23/08/2026
सार्वजनिक संपत्ति का ऐसा दुरुपयोग... बेहद शर्मनाक!
ज़रा इस तस्वीर को देखिए। रेलवे की बेडशीट और तौलिये, जो यात्रियों की सुविधा और आराम के लिए होते हैं, उन्हें ये तीनों महाशय ओढ़कर सड़क पर शान से घूम रहे हैं। मानो 'भारतीय रेलवे' इनकी निजी संपत्ति हो!
दूसरों पर उंगली उठाना और व्यवस्था को कोसना बहुत आसान होता है, लेकिन जब खुद की नागरिक ज़िम्मेदारी (Civic Sense) निभाने की बात आती है, तो 'मुफ़्त का माल' समझकर चोरी करने में ज़रा भी झिझक नहीं होती। जब तक ऐसी मानसिकता वाले लोग नहीं बदलेंगे, तब तक देश में सुधार की उम्मीद करना बेकार है।
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