06/05/2026
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। अहिरौली थाना क्षेत्र के कोटवा गांव में 14 साल के नितेश को सांप ने डंसा था, लेकिन अस्पताल की कथित लापरवाही और डॉक्टर के रवैये ने मामले को हिंसक मोड़ दे दिया। मासूम की मौत के बाद भड़की भीड़ ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को खेतों में आधा किलोमीटर तक दौड़ाकर पीटा।
**"अम्मा कह दो बेटा"— मां की बेबसी ने सबकी आंखें भिगो दीं**
मृतक नितेश की मां सुमन देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। वह अपने कलेजे के टुकड़े के शव को सीने से चिपकाकर बस एक ही विनती कर रही हैं— *"बेटा, बस एक बार अम्मा कह दो।"* परिजनों का आरोप है कि सांप के काटने के बाद वे 10 मिनट में अस्पताल पहुँच गए थे, लेकिन डॉक्टरों ने इलाज शुरू करने के बजाय 'पर्ची' बनवाने की औपचारिकता में समय बर्बाद किया।
**दीवार फांदकर भागे डॉक्टर, खेत में हुई पिटाई**
अस्पताल में मौजूद भीड़ का गुस्सा देख डॉक्टर प्रिंस गुप्ता पिछले दरवाजे की खिड़की से कूदकर और 5 फीट ऊंची दीवार फांदकर खेतों की तरफ भागे। लेकिन आक्रोशित ग्रामीणों ने उन्हें देख लिया और करीब 500 मीटर तक पीछा कर पकड़ लिया। ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि डॉक्टर नशे की हालत में थे और उन्होंने इलाज में जानबूझकर देरी की।
**पुलिस ने बड़ी मुश्किल से छुड़ाया, इलाके में तनाव**
घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम, तहसीलदार और कई थानों की पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद डॉक्टर को भीड़ के चंगुल से छुड़ाकर सरकारी गाड़ी में बिठाया, लेकिन गुस्साए लोगों ने घंटों तक रास्ता रोके रखा। प्रशासन के आश्वासन और डॉक्टर का मेडिकल सैंपल लिए जाने के बाद ही लोग शांत हुए।
**पत्रकार की कलम से: कुछ चुभते सवाल**
1. इमरजेंसी के मामलों में 'पर्ची' और 'कागजी कार्रवाई' के नाम पर कीमती समय बर्बाद करना क्या अपराध नहीं है?
2. यदि डॉक्टर पर नशे में होने के आरोप सच हैं, तो क्या ऐसे 'रक्षकों' के भरोसे जनता की जान सुरक्षित है?
3. क्या प्रशासन केवल ऐसी हिंसक घटनाओं के बाद ही जांच और सैंपल लेने जैसी फुर्ती दिखाएगा?
डॉक्टर का दावा है कि उन्होंने पूरी कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों का आक्रोश सिस्टम के प्रति उस अविश्वास को दर्शाता है जो समय पर इलाज न मिलने से पैदा होता है। फिलहाल, शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट का इंतजार है।
इस घटना पर आपकी क्या राय है? क्या डॉक्टर की पिटाई जायज थी या यह हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था की सामूहिक विफलता है? अपनी राय कमेंट में लिखें।