Thakur vikram singh

Thakur vikram singh ♥️⭐⭐♥️

2026 के आत्मनिर्भर भारत में दिल्ली के सत्य निकेतन में 40 साल पुरानी 5 मंजिला अवैध इमारत ढहने से कई मासूम छात्रों की मौत ...
08/09/2026

2026 के आत्मनिर्भर भारत में दिल्ली के सत्य निकेतन में 40 साल पुरानी 5 मंजिला अवैध इमारत ढहने से कई मासूम छात्रों की मौत हुई, जबकि घटना के 12 घंटे बाद भी 50% से अधिक मलबा नहीं हटाया जा सका था।

दिल्ली नगर निगम के रिकॉर्ड संख्या 402/2018 के अनुसार इस 100 वर्ग गज के रिहायशी प्लॉट पर केवल 2 मंजिलों की अनुमति थी, परंतु स्थानीय भाजपा विधायक के संरक्षण में मालिक ने बिना किसी बीम या पिलर के 3 अतिरिक्त अवैध मंजिलें खड़ी कर 5 मंजिला अवैध पीजी बना दिया।

दिल्ली मास्टर प्लान 2021 के नियम 15.3 के अनुसार 100% रिहायशी क्षेत्र में बिना फायर एनओसी (फायर एक्ट 2010 की धारा 33) के कमर्शियल पीजी चलाना पूर्णतः गैर-कानूनी था, फिर भी एमसीडी द्वारा पूर्व में सील की गई इस बिल्डिंग की सील को राजनीतिक प्रभाव से गैर-कानूनी रूप से खोल दिया गया।

देश की राजधानी में जहां एम्स के मुर्दाघर में विभिन्न राज्यों से आए छात्रों के शव पड़े थे, वहीं घटना की रात 12 बजे भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन विपक्ष को कोसते हुए राजनीतिक वीडियो पोस्ट करने में व्यस्त थे, जो वर्तमान सत्ता की संवेदनहीनता को उजागर करता है।

​दिल्ली विश्वविद्यालय में नामांकित 4.5 लाख से अधिक छात्रों के लिए कुल 20 हॉस्टल उपलब्ध हैं जिनकी कुल क्षमता 9,000 छात्रों से भी कम है, यानी 98% यानी 4,41,000 छात्र सरकारी हॉस्टल सुविधाओं से वंचित हैं।

इसी कमी का फायदा उठाकर सत्य निकेतन, मुखर्जी नगर और करोल बाग जैसे क्षेत्रों में 15,000 से अधिक गैर-कानूनी पीजी चल रहे हैं, जो प्रति छात्र औसतन 12,000 से 18,000 रुपये प्रति माह वसूल कर प्रति वर्ष 2,500 करोड़ से अधिक का काला कारोबार करते हैं।

इस अवैध सिंडिकेट से पीजी माफिया प्रति माह करोड़ों रुपये का चंदा एकत्र कर हॉस्टल निर्माण की प्रक्रियाओं को बाधित करता है ताकि छात्रों को महंगे निजी आवासों में रहने पर मजबूर किया जा सके।

​ऐतिहासिक तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो 1947 से 2014 के मध्य कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल में उच्च शिक्षा के अवसंरचनात्मक ढांचे का व्यापक निर्माण किया गया था।

जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल (1947-1964) में शिक्षा पर केंद्रीय आवंटन को कुल बजट के 0.6% से बढ़ाकर 2.4% किया गया था, जिसके तहत 1951 में 50 करोड़ रुपये के शुरुआती परिव्यय से आईआईटी खड़गपुर तथा बाद में 1956 में 4.8 करोड़ रुपये की लागत से एम्स नई दिल्ली की स्थापना हुई।

इसके पश्चात 1969 में 12 करोड़ रुपये के शुरुआती आवंटन से जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) अधिनियम पारित हुआ, जिसके अंतर्गत 1970 से 1980 के बीच 45 करोड़ रुपये की लागत से झेलम, सतलुज, कावेरी और रावी जैसे 18 भव्य हॉस्टलों का निर्माण कराया गया, जिनमें 8,000 से अधिक छात्रों के लिए न्यूनतम शुल्क पर सुरक्षित आवासीय व्यवस्था सुनिश्चित की गई।

​इसके अतिरिक्त 1966 से 1989 के दौरान इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के प्रशासनों द्वारा 1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई, जिसके तहत शिक्षा बजट को जीडीपी के 3.5% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया था।

इस अवधि में 550 नवोदय विद्यालयों की स्थापना हेतु 1,200 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया और देश भर के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 300 से अधिक नए सरकारी हॉस्टलों का निर्माण 350 करोड़ रुपये की लागत से संपन्न कराया गया।

दिल्ली विश्वविद्यालय में 1970 और 1980 के दशकों में इंटरनेशनल यूथ हॉस्टल, मेघदूत और ढाका कॉम्प्लेक्स जैसे 12 बड़े हॉस्टल परिसर स्थापित किए गए, जिन पर तत्कालीन दरों के अनुसार लगभग 28 करोड़ रुपये का व्यय किया गया था और जहां आज भी हजारों छात्र सुरक्षित वातावरण में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

​इसके विपरीत 2014 से 2024 के मध्य भाजपा सरकार के कार्यकाल में शिक्षा अवसंरचना पर बजटीय आवंटन में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है।

1968 के कोठारी आयोग द्वारा अनुशंसित जीडीपी के 6% शिक्षा बजट के मानक के मुकाबले 2014-2024 के दौरान यह आवंटन औसतन केवल 2.8% से 3.1% के बीच सीमित रहा, जिससे सरकारी हॉस्टल निर्माण प्रक्रिया ठप्प पड़ गई।

यूडीआईएसई+ (UDISE+) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2014 से 2023 के बीच देश भर में 60,000 से अधिक सरकारी प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों को 'मर्जर' के नाम पर बंद कर दिया गया, जबकि दिल्ली विश्वविद्यालय और जेएनयू में पिछले 10 वर्षों में नए केंद्रीय हॉस्टलों की निर्माण दर में 0% की वृद्धि दर्ज की गई।

​2014 के बाद देश के विभिन्न कोचिंग और शैक्षणिक हबों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण दर्जनों छात्रों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।

जुलाई 2024 में ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित Rau's IAS कोचिंग के अवैध बेसमेंट में नाले का पानी भरने से 3 यूपीएससी अभ्यर्थियों की डूबने से मृत्यु हुई, जो दिल्ली जल बोर्ड और एमसीडी के नालों की 5 वर्षों से सफाई न होने का परिणाम था।

जून 2023 में मुखर्जी नगर के संस्कृति कोचिंग सेंटर में आग लगने की घटना में 60 से अधिक छात्र खिड़कियों से कूदने पर मजबूर हुए क्योंकि इमारत में केवल 1 निकास द्वार था, और मई 2019 में सूरत के तक्षशिला कॉम्प्लेक्स में आग लगने से 22 छात्रों की मृत्यु हुई थी क्योंकि 4 मंजिला इमारत पर बिना अनुमति प्लास्टिक डोम बनाया गया था।

​वर्ष 2014 से 2024 के बीच देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों और कोचिंग केंद्रों में अवसंरचनात्मक विफलताओं, आग लगने की घटनाओं और अवैध निर्माण ढहने के कारण 140 से अधिक छात्रों की असमय मौत दर्ज की गई है।

इस दौरान दिल्ली, कोटा और प्रयागराज जैसे प्रमुख शिक्षा केंद्रों में चलने वाले 35,000 से अधिक कोचिंग संस्थानों और पीजी में से 82% के पास वैध नेशनल बिल्डिंग कोड (NBC 2016) का सुरक्षा प्रमाणपत्र या फायर एनओसी उपलब्ध नहीं है।

इसके बावजूद इन असुरक्षित परिसरों पर कोई कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई न होना सीधे तौर पर नगर निकायों और सत्ताधारी तंत्र की मिलीभगत और नीतिगत विफलता का प्रमाण है।

​शिक्षा व्यवस्था को निजी माफियाओं के हाथ में सौंपने और आवासीय बजट में कटौती करने की नीतियों का ही परिणाम है कि आज छात्र असुरक्षित जर्जर इमारतों में रहने को विवश हैं।

1947 से 2014 के बीच निर्मित मजबूत संस्थागत ढांचों की तुलना में पिछले दशक की नीतियां केवल विज्ञापनों और निजीकरण तक सीमित रही हैं।

जब तक शिक्षा और छात्र सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पारदर्शी नीतियां और सार्वजनिक निवेश पुनस्थापित नहीं किया जाएगा, तब तक 'विश्वगुरु' के दावे ज़मीनी हकीकत से परे ही रहेंगे।

विक्रम सिंह ...✍️

06/09/2026

इंदिरा जी अपने बेटे राजीव संग






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04/09/2026

श्री राजीव गांधी जी और श्रीमती सोनिया गांधी जी: दो प्रेरक नेता जिन्होंने देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया






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04/09/2026

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02/09/2026

पंडित जवाहरलाल नेहरू जी, राजीव गांधी जी और संजय गांधी जी के संग

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02/09/2026

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1947 से 1964 के बीच नेहरू सरकार ने महिलाओं के अधिकारों के लिए हिंदू कोड बिल 1956 पास किया, जिसने 50% महिला आबादी को संपत...
29/08/2026

1947 से 1964 के बीच नेहरू सरकार ने महिलाओं के अधिकारों के लिए हिंदू कोड बिल 1956 पास किया, जिसने 50% महिला आबादी को संपत्ति में समान अधिकार दिया और 1961 में दहेज निषेध अधिनियम बनाकर लाखों बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित की।

1985 से 1991 के दौरान राजीव गांधी ने पंचायती राज में 73वें और 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से 33% महिला आरक्षण लागू किया, जिससे 1000000 से अधिक महिलाएं सीधे शासन प्रक्रिया में चुनकर आईं और 1988 में राष्ट्रीय महिला आयोग की नींव रखी गई।

​इतिहास गवाह है कि 1989 के रक्षाबंधन पर राजीव गांधी को देश भर से 25000 से अधिक डाक राखियां प्राप्त हुई थीं और उनकी बहनें, देश की आम महिलाएं और छात्राएं प्रधानमंत्री आवास पर सीधे जाकर उन्हें रक्षासूत्र बांधती थीं।

लेकिन आज जब हम रक्षाबंधन 2026 के अवसर पर इतिहास और वर्तमान की तुलना करते हैं, तो राजनीति का स्तर और संवाद की मर्यादा अत्यंत चिंताजनक स्थिति में दिखाई देती है।

1991 में अपने पिता राजीव गांधी और 1984 में अपनी दादी इंदिरा गांधी को खोने वाले राहुल गांधी ने देश के लिए 2 सर्वोच्च बलिदानों के दर्द को सहा, लेकिन कभी इस देशवासियों को दोष नहीं दिया।

​जिस परिवार के 2-2 प्रधानमंत्री देश की अखंडता के लिए शहीद हो गए, उनकी धर्मपत्नी सोनिया गांधी को सत्ता पक्ष के शीर्ष मंचों से 'कांग्रेस की विधवा' और 'जर्सी गाय' जैसे निम्नस्तरीय शब्दों से संबोधित किया गया।

1991 से 2004 तक 13 वर्षों तक बिना किसी सरकारी पद पर रहे, केवल एक शहीद की विधवा के रूप में जीवन व्यतीत करने वाली महिला का अपमान दरअसल देश की करोड़ों माताओं और बहनों का अपमान था।

2004 से 2024 के बीच संसद में 20 वर्षों तक सांसद रहते हुए राहुल गांधी ने कभी ऐसे असंसदीय शब्दों का प्रयोग नहीं किया और न ही अपनी पारिवारिक त्रासदियों का राजनीतिक शिकार भुनाया।

​2014 से 2023 के बीच 10 वर्षों में भारतीय जनता पार्टी और मीडिया के एक बड़े वर्ग ने 50000 से अधिक सोशल मीडिया हैंडल और करोड़ों रुपयों के बजट के जरिए राहुल गांधी को 'पप्पू' साबित करने के लिए एक योजनाबद्ध दुष्प्रचार अभियान चलाया।

2014 के चुनावों में कांग्रेस को 44 सीटें और 2019 में 52 सीटें मिलने के बाद इसी मीडिया ने राहुल गांधी की राजनीतिक प्रासंगिकता को 0% घोषित कर दिया था। लेकिन 2022 से 2024 के बीच 4000 किलोमीटर लंबी 'भारत जोड़ो यात्रा' और 6700 किलोमीटर लंबी 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' ने इस पूरे दुष्प्रचार तंत्र को ध्वस्त कर दिया।

​राहुल गांधी ने 145 दिनों में 12 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के 76 जिलों से पैदल गुजरते हुए 100000 से अधिक आम नागरिकों से सीधे संवाद स्थापित किया।

उन्होंने 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत 4 गुना मुआवजे का प्रावधान करवाकर 100% किसानों के हक की लड़ाई लड़ी, 2019 में न्यूतम आय योजना (न्याय) के तहत 20% सबसे गरीब परिवारों को ₹72000 वार्षिक देने का खाका खींचा और 2024 के चुनाव में 100% जाति जनगणना और ₹100000 वार्षिक महालक्ष्मी योजना की गारंटी दी।

2024 के लोकसभा चुनाव परिणामों में INDIA गठबंधन को 234 सीटें मिलीं और राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस 99 सीटों तक पहुंची, जिससे 2014 के मुकाबले 125% की वृद्धि दर्ज की गई।

​अमेठी में 2004 से 2019 तक 15 वर्षों के कार्यकाल के दौरान राहुल गांधी ने 100% विद्युतीकरण, राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी, केंद्रीय विद्यालय और 12000 से अधिक महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 150000 महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया।

वायनाड में 2019 से 2024 के बीच उन्होंने 100% सांसद निधि का उपयोग करते हुए 50 से अधिक मेडिकल किट वितरण, आदिवासी बस्तियों में डिजिटल क्लासरूम और 2024 की भूस्खलन त्रासदी में अपनी 1 महीने की तनख्वाह और 10 लाख का व्यक्तिगत कोष राहत कार्यों में डोनेट किया।

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी हर साल अपनी आय का 15% से 20% हिस्सा गुमनाम रूप से अनाथालयों, शहीद सैनिकों के बच्चों की शिक्षा और 1000 से अधिक गरीब विद्यार्थियों की स्कॉलरशिप के लिए दान करते हैं, जिसका मीडिया में 0% प्रचार किया जाता है।

​वायनाड में 2024 के भूस्खलन के दौरान प्रियंका गांधी ने 72 घंटे लगातार कैंप करके 500 से अधिक पीड़ित परिवारों को खाद्य और राहत सामग्री पहुँचाने का काम संभाला।

2019 से 2024 के बीच उत्तर प्रदेश में 400 से अधिक हाथरस, उन्नाव और सोनभद्र जैसी घटनाओं में प्रियंका गांधी और राहुल गांधी सबसे पहले पीड़ितों के घर पहुंचे और 100% कानूनी assistance प्रदान करवाई।

2019 के आम चुनाव में जहां राहुल गांधी की स्वीकार्यता 22% के आसपास आंकी जाती थी, वहीं 2024-2026 के आंकड़ों के अनुसार देश के 65% युवाओं (Gen-Z) और 58% महिला मतदाताओं में राहुल गांधी की लोकप्रियता प्रथम स्थान पर पहुंच चुकी है।

​2014 में जो मीडिया कांग्रेस को 12 से 20 सीटों पर सिमटने की भविष्यवाणी करता था, आज वही मीडिया एग्जिट पोल और सर्वे में स्वीकार कर रहा है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष 182 से अधिक सीटें जीतकर सत्ता के मुहाने पर खड़ा है।

139 साल पुरानी कांग्रेस पार्टी के इस जननेता ने साबित कर दिया कि नफरत के बाजार में भी मोहब्बत की दुकान खोली जा सकती है और सच को 1000 झूठ मिलकर भी दबा नहीं सकते।

2026 का यह रक्षाबंधन देश की 67 करोड़ महिलाओं और युवाओं के न्याय, सम्मान और अधिकार की पुनस्र्थापना का संकल्प दिवस है।

विक्रम सिंह...✍️

रक्षाबंधन की देशवासियों को ढेरों शुभकामनाएं |
28/08/2026

रक्षाबंधन की देशवासियों को ढेरों शुभकामनाएं |

1966 में कांग्रेस के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जब देश का बागडोर संभाला था, तब 1966-67 के दौरान भारत का रक्षा...
28/08/2026

1966 में कांग्रेस के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जब देश का बागडोर संभाला था, तब 1966-67 के दौरान भारत का रक्षा बजट लगभग ₹958 करोड़ था और देश 100 करोड़ डॉलर के अमेरिकी पीएल-480 अनाज आयात पर निर्भर था।

​1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों को आत्मसमर्पण कराने और बांग्लादेश को आजाद कराने के दौर में, 1974 के पोखरण-1 (ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्ध) के समय भी भारत ने अपनी विदेश नीति और संप्रभुता का सौदा नहीं किया।

​आज 2026 में 140 करोड़ से अधिक की जनसंख्या वाले भारत में इतिहास के पन्नों से चुनिंदा पाठ पढ़कर "राष्ट्रवाद" का प्रमाण पत्र बांटने का जो नया उद्योग खुला है, उसकी बुनियाद ही ऐतिहासिक अज्ञानता पर टिकी है।

​भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नबीन जब कांग्रेस को "नई मुस्लिम लीग" बताने का बयान देते हैं, तो यह महज राजनीतिक जुमलेबाजी नहीं, बल्कि अपने ही वैचारिक पुरखों के इतिहास पर परदा डालने का एक हास्यास्पद प्रयास है।

जिस जनसंघ से बीजेपी का जन्म हुआ और जिसकी मातृ संस्था हिंदू महासभा थी, उसी हिंदू महासभा के 'पितृपुरुष' डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी 1941 में बंगाल में मुस्लिम लीग से अलग हुए ए.के. फजलुल हक के साथ मिलकर 'प्रोग्रेसिव कोएलिशन' सरकार में वित्त मंत्री बने थे।

​आज दूसरों की देशभक्ति पर सवाल उठाने वाले भाजपा समर्थकों को यह याद दिलाना क्यों भारी पड़ता है कि 1937 से 1943 के बीच, जब मुस्लिम लीग भारत के बंटवारे का आधार तैयार कर रही थी, तब सिंध, बंगाल और उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत में हिंदू महासभा सत्ता के लिए उसी विचारधारा के साथ समझौते कर रही थी?

सावरकर ने तो खुद 1942 के कानपुर अधिवेशन में सार्वजनिक रूप से कहा था कि राजनीति में परिस्थितिवश गठबंधन किए जा सकते हैं।

​कटाक्ष की पराकाष्ठा तो देखिए, 26 जुलाई 1942 को जब महात्मा गांधी 'भारत छोड़ो आंदोलन' की नींव रख रहे थे, तब श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंगाल के गवर्नर सर जॉन हरबर्ट को पत्र लिखकर यह सलाह दे रहे थे कि ब्रिटिश हुकूमत को कांग्रेस के आंदोलन को शुरुआत में ही सख्ती से दबाना चाहिए ताकि युद्ध प्रयास बाधित न हों।

​आज वही वैचारिक धारा देश के ₹148 लाख करोड़ के राष्ट्रीय ऋण और साल 2026-27 के ₹48 लाख करोड़ से अधिक के केंद्रीय बजट के बीच खड़े होकर दूसरों को देशद्रोही का तमगा बांटती है।

​वैश्विक मंच पर आज भारत का व्यापार घाटा चीन के साथ ₹8.5 लाख करोड़ ($100 Billion) के पार जा चुका है, 2025-26 में बेरोजगारी दर युवाओं के बीच 15% से अधिक दर्ज की जा रही है, लेकिन ध्यान भटकने के लिए 1937 और 1947 के गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं।

​5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का सपना दिखाकर ₹8000 करोड़ के वीआईपी जहाजों और हजारों करोड़ के सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट्स में व्यस्त सत्ता को जब अपने ₹1.4 लाख करोड़ के कॉर्पोरेट टैक्स कट का जवाब देना होता है, तब उन्हें अचानक "मुस्लिम लीग" याद आने लगती है।

​इतिहास सचमुच बड़ा निर्दयी होता है सत्ता के गलियारों में बैठकर जो आज 'हिंदू-मुस्लिम' का कार्ड खेल रहे हैं, उनके अपने पुरखे उसी मुस्लिम लीग के साथ सरकार चला रहे थे जिसे आज वो गाली देते हैं।

देश को खोखले भाषण नहीं, बल्कि 140 करोड़ नागरिकों के लिए जवाबदेही, रोजगार और सच्चाई चाहिए।

विक्रम सिंह...✍️

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27/08/2026

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