07/07/2025
शिव शंभु और भस्मासुर की कथा
(3 मिनट की कहानी)
बहुत समय पहले की बात है। एक राक्षस था जिसका नाम था भस्मासुर। उसने कठोर तपस्या की और भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया। शिव जी दयालु हैं, वे किसी का भला-बुरा नहीं देखते, केवल भक्ति पर ध्यान देते हैं।
भस्मासुर ने उनसे वरदान मांगा— “हे महादेव! मुझे ऐसा वरदान दीजिए कि मैं जिसके सिर पर हाथ रखूं, वो भस्म हो जाए।”
शिव जी ने वचन दिया और वरदान दे दिया।
अब भस्मासुर अहंकारी हो गया। उसने सोचा, “क्यों न शिव जी पर ही इस वरदान को आजमाऊँ?” और वह भगवान शिव का पीछा करने लगा ताकि उनका अंत कर सके।
शिव जी बहुत दयालु हैं, वे कभी युद्ध नहीं करना चाहते। वे पहाड़ों, जंगलों में भागने लगे। हर कोई चिंतित था कि अब क्या होगा?
तभी भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया—एक सुंदर स्त्री के रूप में। मोहिनी इतनी सुंदर थी कि भस्मासुर उस पर मोहित हो गया।
मोहिनी ने चालाकी से भस्मासुर से कहा— “अगर तुम सच में शक्तिशाली हो तो मेरा नृत्य कर के दिखाओ। जो मैं करूँ, वही तुम भी करो।”
भस्मासुर तैयार हो गया। नृत्य शुरू हुआ। मोहिनी ने चतुराई से एक ऐसा मुद्रा बनाई जिसमें हाथ सिर पर रखा जाता है।
भस्मासुर ने भी वैसा ही किया और जैसे ही उसने अपना हाथ सिर पर रखा— वह खुद ही भस्म हो गया।
इस तरह भगवान शिव की रक्षा हुई और संसार फिर से शांत हो गया।
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शिक्षा:
यह कहानी हमें सिखाती है कि अहंकार और गलत इस्तेमाल की गई शक्ति अंत में विनाश का कारण बनती है।