04/09/2026
ओशो के विचार का सार:
वे कहते थे कि भगवान को केवल मान्यता, किताब या परंपरा के आधार पर स्वीकार करना पर्याप्त नहीं है।
उनके अनुसार सत्य को स्वयं अनुभव करना चाहिए, केवल किसी दूसरे के कहने पर विश्वास नहीं करना चाहिए।
वे अक्सर समझाते थे कि मनुष्य अपनी इच्छाओं, डर और कल्पनाओं से भगवान की अलग-अलग छवियाँ बना लेता है।
उनके विचार में ध्यान और जागरूकता के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर की वास्तविकता को जान सकता है।
इसलिए उनका जोर “भगवान को मानने” से ज्यादा अस्तित्व और सत्य को अनुभव करने पर था।
सरल शब्दों में: ओशो के लिए सवाल सिर्फ यह नहीं था कि “भगवान है या नहीं?”, बल्कि यह था कि “क्या तुम सत्य को स्वयं जानने की कोशिश कर रहे हो?”