों, शिक्षकों और पूरे खेल जगत को गहरे शोक में डुबो दिया है।
आयुष कौंडल हमीरपुर जिले के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला नाल्टी का छात्र था। वह शिमला जिले के कुपवी में आयोजित 67वीं राज्य स्तरीय अंडर-19 छात्र खेलकूद प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आया था। प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले के समापन के बाद वह अन्य खिलाड़ियों के साथ निजी बस में सवार होकर अपने घर की ओर लौट रहा था। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि घर वापसी का यह सफर उसके जीवन का अंतिम सफर बन जाएगा।
कुपवी से कुछ दूरी पर हुआ दर्दनाक हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुपवी से लगभग तीन से चार किलोमीटर दूर बस में सफर के दौरान आयुष का सिर सड़क किनारे लगे एक टेलीफोन के खंभे से टकरा गया। इस हादसे में उसे गंभीर चोटें आईं। घटना के तुरंत बाद उसे सिविल अस्पताल कुपवी पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
खेल प्रतियोगिता में भाग लेने के बाद अपने साथियों के साथ घर लौट रहा आयुष जिंदगी की जंग हार गया। जिस खिलाड़ी के लिए कुछ समय पहले तक खेल का मैदान उत्साह, प्रतिस्पर्धा और भविष्य की उम्मीदों से भरा था, उसकी असमय मौत ने सभी को स्तब्ध कर दिया है।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने जताया गहरा दुख
युवा खिलाड़ी आयुष कौंडल के निधन पर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने इस दुखद घटना पर संवेदनाएं प्रकट करते हुए इसे प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति बताया और शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी सहानुभूति जताई।
शिक्षा मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को पीड़ित परिवार को हरसंभव सहयोग उपलब्ध करवाने तथा आयुष के पार्थिव शरीर को उसके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। प्रशासन की ओर से परिवार को 25 हजार रुपये की फौरी राहत प्रदान की गई है। वहीं, शिक्षा विभाग की ओर से नियमानुसार अतिरिक्त आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाने पर भी विचार किया जा रहा है।
अधूरे रह गए सपने, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
आयुष का असमय निधन एक परिवार के लिए ऐसा गहरा आघात है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। जिस बेटे से परिवार ने भविष्य की उम्मीदें जोड़ रखी थीं, जिस खिलाड़ी के बेहतर प्रदर्शन और सफलता की कामना की जा रही थी, उसके अचानक चले जाने से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
यह हादसा खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ियों की सुरक्षित आवाजाही के महत्व को भी सामने लाता है। खेल के मैदान में प्रतिभा और मेहनत के दम पर अपना भविष्य बनाने निकले युवा खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।
आयुष अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी यादें परिवार, मित्रों, शिक्षकों और साथी खिलाड़ियों के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगी। उसकी असमय विदाई ने पूरे प्रदेश को गमगीन कर दिया है। एक होनहार खिलाड़ी का इस तरह चले जाना उन तमाम सपनों का अधूरा रह जाना है, जिन्हें पूरा करने के लिए उसने खेल के मैदान में कदम रखा था।
न्यूज टुडे हिमाचल ब्यूरो, चौपाल