01/11/2025
जब सियासत अपने ही घर से दरकने लगे, तो फिर जनता से वफ़ादारी की उम्मीद कैसी? सिमरी बख्तियारपुर में तो हाल कुछ यूं है कि एनडीए प्रत्याशी संजय सिंह को हराने के लिए उनके अपने ही भाई संजीव सिंह ने महागठबंधन प्रत्याशी यूसुफ सलाहउद्दीन का साथ थाम लिया है।
अब सोचिए ज़रा —
जो नेता अपने घर की एकता नहीं बचा पाए, वो जनता की एकता क्या बचाएंगे? जात-जमात के लोग भी मुँह मोड़ चुके हैं, और “टुटपुंजिया समर्थक” अब सोशल मीडिया पर ही जीत के सपने देख रहे हैं।
राजनीति में जनता का भरोसा सबसे बड़ा हथियार होता है - पर जब परिवार और समाज ही विपक्ष बन जाए, तो फिर हार का ठीकरा किसी और के सिर फोड़ने की कोशिश मत कीजिए, पहले अपने घर के आईने में झाँक लीजिए।
सियासत सेवा से चलती है, संबंधों से नहीं, अहंकार से तो बिल्कुल नहीं। fans