06/02/2026
राजस्थान के नागौर जिले की मेड़ता विधानसभा क्षेत्र के निवासी तथा जीव रक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण समिति के प्रदेशाध्यक्ष, लुणा राम मेघवाल जी ने करकेड़ी क्षेत्र में हो रही खेजड़ी वृक्षों की अवैध कटाई का साहसपूर्वक विरोध किया।
खेजड़ी जैसे संरक्षित और पूज्य वृक्षों के संरक्षण के लिए आवाज़ उठाना उनका अपराध नहीं, बल्कि समाज के प्रति उनका कर्तव्य था।
लेकिन दुर्भाग्यवश, इस पर्यावरणीय अपराध के खिलाफ खड़े होने की सज़ा उन्हें जानलेवा हमले के रूप में मिली।
वन माफियाओं द्वारा किए गए इस कायराना हमले में वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
यह घटना न केवल अत्यंत पीड़ादायक है, बल्कि यह दर्शाती है कि अवैध कटाई में लिप्त माफियाओं के हौसले किस कदर बुलंद हैं और उन्हें किस स्तर का संरक्षण प्राप्त है।लुणा राम मेघवाल जी को जयपुर के एसएमएस अस्पताल में रेफर किया गया है,
किन्तु समय पर समुचित एवं विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध न हो पाने के कारण उनकी स्थिति अभी भी अत्यंत गंभीर बनी हुई है।
यह प्रशासनिक संवेदनहीनता का स्पष्ट उदाहरण है, जिस पर तत्काल संज्ञान लिया जाना चाहिए।
यह समझना आवश्यक है कि खेजड़ी केवल एक वृक्ष नहीं है।यह राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान, मरुस्थलीय पर्यावरण के संतुलन और जनजीवन का आधार है।जिस खेजड़ी के लिए अमृता देवी जी विश्नोई सहित 363 लोगों ने अपने प्राण न्यौछावर किए,आज उसी खेजड़ी को बचाने वाले पर्यावरण योद्धा को माफियाओं के हवाले कर दिया जाना पूरे तंत्र पर सवाल खड़े करता है।
हम प्रकृति से प्रार्थना करते हैं कि पर्यावरण रक्षक लुणा राम मेघवाल जी शीघ्र स्वस्थ हों और पुनः मजबूती के साथ इस लड़ाई का नेतृत्व करें।
साथ ही हम से माँग करते हैं कि लुणा राम मेघवाल जी को तत्काल सर्वोत्तम, विशेषज्ञ एवं समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
इस जानलेवा हमले में शामिल सभी अपराधियों की तुरंत गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।
खेजड़ी वृक्षों की अवैध कटाई में संलिप्त माफियाओं तथा उन्हें संरक्षण देने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
प्रदेशभर में खेजड़ी सहित सभी संरक्षित वृक्षों की अवैध कटाई पर पूर्ण रूप से रोक लगाई जाए।
यह सिर्फ़ एक व्यक्ति पर हमला नहीं है,
यह प्रकृति, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर हमला है।
अगर आज भी दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह अपराध व्यवस्था की मौन स्वीकृति मानी जाएगी।