03/05/2026
#सिरोही #शिवगंज “बोर्ड वाली नंदीशाला और सड़कों के असली मालिक—शिवगंज में ‘घुमंतू शासन’ लागू!”
शिवगंज शहर इन दिनों विकास की नई परिभाषा गढ़ रहा है—जहां योजनाएं कागज़ पर बनती हैं, बोर्ड जमीन पर लगते हैं और नंदी महाराज सड़कों पर राज करते हैं। पुराना राजमार्ग हो या शहर की मुख्य गलियां, हर जगह ऐसा लगता है मानो ट्रैफिक नियमों का ठेका अब घुमंतू नंदियों ने अपने खुरों में ले लिया हो।नगरपालिका की दूरदर्शिता का तो क्या ही कहना! “नंदीशाला” के नाम पर एक शानदार बोर्ड टांगकर जिम्मेदारी पूरी कर दी गई। अंदर नंदी हों या न हों, इससे क्या फर्क पड़ता है—बोर्ड तो है ना! लगता है प्रशासन का मानना है कि बोर्ड पढ़कर ही नंदी खुद-ब-खुद शाला में पहुंच जाएंगे।
शहरवासियों की हालत यह है कि वे सड़क पर निकलते समय हेलमेट से ज्यादा ‘हॉर्न और हिम्मत’ साथ लेकर निकलते हैं। क्योंकि कब कोई नंदी महाराज बीच सड़क पर ध्यान मुद्रा में बैठ जाएं, इसका कोई भरोसा नहीं। ट्रैफिक जाम अब गाड़ियों से नहीं, “गौवंशीय विचार-विमर्श” से लग रहा है।इधर गौशालाओं को लाखों का डोनेशन दिया जा रहा है। कागज़ों में व्यवस्थाएं भी शानदार दिखाई देती हैं—चारा, पानी, देखभाल सब कुछ ‘फुल ऑन’। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि नंदी अब भी खुलेआम शहर में भ्रमण कर रहे हैं, मानो उन्हें भी इस व्यवस्था पर भरोसा नहीं।नगरपालिका ने राहत देने के लिए टेंडर जरूर निकाल दिए हैं। टेंडर निकले, फाइलें चलीं, निरीक्षण भी हुए—लेकिन नंदी वहीं के वहीं। निरीक्षण इतने “गंभीर” हैं कि संदेह खुद निरीक्षण पर होने लगा है, न कि समस्या पर।
*कुल मिलाकर, शिवगंज में हालात ऐसे हैं कि*
“नंदीशाला इंतजार में है, और नंदी सड़कों के सरताज हैं।”
CMO Rajasthan Government of Rajasthan DIPR, Department of Information & Public Relations, Rajasthan