13/05/2026
उनका नाम मोहम्मद आमिर खान था।
20 फरवरी 1998 की रात, उनकी मां ने उन्हें पुरानी दिल्ली में दवा लेने भेजा था। वह सिर्फ 18 साल के थे।
लेकिन वह कभी दुकान तक नहीं पहुंच पाए।
सादे कपड़ों में कुछ लोगों ने रास्ते में उन्हें रोक लिया। आमिर को नहीं पता था कि वे पुलिस वाले हैं। उन्हें एक सुनसान इमारत में ले जाया गया। सात दिनों तक गैरकानूनी हिरासत में रखा गया। यातनाएं दी गईं। खाली कागज़ों पर जबरन हस्ताक्षर करवाए गए।
फिर दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने उन्हें अदालत में पेश किया और 1996 से 1997 के बीच दिल्ली, गाज़ियाबाद, रोहतक और सोनीपत में हुए 19 बम धमाकों का आरोपी बना दिया।
मीडिया के सामने उन्हें आतंकवादी घोषित कर दिया गया।
परिवार को कोई सूचना नहीं दी गई। उनके घरवाले कई दिनों तक थानों के चक्कर लगाते रहे।
आमिर ने 14 साल जेल में बिताए। टॉर्चर सहा। एकांत कैद झेली। अदालत में एक-एक कर केस टूटते गए, सबूत फर्जी साबित होते गए।
2012 में उन्हें 19 में से 17 मामलों में बरी कर दिया गया। बाकी दो केस लंबित रहे। तब तक वह जेल में उतना समय काट चुके थे, जितनी सजा सभी मामलों में दोषी साबित होने पर भी नहीं होती।
जनवरी 2012 में वह जेल से बाहर आए।
लेकिन तब तक उनके पिता की मौत हो चुकी थी। उनकी मां को इतना गहरा स्ट्रोक आया था कि वह अपने बेटे को पहचान तक नहीं पाईं।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दिल्ली सरकार को उन्हें मुआवज़ा देने का आदेश दिया।
राशि थी सिर्फ 5 लाख रुपये।
दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के किसी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई। कोई निलंबन नहीं। कोई जांच नहीं।
आमिर ने अपनी कहानी पर एक किताब लिखी
“Framed As A Terrorist: My 14 Year Struggle To Prove My Innocence”
आज वह उन लोगों की मदद करते हैं जिन्हें झूठे मामलों में फंसाया गया है।
भारत ने उन्हें 5 लाख रुपये दिए…
S*K Aawaz
और उसे इंसाफ कह दिया।
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