24/12/2025
बहुत रोचक साथ में सच्चाई
बहुजन नेता मा. बाबू सिंह कुशवाहा जी की कार्य शैली से जुडा एक दिलचस्प किस्सा :👇
रात 3 बजे सचिवालय में बाबू सिंह ने 22 अफसरों की क्लास ली थी – 28 दिसंबर 2010”लखनऊ, सचिवालय (एन्नेक्सी बिल्डिंग)
बाबू सिंह कुशवाहा जी अपने सरकारी आवास (4 कालिदास मार्ग) से अचानक निकले। सिर्फ़ एक गाड़ी, ड्राइवर + PA कोई सायरन नहीं, कोई काफिला नहीं , देर रात सचिवालय के गेट पर पहुँचे।
तब लाल मंत्री के लिए लाल बत्ती का कल्चर हुआ करता था !!
गार्ड ने सलाम मारा तो बाबू जी बोले –
“सभी विभागों के सेक्शन ऑफिसर और ऊपर वाले अफसरों को अभी बुलाओ 15 मिनट में जो न आए, उसका नाम लिख लो !!"
फोन घनघना उठे.....
देर रात आनन फानन में 22 अफसर (कुछ तो पायजामा-स्वेटर में) हाँफते हुए पहुंचे। बाबू सिंह कुशवाहा जी कमरा नंबर 310 (उनका अपना कक्ष) में बैठे थे।
टेबल पर सिर्फ़ एक फाइल थी –“बुंदेलखंड सूखा राहत पैकेज”
बिना किसी इंट्रो के बोले:“ये फाइल 83 दिन से घूम रही है 22 अफसरों के पास गई ,हर एक ने 3-7 दिन तक रोकी।
कुल राशि : 187 करोड़ रुपये
इन पैसों से 42,000 किसानों को तालाब खोदने,
18,000 को पशु चारा और 9,000 को बीज खरीदना था
आज तक एक पैसा भी नहीं पहुँचा।
अब मैं पूछता हूँ – "जवाब कौन देगा?”
फिर एक-एक करके नाम पुकारने लगे......
“अशोक यादव – तुमने 9 दिन क्यों रोकी?”
अफसर ने कहा, “सर, फाइनेंस से क्लीयरेंस…”
बाबू सिंह ने बीच में टोका – “फाइनेंसर को मैंने खुद फोन किया था 11 दिसंबर को, तुमने भेजी ही नहीं।”
“राकेश मिश्रा – तुमने नोटिंग लिखी कि ‘पुनः परीक्षण करें’ , क्यों?”
अफसर -चुप
15 मिनट में सबकी बोलती बंद।
फिर बाबू सिंह कुशवाहा जी ने फाइनेंस सेक्रेटरी को फोन लगाया और बोले –
“187 करोड़ का चेक सुबह 8 बजे तक बंडेलखंड कमिश्नर के नाम जारी हो जाना चाहिए। नहीं तो आपका भी ट्रांसफर तैयार रखूँगा।”
फोन रखा और 22 अफसरों से बोले –
“अब यहाँ से जाइए और सुबह 10 बजे तक पूरी फाइल क्लियर करके मेरे टेबल पर रखिए जो न आए, उसका इस्तीफा माना जाएगा।"
अगली सुबह 9:55 पर फाइल क्लियर होकर उनके टेबल पर थी.....
30 दिसंबर 2010 तक 187 करोड़ में से 172 करोड़ बुंदेलखंड के खातों में पहुँच गए।
ये बात उस दौर की है जब हमारे बहुजन नेता बाबू सिंह कुशवाहा जी को मिनी मुख्यमंत्री के तौर पर राजनीति गलियारो मे जाना जाता था !!
।