13/06/2026
**“आज मध्यम वर्ग का आदमी सबसे ज़्यादा दबाव में है।
न वह खुलकर जी पा रहा है, न अपनी परेशानियाँ खुलकर कह पा रहा है।
महँगाई, टैक्स, खर्चे और जिम्मेदारियों के बीच वह हर दिन संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
गरीब के लिए योजनाएँ हैं, अमीर अपने संसाधनों से आगे बढ़ जाता है, लेकिन मध्यम वर्ग अक्सर खुद को बीच में फँसा हुआ महसूस करता है।
हमें जागना होगा, एक-दूसरे का साथ देना होगा।
सिर्फ पार्टी-पार्टी खेलकर और आपस में लड़कर किसी आम इंसान का भला नहीं होगा।
सही सवाल पूछना, सही बात का साथ देना और गलत को गलत कहना — यही एक जागरूक समाज की पहचान है।
अगर हम आपस में ही बँटते रहे, तो असली मुद्दे पीछे छूट जाएँगे।”**