12/07/2026
मप्र में अब महिला हो या पुरुष, किसी भी व्यक्ति के गुम होने पर थाने में सिर्फ गुम इंसान कायमी करना पर्याप्त नहीं होगा। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 140(3) के तहत एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य होगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद पुलिस मुख्यालय ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश में हर साल दर्ज होने वाले करीब 60 हजार गुमशुदगी के मामले भी एफआईआर में बदल जाएंगे।
इससे पुलिस की विवेचना व्यवस्था के साथ प्रदेश के अपराध रिकॉर्ड पर भी असर पड़ेगा। वर्ष 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने 'बचपन बचाओ आंदोलन बनाम भारत सरकार' मामले में गुमशुदा नाबालिगों के मामलों में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। अब 'जी. गणेश बनाम तमिलनाडु राज्य' मामले में कोर्ट ने यह व्यवस्था सभी गुमशुदा व्यक्तियों, यानी महिला और पुरुष, पर भी लागू कर दी है। इसी पालन में पीएचक्यू की महिला सुरक्षा शाखा ने कार्ययोजना तैयार की है। दूसरे राज्यों की पुलिस से चर्चा के बाद इसे लागू किया गया है। चार सप्ताह के भीतर इसकी कंप्लायंस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाएगी। स्पेशल डीजी (महिला अपराध) अनिल कुमार के अनुसार हर गुमशुदगी में मानव दुर्व्यापार की धाराएं नहीं लगेंगी। विवेचना में अपहरण, मानव दुर्व्यापार या अन्य अपराध के तथ्य मिलने पर ही संबंधित धाराएं जोड़ी जाएंगी।