31/03/2026
खुशियाँ कम और अरमान बहुत हैं, जिसे भी देखो परेशान बहुत है ।
करीब से देखा तो निकला रेत का घर, मगर दूर से इसकी शान बहुत है ।
कहते हैं सच का कोई मुकाबला नहीं, मगर आज झूठ की पहचान बहुत है।
मुश्किल से मिलता है शहर में आदमी, यूँ तो कहने को इन्सान बहुत है ।